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गजब की इफेक्टिव होती है ये “माइंड ट्रिक्स”

मानव व्यवहार सिर्फ ज्ञान या समझ से संचालित नहीं होता

गजब की इफेक्टिव होती है ये “माइंड ट्रिक्स”
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नई दिल्ली. हम शैक्षिक स्तर पर भले ही कितना आगे बढ़ जाएं लेकिन मानवीय व्यवहारगत कुछ क्रियाओं की उलझन यानी माइंड ट्रिक्स में अक्सर उलझ ही जाते हैं। कुछ चालाक लोग इनका उपयोग अपने फायदे के लिए भी करते हैं। एक नजर, ऐसी ही कुछ कॉमन माइंड ट्रिक्स पर -

उलझा लेती हैं माइंड ट्रिक्स

मानव व्यवहार सिर्फ ज्ञान या समझ से संचालित नहीं होता है। जीवन व्यवहार को काफी हद तक समाज में फैले या प्रचलित अंधविश्वास, पुनरावृति और घिसी-पिटी बातें ही संचालित करती हैं, क्योंकि वो ज्यादातर लोगों द्वारा बरती जा रही होती हैं। इसलिए समाज की सामान्य सोच, आम धारणा, पढ़े-लिखों और गैर पढ़े-लिखों, में एक सी ही होती है, जब तक कि आप वाकई कोई विलक्षण व्यक्तित्व न हों (जो कि आमतौर पर 10,000,00 में से कोई एक ही होता है) वरना तो जीवन की सामान्य मान्यताओं के मामले में बहुत पढ़े-लिखे और बिलकुल गैर पढ़े-लिखों के बीच बहुत फर्क नहीं होता। यही वजह है कि चाहे निरक्क्षर श्रमिक हो या कोई बड़ा प्रोफेसर, सबका दिमाग अकसर उलझनों यानी ‘माइंड ट्रिक्स’ में आसानी से फंस जाता है। यही वजह है कि कई बार समाज के पूरी तरह से साक्षर हो जाने के बाद भी समाज से अंधविश्वास नहीं खत्म होते।

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आंखें बताती हैं मन की बात

बॉडी लैंग्वेज का आईना आंखों की पुतली के फैलाव को निर्णय लेते समय की अनिश्चितता से दर्शाता है। इसलिए बाजार में विक्रेता आपकी आंखों पर नजर रखते हैं, उन्हीं से उन्हें पता चलता है कि आप वाकई खरीदारी करने वाले ग्राहक हो या यूं ही मगजमारी कर रहे हो। दरअसल, जब किसी ग्राहक को किसी चीज की कीमत सुनकर सेल्समैन उन्हें अपने आंखों की पुतलियों को बड़ा बनाते देखते हैं तो वो समझ जाते हैं या तो उसकी हैसियत नहीं या फिर उसे कीमत के वाजिब होने पर भरोसा नहीं है और ये दोनों ही वजहें उसे वास्तविक खरीदार न होने की तरफ ले जाती हैं।

रंग भी डालते हैं प्रभाव

रंगों का अपना मनोविज्ञान होता है। लेकिन यह जानने के बाद भी रंगों के मनोविज्ञान का हमारे अवचेतन पर असर पड़ता है। मसलन, लाल रंग हमारे दिमाग में प्रभुत्व और आक्रामकता का भाव जगाता है। हम भले जानते हों कि लाल रंग का ये असर होता है, इसके बाद भी लाल रंग का मनोविज्ञान हम पर अपना पूरा प्रभाव डालता है। देखने में आता है कि लाल किट्स वाले मुक्केबाजों के नीले रंग की किट्स वाले मुक्केबाजों के मुकाबले से जीतने की संभावना पांच फीसदी ज्यादा होती है।

मुस्कान का पड़ता है असर

मुस्कुराना हमारी सबसे जटिल और सबसे आसान अभिव्यक्ति है। मुस्कुराहट हमारी खुशी, हमारे गम, हमारे गुस्से हर चीज को बयान करती है। इसी का ज्यादा परिपक्व और विकसित रूप है हंसी और खिलखिलाहट। हंसने मुस्कुराने के ये तमाम प्रकार हमें सामाजिक तौरपर एक-दूसरे के नजदीक लाते हैं। जब हम हंसते या मुस्कुराते हैं तो यह दर्शाते हैं कि हम जिन्हें देखकर हंस या मुस्कुरा रहे हैं, उनसे प्यार करते हैं। हम उनसे सहमत हैं आदि। ऐसे में देखने में आया है कि वह शख्स जिसको देखकर आप हंस या मुस्कुरा रहे होते हैं, वो आपको अपना समझ लेता है।

सेल्समैन की ट्रिक्स

सालों से एक और सामान्य ट्रिक्स है, जिसके चलते हम बेवकूफ बनते रहे हैं। इस ट्रिक का सेल्समैन अकसर फायदा उठाते रहे हैं। वास्तव में सेल्समैन हमारे दिमाग को प्रभावित करने में माहिर होते हैं। उनकी एक क्लासिक और सोचा जाए तो बड़ी आम तरकीब होती है कि शो रूम में चार जूसर मिक्सर दिखाएंगे, उनमें से तीन की कीमत 2500 रुपए बताएंगे जबकि चौथे की कीमत 4000 रुपए बताएंगे। फिर बड़े आराम से ग्राहक से कहेंगे ये 4000 कीमत वाला जूसर कोई खास नहीं यही काम ये 2500 रुपए वाला भी करता है। ऐसे समय हम ग्राहक कभी नहीं पूछते कि फिर इसकी कीमत ज्यादा क्यों है?

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कुल मिलाकर कहने की बात ये है कि सदियों से इंसानी स्वभाव की परत खोलने वाले माइंड ट्रिक्स आज भी न केवल मौजूद हैं बल्कि अभिव्यक्ति की तमाम जटिलताओं को हासिल कर लिए जाने के बाद भी ये माइंड ट्रिक्स आज भी अपने नतीजों में पूरी तरह से खरे उतरते हैं। बशर्ते आप उन्हें पढ़ना जानें।

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