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Mother's Day 2022: मां हैं अनमोल खजाना, जो दवा भी है और दुआ भी

मां है तो हमारा वजूद है, मां बिना हम कुछ भी नहीं हैं। मां ही हमें अपने ममत्व से गढ़ती है, संवारती है। जीने की कला सिखाती है। अच्छे-बुरे की पहचान करा हमें एक नेक इंसान बनाती है। उसकी नसीहतें जीवन-पर्यंत हमें राह दिखाती हैं। मां हमारे भीतर का वह आलोक है, जो पग-पग पर हमारा मार्ग प्रशस्त करता है। आइए, मातृ दिवस पर हम भी अपनी मां के पोर-पोर को अपने प्रेम-स्नेह से भर दें।

Mothers Day 2022:  मां हैं अनमोल खजाना, जो दवा भी है और दुआ भी
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Mother's Day 2022: मां (Mothers) का होना दुनिया के सबसे बड़े खजाने के होने जैसा है। यदि किसी के पास मां है तो सब कुछ है। अगर मां नहीं है तो वह सबसे गरीब है। दरअसल, हम सबके जीवन से मां की इतनी संवेदनाएं जुड़ी होती हैं कि उनके बिना हम बिल्कुल खोखले और निष्प्राण हो जाएंगे। हमारी इच्छाएं, आदतें, शौक, मिजाज, ख्वाब सब मां का ही तो दिया हुआ है। मां की ममता, करुणा, समर्पण के कारण ही हम जीवन में एक इंसान कहे जाने के योग्य बन पाते हैं। मां माटी से बनी देह में भावों का गहना पहनाती है। उठने-बैठने, चलने का सलीका सिखाती है। मां ही है, जो हमारे भीतर आई निर्दयता-निर्ममता को बाहर निकाल हमें मनुष्यता के सांचे में ढालती है। इसलिए मां दुनिया का सबसे बेशकीमती खजाना है।

मां के आंचल से बंधे हैं हम

हम मां की यादों से कुछ यूं बंधे रहते हैं, जैसे माला में धागा। अपनी नसीहतों के जरिए मां ताउम्र हमारे साथ मौजूद रहती है। जीवन के हर मोड़ पर हमें मां की जरूरत होती है। वैसे तो हमें जीवन की युद्धभूमि में अकेला छोड़ने से पहले मां हमें अपनी सीखों और समझाइशों के शस्त्र से अच्छी तरह लैस कर देती है। फिर भी अगर हम किसी संकट की में फंस जाएं और किसी कारणवश कोई भी मार्ग न सूझे तो हम लौटकर मां के पास ही आते हैं। मां हमसे दूर रहकर भी किसी न किसी रूप में हमें सही रास्ता दिखाने आ जाती है। कभी हमारे दिल की आवाज बन, कभी किसी बड़े के मुंह से निकले आशीर्वचन बनकर। मां की नसीहतें जीवन भर गांठ बांधकर रख ली जाती हैं, जो आड़े वक्त में सही राह दिखाती हैं।

मांएं एक जैसी होती हैं

हर किसी के पास अपने बचपन और मां से जुड़े किस्से-कहानियां होती हैं। लेकिन हर कहानी की बुनावट में दुनिया की तमाम मांएं एक जैसी होती हैं। प्यार करने वाली, हमारी गलतियों को माफ करने वाली, हमें बार-बार समझाने वाली, पिता की डांट से बचाने वाली, हमारी जिद पूरी करने वाली, हमारी फिक्र में अपने को भुला देने वाली, हमारे स्वप्नों को परवाज देने वाली। इस संसार में मां की चाहत जितना सुंदर, सलोना और सुखद कुछ भी नहीं है। जब मां हमसे दूर होती है तो हम सब उसकी यादों के सहारे अपने आपको संतुष्ट करते हैं।

हर जगह तलाशते हैं मां

हम हर जगह मां जैसा प्यार तलाशने की कोशिश करते हैं। आप इस उदाहरण से इस बात को समझें, एक हिंदुस्तानी लड़के को अमेरिका की एक कंपनी से जॉब का ऑफर आया। वह बहुत खुश हुआ। उसने मां की आज्ञा ली और अमेरिका चला गया। उसे अच्छी जॉब, अच्छा घर और हर सुख-सुविधा मिली। फिर भी उसे कुछ अखरता रहा। उसने सोचा, खूब सोचा, समझ में आया कि उसे तो हर घड़ी मां के प्यार की कमी महसूस होती है। वह खाने में मां के हाथों का स्वाद तलाशता है और घर में मां की उपस्थिति। कपड़ों में मां का स्पर्श। यात्रा में मां की दुआएं। असल में बचपन से हम मां के स्नेह के इतने आदी हो जाते हैं कि हर रिश्ते में उसे ही तलाश करते हैं।

मां होती है दुआ भी-दवा भी

मां हर हाल में मां होती है। अपनी मूल प्रवृत्ति को कभी नहीं छोड़ती। सिर्फ इंसान ही नहीं पशु, पक्षी भी अपने संतान के प्रति वही ममता लुटाते हैं। एक मां अपने शिशु के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच होती है। संतान मां के आंचल में सबसे अधिक महफूज महसूस करती है। जब इंसान अपनी जिंदगी की भागदौड़, टार्गेट्स, उलझनों से थककर सुकून चाहता है तो वह मां की गोद ही तलाशता है। उसे अपनी बूढ़ी मां की हथेलियों का स्पर्श एक जादुई अहसास-सा लगता है। उसकी सारी निराशा, दुख, अवसाद को कमजोर हड्डियों वाली मां पलक झपकते दूर कर सकती है। इसलिए संतान के लिए मां दुआ भी है और दवा भी।

मां को शब्दों में बयां करना आसान नहीं। मां तो स्नेह की ऐसी डोरी है, जिसमें बंधकर हम दुनिया के सबसे खुशनसीब इंसान हो जाते हैं। जिस तरह प्रकृति हमें सिर्फ देना जानती है, उसी तरह मां आजीवन अपने स्नेह के वर्षाजल से हमें सिंचित करती रहती है। हमें सदैव खुश रखती है।

मां को दें सम्मान

मांएं ममतामयी होती हैं। अपने बच्चों के लिए सर्वस्व लुट देती हैं। फिर भी कई ममतामयी मांएं संतान की उपेक्षा का शिकार बनती हैं, वृद्धाश्रम में छोड़ दी जाती हैं। बचपन में जिस मां के पहलू से निकलना हमें एक दिन के लिए गंवारा नहीं होता था, वही मां अब बरसों बरस हमारे लौटने की प्रतीक्षा में गुजार देती है। मां बूढ़ी होकर भी मां बनी रहती है, लेकिन हम बड़े होने के बाद बदल जाते हैं। क्या जीवनभर हम पर प्यार लुटाने वाली मां बूढ़ी होने पर हमारे प्यार, सम्मान की अधिकारी नहीं? मदर्स-डे के ही बहाने हम अपनी मां को उसके उपकारों के बदले थोड़ा-सा प्यार जरूर दें।

लेखक- सरस्वती रमेश (Saraswati Ramesh)

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