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अगर आपको है किडनी की समस्या है, तो भूलकर भी न करें ये गलती

अगर आपके किडनी या गुर्दे काम करना बंद कर देते तो आपका शरीर बेकार हो जाता है । क्योंकि किडनी हमारे शरीर में सफाई का काम करती हैं। यह गंदगी बाहर निकालने वाले सिस्टम का एक बहुत अहम हिस्सा होती हैं।

अगर आपको है किडनी की समस्या है, तो भूलकर भी न करें ये गलती

अगर आपके किडनी या गुर्दे काम करना बंद कर देते तो आपका शरीर बेकार हो जाता है । क्योंकि किडनी हमारे शरीर में सफाई का काम करती हैं। यह गंदगी बाहर निकालने वाले सिस्टम का एक बहुत अहम हिस्सा होती हैं।

हमारी दोनों किडनियों में छोटे-छोटे लाखों फिल्टर होते हैं जिन्हें नेफरोंस कहते हैं। नेरोफेंस हमारे खून को साफ करने का काम करते हैं। किडनी में होने वाले इस सफाई सिस्टम के कारण हमारे शरीर से हानिकारक तत्व पेशाब के साथ बाहर निकल जाते हैं।

किडनी के अन्य कामों में लाल रक्त कण का बनना और फायदेमंद हार्मोंस रिलीज करना शामिल हैं। यही नही किडनियों के जरिए रिलीज हुए हार्मोंस हमारे शरीर के ब्लड प्रेशर को नियंत्रित होता है और हड्डियों के लिए बेहद जरूरी विटामिन डी को भी बनाता है।

किडनी खराब होने के कारण :

किडनी खराब पर दो प्रकार से होती है

1.एक्यूट किडनी - इसमें आपकी किडनी अस्थायी रूप से बंद हो जाती है। ये रोग आमतौर पर पूरी तरह ठीक हो जाता है और इसमें डायलसिस और किडनी प्रत्योरोपण की जरूरत नहीं पड़ती है। एक्यूट किडनी खराब होने का सबसे सामान्य कारण डायरिया होता है। डायरिया के कारण शरीर से पानी निकल जाने की वजह से किडनी को नुकसान होता है। इसके अलवा एक्यूट किडनी खराब होने के कारणों में दवाएं (खासतौर पर पेन किलर व एंटिबायॉटिक्स) भी शामिल2. हैं।

2.क्रोनिक किडनी - इस रोग में आपकी किडनियां पूरी तरह खराब हो जाती हैं और इसके इलाज के दो ही विकल्प होते हैं। पहला, आप किडनी प्रत्यारोपण कराएं, या फिर सारी उम्र डायलसिस पर रहें। डायबटिज और हाई ब्लडप्रशेर क्रोनिक किडनी डिजीज के मुख्य हैं।

किडनी खराब होने के लक्षण :

1.हाथों और पैरों में सूजन उत्पन्न हो जाती है।

2.रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ जाता है। हड्डियों में दर्द होता है।

3.कमजोरी, जी मिचलाना और उल्टी महसूस होती है।

4.रोग के बढ़ जाने पर सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है।

5. नींद पूरी न होना महसूस होता है।

किडनी खराब होने के उपचार :

1.पर्याप्त तरल पदार्थ लें - स्वस्थ लोगों को रोजाना दो से चार लीटर तक पानी व तरल पदार्थ ग्रहण करने चाहिए। इसके विपरीत जो लोग किडनी के विकारों से ग्रस्त हैं, उन्हें पानी व अन्य तरल पदार्थों का सेवन किडनी रोग विशेषज्ञ (नेफ्रोलॉजिस्ट) के परामर्श से करना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन से किडनियों को शरीर से सोडियम, यूरिया और अन्य नुकसानदेह पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

2.प्रोटीन का सेवन कम करें- जब किडनी कमजोर हो जाती हैं, तब शरीर में यूरिया व अन्य नुकसानदेह तत्वों का स्तर बढ़ने लगता है। इस स्तर को कम करने के लिए प्रोटीन का सेवन कम कर देना चाहिए। प्रोटीन पनीर, दालों, फलियों, सोयाबीन और मांसाहारी खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।

3.नमक का सेवन कम करें - विभिन्न खाद्य व पेय पदार्थों के जरिये शरीर में रोजाना 5 ग्राम (एक छोटी चम्मच) तक नमक पहुंचना चाहिए। इससे ज्यादा नमक न लें। खाद्य पदार्र्थों में अलग से नमक नहीं डालें।

4.धूम्रपान से बचें - धूम्रपान किडनी में रक्त के प्रवाह को धीमा कर देता है। जब किडनी में कम रक्त पहुंचता है, तो ये सही ढंग से कार्य नहीं कर पाते। धूम्रपान किडनी के कैंसर के खतरे को भी 50 प्रतिशत तक बढ़ा देता है। अपने रक्त चाप को कम करने के लिए डॉक्टर के परामर्श से दवा का सेवन करें।

5.खुद को फिट रखें- अगर किडनी पूरी तरह से खराब हो गई हो, तब भी डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण की मदद से पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं। सप्ताह में कम से कम पांच बार जॉगिंग, साइकिल चलाना या तैराकी जैसे सामान्य तीव्रता वाले व्यायाम करें। योग विशेषज्ञ के परामर्श से योगासन-प्राणायाम करें।

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