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सावधान! बच्चों को भूलकर भी ना दें ये इलेक्ट्रॉनिक गेजैट, हो सकते हैं इन गंभीर बीमारियों के शिकार

माना आज हम सभी एक मशीनी युग में जाने की तैयारी कर रहे हैं। जहां हम अपना हर एक काम मशीनों के जरिए सिर्फ एक बटन दबाकर कर सकेगें, लेकिन आज के दौर में भी हम अभी से ही अपने दैनिक जीवन के कई सारे कामों के लिए मशीनी उपकरणों पर निर्भर हो चुके हैं।

सावधान! बच्चों को भूलकर भी ना दें ये इलेक्ट्रॉनिक गेजैट, हो सकते हैं इन गंभीर बीमारियों के शिकार

माना आज हम सभी एक मशीनी युग में जाने की तैयारी कर रहे हैं। जहां हम अपना हर एक काम मशीनों के जरिए सिर्फ एक बटन दबाकर कर सकेगें, लेकिन आज के दौर में भी हम अभी से ही अपने दैनिक जीवन के कई सारे कामों के लिए मशीनी उपकरणों पर निर्भर हो चुके हैं।

विडंबना तो ये है कि मनुष्य ने इन मशीनी उपकरणों का आविष्कार अपने कामों को आसान करने और एक-दूसरे से हमेशा जुड़े रहने के लिए किया था, लेकिन धीरे-धीरे लेपटॉप और मोबाइल फोन्स जैसे मशीनी उपकरण हमारी हेल्थ के साथ-साथ हमारे रिश्तों में भी अपनी एक खास जगह बना चुके हैं। जिसके बेहद ही गंभीर और खतरनाक परिणामों का सामना हमें करना पड़ सकता है।

इसलिए आज हम आपको बड़ों के साथ ही बच्चों पर लेपटॉप और मोबाइल फोन्स के पड़ने वाले Side Effects के बारे में बता रहे हैं।

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लेपटॉप और मोबाइल फोन्स के बच्चों पर पड़ने वाले Side Effects :

1. गलत पॉश्चर में बैठना ,पीठ के दर्द, गर्दन और कंधे में तनाव :

ऑफिस और घर पर कई घंटों तक लेपटॉप और डेस्कटॉप पर काम करने से लोगों में लगातार गर्दन,पीठ और कंधों में दर्द की समस्या बढ़ रही है। यही नही, इससे बड़ों और बच्चों में आलस की समस्या भी साफ तौर पर देखी जा रही है। जिससे बच्चों की हेल्थ के साथ-साथ उनकी पर्सनेलिटी पर भी बुरा अकर पड़ता हैं।

2. कलाई में दर्द :

अक्सर लोगों को कंप्यूटर के की-बोर्ड और माउस के ज्यादा इस्तेमाल से कलाई और हाथों की अंगुलियों के जोड़ों में दर्द की शिकायत रहने लगती है। कई बार परेशानी इतनी ज्यादा बढ़ जाती हैं कि दर्द के साथ ही सूजन और हाथों में कठोरता भी महसूस होने लगती है। जिसे मेडिकल भाषा में कार्पल सुरंग सिंड्रोम कहते हैं।

3. आंखों की समस्या :

कंप्यूटर,लेपटॉप और मोबाइल पर काम करते वक्त हमारी आंखों के झपकने की गति काफी कम हो जाती है जिससे आंखों में मौजूद पानी धीरे-धीरे सूखने लग जाता है। इसके अलावा मोबाइल के लंबे समय तक यूज करने पर फोन की तेज नीली रोशनी से आंखों के रेटिना को गंभीर नुकसान पहुंचता है,साथ ही आंखों में जलन होना और फोकस करने में परेशानी होना भी आंखों की बीमारी के लक्षण हैं।

4. सिरदर्द :

आमतौर पर बच्चों में सिरदर्द की समस्या कम होती है,लेकिन आजकल स्कूल के सारे कामों को कंप्यूटर पर करने से बच्चों की आंखों के साथ ही उनके सिर पर भी असर साफतौर पर देखा जा सकता है। जिससे बच्चों को अक्सर सिरदर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है।

5. तनाव :

कंप्यूटर,लेपटॉप और मोबाइल पर लंबे समय तक काम करने से हमारे शरीर पर काफी गहरा असर होता है। जिससे हमें चिड़चिड़ापन,नींद कम होना और तनाव संबंधी समस्या आदि परेशान करती हैं। यही नहीं, एक शोध में भी मोबाइल फोन और अन्य मशीनी उपकरणों के इस्तेमाल से मस्तिष्क गतिविधि और नींद में गड़बड़ी में बदलाव देखें गए हैं। जिससे धीरे-धीरे बच्चों में गंभीर मानसिक बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।

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6. शारीरिक थकान :

जब हम किसी काम को लंबे समय तक बिना रूके करते हैं तो हमारे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है और मांसपेशियों और जोड़ों पर दबाव बनने लगता है। जिससे हमें कम करने पर भी शारीरिक थकान महसूस होने लगती है।

8. मोटापा :

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आज के दौर में एक अच्छा बेबीसिटर मान सकते हैं क्योंकि वो बच्चों को काफी लंबे समय तक एक ही जगह पर रोक कर रख सकते हैं, लेकिन शारीरिक गतिविधि की कमी की वजह से बचपन में मोटापे की बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

9. हेडफोन के साइड इफैक्ट :

लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन ने 2011 में एक रिसर्च में दावा किया कि मोबाइल फोन के हेडफोन पर घंटो तक जीवित रहने वाले खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं, जो हवा के साथ बच्चों के शरीर में आसानी से पहुंचकर उनको बीमार बनाते हैं। इसलिए हमेशा रेडिएशन एक्सपोजर को कम करने के लिए हैंडफोन का इस्तेमाल 20 सेमी दूर और सीमित अवधि के लिए ही किया जाना चाहिए।

10. कैंसर होने का खतरा :

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अधिक उपयोग आपके कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकता है, लेकिन एक शोध में पाया गया है कि शरीर में कैंसर के विकास के लिए कई सालों का समय लगता है।

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