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प्यार की मिसाल कहे जाने वाले लैला-मजनू की कहानी पढ़कर रोक नहीं पाएंगे आंसू

कई बार आपने भी ऐसा सुना होगा कि जब तक दुनिया में प्यार जिन्दा रहेगा लैला-मजनू, रोमियो-जूलियट और शीरीं-फरहाद का नाम याद किया जाएगा।

प्यार की मिसाल कहे जाने वाले लैला-मजनू की कहानी पढ़कर रोक नहीं पाएंगे आंसू

कई बार आपने भी ऐसा सुना होगा कि जब तक दुनिया में प्यार जिन्दा रहेगा लैला-मजनू, रोमियो-जूलियट और शीरीं-फरहाद का नाम याद किया जाएगा।

प्यार के नाम पर इन जोड़ियों ने मिसाल कायम किया है। इतना ही नहीं इन्होंने अपनी प्रेम कहानियों के दम पर अभी तक अपनी मौजूदगी कायम की हुई है।

ये नाम प्यार की डगर पर एक तो नहीं हुए लेकिन अभी भी प्यार के नाम पर इन्हीं की मिसालें दी जाती हैं। आज की इस रिपोर्ट में हम आपके लिए लैला-मजनू की कहानी लेकर आए हैं।

ये है कहानी

लैला-मजनू की कहानी 7वीं सदी की है। उस समय अरब के रेगिस्तानों में अमीरों का बसेरा हुआ करता था। उन्हीं अमीरों में से अरबपति शाह आमरी के बेटा कैस इब्न आमरी था। इसे ही लोग कैस 'मजनूं' भी कहते थे। कैस को एक लड़की से मोहब्बत हो गई, जिसका नाम लैला था।

इस प्रेम कहानी के बारे में बताने वाले कई लोगों ने इस बात का जिक्र किया है कि लैला एक सियाहफाम यानी काली लड़की थी और लैला पर एक गोरे नौजवान कैस का दिल आ गया था।

लोगों ने जब मजनू से पूछा कि तुमने इस लड़की में क्या देखकर मोहब्बत की है, यह तो काली है और तुम गोरे हो। इस बात पर मजनू न जवाब दिया कि कुरान शरीफ के हर हर्फ काले रंग के अक्षर में ही लिखे गए हैं। जहां आशिक का दिल आता है वहां फिर काले और गोरे का अंतर नहीं रह जाता।

लैला को भी मजनू से प्यार हो गया था। लेकिन लैला के घर वालों को मजनू पसंद नहीं था। इसी के चलते लैला के घरवालों ने उसकी शादी बख्त नाम के शख्स से कर दी। लेकिन लैला ने अपने शौहर से साफ-साफ इंकार कर दिया कि वह मजनू के अलावा किसी और की नहीं हो सकती।

मजनू की याद में वह लगातार बीमार रहने लगी और उसकी स्थिति मौत के कगार पर आ पहुंची। मजनू ने जब लैला की ऐसी हालत सुनी तो वह उससे मिलने के लिए अरब के तपते रेगिस्तानों में गिरता-पड़ता गर्म धूल की थपेड़ों में मारा-मारा फिरता हुआ लैला के पास पहुंचा। लैला के पास पहुंचने पर लोगों ने उसकी हालत देखी और उसे पत्थर मार कर भगाने लगे।

एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक कहानियों में विदित है कि दोनों के प्यार में इतनी सच्चाई और ताकत थी कि तकलीफ एक को होती तो दर्द दूसरे को होता। यही कारण है कि जब लोग मजनू को भगाने के लिए पत्थर मारने लगे थे तो लैला जख्मी हो रही थी। मजनू से न मिल पाने के गम में लैला की मौत हो जाती है और ऐसा कहा जाता है कि लैला की सांसे रुकने के तुरंत बाद ही मजनू की भी मौत हो जाती है।

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