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ऐसे करें बच्चों में ''अब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया'' बीमारी की पहचान

इस बीमारी में सोते वक्त बच्चे का थ्रोट रिलैक्स मोड में चला जाता है।

ऐसे करें बच्चों में
नई दिल्ली. आमतौर पर हम छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन यही छोटी बातें कई बार बड़ी बन जाती है और इसका खामियाजा भी आपको ही भुगतना पड़ता है। आपको बता दें कि जब भी आपकी बच्ची रात में सोए तो सोते वक्त वह सांस ले रही है या नहीं? इसका मतलब ये है कि बच्ची रात में सोते वक्त सांस लेना भूल जाती हैं इससे बच्ची अपना दम भी तोड़ सकती है।
जी हां- मेडिकल सांइस की दुनिया में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां एक बच्ची दिन में 20 बार सांस लेना भूल जाती है। लीसिटी रैम नाम की इस बच्ची की मां रात भर जागकर उसकी सांस लेने को नोटिस ना करे, तो वह कभी भी अपना दम तोड़ सकती है। इस बच्ची के साथ ऐसा अब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया नाम की बीमारी की वजह से हो रहा है।
मेडिकल साइंस के अनुसार, इस बीमारी में सोती हुई बच्ची का थ्रोट रिलैक्स मोड में चला जाता है और इस वजह से उसकी सांस की नली सिकुड़ जाती है और सांसें थम जाती हैं। जब भी बच्ची सांसें लेना बंद करती है, बच्ची की मां अपनी बेटी को सीपीआर यानी के खुद ही से उसकी छाती को बार-बार दबाकर उसकी सांसें वापस लाती है। डॉक्टरों ने बच्ची को सीपीएपी यानी के कंटिनुअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर मशीन लगाने से मना कर दिया है, क्योंकि बच्ची अभी बहुत छोटी है। डॉक्टर इस बच्ची के इलाज के लिए कोई और तरीका निकाल रहे हैं। इसलिए जब भी रात में आपका बच्चा सोए तो एक बार उसका सांस जरुर नोटिस करें।
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