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क्या है ''मीजल्स रूबेला''( MR), इन जगहों से करवाएं बच्चों का MR टीकाकरण

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान के तहत सेंट जोसेफ मिशन स्कूल छतीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ में शनिवार को 380 बच्चों को टीके लगाए गए। MR यानि ''मीजल्स रूबेला'' टीकाकरण अभियान को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चलाया जा रहा है।

क्या है मीजल्स रूबेला( MR), इन जगहों से करवाएं बच्चों का MR टीकाकरण
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राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान के तहत सेंट जोसेफ मिशन स्कूल छतीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ में शनिवार को 380 बच्चों को टीके लगाए गए। MR यानि 'मीजल्स रूबेला' टीकाकरण अभियान को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चलाया जा रहा है।

इस अभियान के तहत पूरे देश के लगभग 9 लाख बच्चों को इसका लाभ मिलेगा। यह टीका बच्चों को खसरा और रूबेला बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करेगा। इस एमआर वैक्सिन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है तथा यह पूर्ण रूप से सुरक्षित है।

दरअसल दुनिया भर में, WHO सदस्य देशों में वर्ष 2012 में लगभग 100,000 रुबेला मामले सामने आए, हालांकि संभावित रूप से वास्तविक मामले इससे कहीं अधिक हैं। 2012 में सबसे अधिक मामलों वाले देश थे टिमोर-लेस्ट, मेसिडोनिया, थाइलैंड, ताजिकिस्तान, और सीरिया।

क्या है 'मीजल्स रूबेला' (MR)

MR यानि 'मीजल्स रूबेला' को देश में खसरे के नाम से जाना जाता है। खसरा और रूबेला बच्चों में होने वाली एक खतरनाक बीमारी है। इसके कारण बच्चों को विकलांगता और असमय मृत्यु का खतरा बना रहता है। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान किसी महिला को रूबेला या खसरा हो जाए, तो इसका असर उसके नवजात भ्रूण या नवजात शिशु के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है।

क्या है MR टीकाकरण

केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान की शुरूआत 6 अगस्त 2018 को WHO की मदद से की थी। इस योजना के अंतर्गत 9 माह से लेकर 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। MR यानि 'मीजल्स रूबेला' टीके को आमतौर पर खसरे की बीमारी से बचाव के लिए बच्चों में लगाया जा रहा है।

कहां से करवा सकते हैं टीकाकरण

इस अभियान के तहत हर जिले के स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के टीकाकरण के लिए सरकारी, गैर सरकारी, केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, आश्रम-छात्रावास, मदरसा तथा आवासीय स्कूल एवं अन्य स्कूलों के साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों भी इस टीकाकरण को लगवाया जा सकता है। इसके अलावा गांवों में बचे बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए ट्रेंड मेडिकल टीमों को गांव में भेजकर सभी बच्चों का टीकाकरण किये जाने की योजना बनाई गई है।

कलेक्टर उमेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के जिला टास्क फोर्स की बैठक में अभियान की तैयारियों की समीक्षा की गई। जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की चूक बचने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों की जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के शासकीय एवं प्रशासकीय 1711 स्कूलों में 1865 टीकाकरण सत्र चलाए जाएंगे। स्कूलों में टीकाकरण के लिए जहां 206 टीम गठित की गई है। एक टीम में एक एएनएम और तीन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी शामिल की जाएगीं।

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