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महि‍लाओं से ज्‍यादा बांझ होने लगे हैं पुरुष, जानि‍ए कैसे

टेस्ट-ट्यूब बेबी सेन्टर में प्रतिदिन 8-10 दंपति इनफर्टिलिटी की समस्या लेकर आते हैं।

महि‍लाओं से ज्‍यादा बांझ होने लगे हैं पुरुष, जानि‍ए कैसे
भोपाल. बदलती जीवन शैली के बीच एक नई समस्या समाज में जन्म ले रही है। यह इनफर्टिलिटी की समस्या है, जिसके कारण दंपति संतान सुख से वंचित हो रहे हैं। आज के समय में गर्भधारण न करने की समस्या आम होती जा रही है। गर्भधारण न कर पाने के पीछे कई कारण होते हैं। टेस्ट-ट्यूब बेबी सेन्टर में प्रतिदिन 8-10 दंपति इनफर्टिलिटी की समस्या लेकर आते हैं। इसके चलते उन्हें टेस्ट-ट्यूब बेबी का सहारा लेना पड़ता है। भोपाल में इनफर्टिलिटी की समस्या 40 प्रतिशत तक है। जिसमें महिलाओं में 35 प्रतिशत और पुरुषों में 65 प्रतिशत इनफर्टिलिटी की समस्या है। और वे इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन का विकल्प चुन रहे हैं।
पुरुषों में सबसे आम समस्या शुक्राणुओं की संख्या में कमी होना है। साथ ही, माफरेलॉजी फोलरेग्य की समस्याएं और शुक्राणु की गति में अभाव भी हो सकता है। कुछ मामलों में तो पति-पत्नी दोनों ही इनफर्टिलिटी के शिकार होते हैं।
पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या अधिक
शहरी युवकों में हाल के समय में इनफर्टिलिटी तेजी से बढ़ रही है। इसकी एक बड़ी वजह तो जानकारी का अभाव है। साथ ही तनावपूर्व और अस्वस्थ जीवनशैली ने भी पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या को और बढ़ा दिया है। गलत खानपान और ज्यादा काम करने से तनाव बढ़ता है, जिसका सीधा असर स्वास्थ पर पड़ता है। पुरुषों में धूम्रपान करना इसकी सबसे बड़ी वजह है। साथ ही ज्यादा शराब पीने से भी इनफर्टिलिटी की समस्या आती है। कई बार अस्वस्थ आहार के कारण भी स्पर्म की क्वालिटी और संख्या पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
नपुंसकता भी कारण
महिला डॉक्टरों के अनुसार उनके पास आने वाली कई महिलाओं की अपनी कहानी है। उनके लाइफ पार्टनर ही उनसे संपर्क नहीं करते, ऐसे में गर्भधारण कैसे हो सकता है। पुरुषों में नपुंसकता के कई कारण हो सकते हैं। कुछ युवतियां तो शादी के बाद भी वजिर्न पाई जाती हैं। ऐसे परिवारों को अलग से चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती है। हालांकि पुरुष अपनी इस तरह की समस्याओं को लेकर डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं और दोष महिलाओं पर मढ़ते हैं। यदि समय रहते पुरुष डॉक्टरों से संपर्क करें तो इस तरह की समस्या से बचा जा सकता है।
गर्भधारण न करने के कारण
डॉ. मोनिका सिंह से हुई चर्चा में उन्होंने बताया कि गर्भधारण न कर पाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दैनिक जीवनचर्या और आदतों में बदलाव के चलते फर्टिलिटी रेट में चिंताजनक कमी आई है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज के अनुसार पूरी दुनिया में दंपत्तियों में इन्फर्टिलिटी रेट में कमी आ रही है। इसका मुख्य कारण पर्यावरण के तत्वों और जीवनशैली में भारी बदलाव है। भारतीय चिकित्सा शोध परिषद् (आईसीएमआर) ने हाल ही में बताया कि भारत में पिछले तीन दशकों में इन्फर्टिलिटी के मामलों में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
क्या है टेस्ट-ट्यूब-बेबी, सरोगेट मदर (गर्भदान द्वारा टेस्ट-ट्यूब-बेबी)
कुछ विशेष परिस्थिति में अंडे और स्पर्म का मिलन नहीं हो पाता, जिससे महिला मातृत्व के सुख से वंचित रह जाती है। इन विट्रो फर्टिलायजेशन (आइ.वी.एफ) ऐसी ही स्थितियों का इलाज है। इसके अलावा भी कई माध्यमों से यह प्रक्रिया की जाती है। जिससे महिला को मातृत्व का सौभाग्य प्राप्त हो सकता है।
- आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलायजेशन)
- आईसीएसआई-आईएमएसआई (इन्ट्रा-सायटोप्लास्मिक -स्पर्म-इंजेक्शन)
- क्रायोप्रिर्जव
- अंडदान द्वारा टेस्ट-ट्यूब-बेबी
यह मातृत्व पाने का अचूक इलाज है
डॉ रणधीर सिंह के मुताबिक, टेस्ट-ट्यूब बेबी वर्तमान में मातृत्व पाने का अचूक इलाज है। एक बार टेस्ट-ट्यूब बेबी द्वारा गर्भधारण करने के बाद कई केसों में दोबारा स्वयं गर्भधारण करने के अवसर बढ़ जाते हैं।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, फर्टिलिटी के कारण, बचने के उपाय और आयुर्वेद से इलाज -
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