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जानिए ब्रेन ट्यूमर जैसी घातक बीमारी की कैसे करें पहचान...

इस अध्ययन में यह भी सामने आया है कि ट्यूमर की पहचान होने के बाद सीआरपी की बढ़ी मात्रा वाले जीबीएम से पीड़ित मरीज के जीवित रहने की अवधि कम ही होती है। इसका सही समय पर पता चलने से इसके संभावित इलाज को सही दिशा में लक्ष्य किया जा सकता है और यह तकनीक इसकी पहचान करने का सरल और सस्ता तरीका है। यह अध्ययन यूरोप के जर्नल आॅफ प्रोटेओमिक्स में प्रकाशित हुआ है।

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