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तो इस वजह से शादीशुदा होने के बाद भी ऐसी महिलाओं को माना जाता है कुंवारी

हस्तिनापुर के राजा पांडु की पत्नी कुंती को ऋषि दुर्वासा ने एक मंत्र दिया था। मंत्र ऐसा था कि उसके उपयोग से वह जिस भी देवता का ध्यान कर जप करेंगी, उनसे उन्हें पुत्र की प्राप्ति होगी। कुंती यह मंत्र को परखना चाहती थी।

उन्होंने सूर्य का ध्यान करते हुए मंत्र का जप किया। सूर्य प्रकट हुए और उन्हें पुत्र के रूप में कर्ण की प्राप्ति हुई। कुंती और पांडु का विवाह स्वयंवर में हुआ था। पांडु को शाप था कि वह अगर स्त्री को स्पर्श करेंगे तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। पांडु आए दिन इस चिंता में डूबे रहते थे कि उनकी मृत्यु के बाद कुरु वंश खत्म हो जाएगा।

इसलिए कुंती ने धर्म देव से युधिष्ठिर, वायुदेव से भीम और इंद्र देव से अर्जुन को पुत्र के रूप में पाया। यही कारण है कि अलग-अलग देवताओं से संतान प्राप्ति के बाद भी कुंती को कौमार्य (पवित्र) माना गया है।

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