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Karwa Chuath 2018: प्रेम-समर्पण का पर्व करवा चौथ, जानें इसका प्राचीन महत्व

दिन भर का निर्जल व्रत, सोलह श्रृंगार किए हाथों में पूजा का थाल लिए चांद का इंतजार करती विवाहित महिलाएं, करवा चौथ की रात का यह दृश्य महज परंपरा या पर्व नहीं दांपत्य जीवन के प्रति समपर्ण को भी दर्शाता है। यही नहीं पति-पत्नी के आपसी प्रेम को प्रगाढ़ता देने वाले इस पर्व से पूरे परिवार की खुशियों में भी नए रंग भर जाते हैं।

Karwa Chuath 2018: प्रेम-समर्पण का पर्व करवा चौथ, जानें इसका प्राचीन महत्व
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दिन भर का निर्जल व्रत, सोलह श्रृंगार किए हाथों में पूजा का थाल लिए चांद का इंतजार करती विवाहित महिलाएं, करवा चौथ की रात का यह दृश्य महज परंपरा या पर्व नहीं दांपत्य जीवन के प्रति समपर्ण को भी दर्शाता है। यही नहीं पति-पत्नी के आपसी प्रेम को प्रगाढ़ता देने वाले इस पर्व से पूरे परिवार की खुशियों में भी नए रंग भर जाते हैं।

व्रत-उपवास हमारी परंपराओं का प्रमुख हिस्सा हैं, जो जीवन को ऊर्जावान बनाने, मनोकामनाओं को फलीभूत करने के साथ रिश्तों में भी मधुरता घोलते हैं। इस तरह व्रत-उपवास किसी दैवीय शक्ति से हमारी पवित्र प्रार्थनाओं का एक रूप है।

प्राचीन काल से ही स्त्रियां अपनी संतान और पति के जीवन की मंगलकामना के लिए कई तरह के व्रत रखती आई हैं। इन्हीं में से एक है पति की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला व्रत-करवा चौथ। इसे सुहागिनों का महापर्व माना जाता है।

करवा यानी जल पात्र द्वारा कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण करने का विधान। इसमें चंद्रमा के उदय होने तक निर्जल उपवास रखकर महिलाएं पुण्य संचय कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

दरअसल, हमारे समाज में जितने भी पर्व मनाए जाते हैं, इन सबके पीछे कोई न कोई उदात्त भावना छुपी होती है। यही भावना व्यक्ति को व्रत एवं तप करने का संबल प्रदान करती है। छठ और तीज जैसे कठिन व्रत भी स्त्रियां इसी भावना से वशीभूत होकर करती हैं। इसी कड़ी में करवा चौथ को भी शामिल किया जा सकता है।

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प्रेम-स्नेह की प्रबल होती है भावना

करवा चौथ जैसे व्रत के पीछे मूल उद्देश्य यही है कि पति-पत्नी के बीच प्रेम-स्नेह की भावना प्रबल हो। दांपत्य-जीवन में कई बार कुछ नोक-झोंक हो जाया करती है। परिवार में थोड़ी बहुत अनबन आम बात है।

लेकिन पति की लंबी आयु के लिए रखे जाने वाला व्रत-उपवास यह दर्शाता है कि पत्नी अपने पति के प्रति अपार स्नेह-भाव रखती है। उसके लिए छोटी-मोटी खटपट-बहस कोई मायने नहीं रखती। इस तरह करवा चौथ एक-दूसरे के प्रति भरपूर प्यार जताने का अवसर प्रदान करता है।

यह पर्व एक-दूसरे के प्रति समर्पण का प्रतीक है, जो दांपत्य जीवन में विश्वास-भरोसे को मजबूत करता है। महिलाएं अपनी समस्त घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए, कुछ तो ऑफिस जाकर भी, निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को घर लौटकर पूरे विधि-विधान से करवा चौथ की पूजा करती हैं।

करवा चौथ का मूक संदेश

करवा चौथ का व्रत पत्नी द्वारा पति को दिया गया एक मूक संदेश है, जिसमें अपने जीवनसाथी के प्रति प्यार, विश्वास, सहयोग, समर्पण की भावना का आजीवन पालन और मुश्किल समय में साथ निभाने का वचन शामिल है।

इस संदेश के मूक होने में ही इसका सौंदर्य और महत्व निहित है, क्योंकि अवचेतन मन की बातें अदृश्य और मौन होकर जितने प्रभावी तरीके से संप्रेषित हो सकती हैं, उतनी बोलकर नहीं। यह मन से मन की बात है, जिसे मौन होकर, बिना कहे समझा देने में ही आपकी जीत है।

दांपत्य प्रेम तले पूरे परिवार की खुशहाली

किसी भी अच्छे काम का प्रभाव सिर्फ एक व्यक्ति या स्थान पर नहीं पड़ता, बल्कि उसका प्रभाव दूर तक अपना असर छोड़ता है। करवा चौथ जैसे व्रत से न सिर्फ पति-पत्नी के बीच प्रेम- भाव बढ़ता है, इससे पूरे परिवार मे प्रेम का वातावरण भी निर्मित होता है। परिणाम स्वरूप इससे पूरे परिवार में खुशहाली आती है।

पति-पत्नी के मधुर संबंधों का सकारात्मक प्रभाव बच्चों और बुजुर्ग मां-बाप पर भी पड़ता है। पति-पत्नी के बीच मन में सुख-संतोष की भावना रहने पर परिवार के अन्य सदस्यों से भी आत्मीयता हो जाती है। सिर्फ इतना ही नहीं, नए विचारों के प्रवेश से हर किसी को आगे बढ़ने, कुछ कर दिखाने का मौका मिलता है।

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जीवनसाथी भी नहीं रहते पीछे

करवा चौथ व्रत के दिन महिलाएं अपने जीवन साथी के प्रति प्रेम की भावना से भरी होती हैं, जो उनके कृत्यों में सहज रूप से परिलक्षित होता है। लेकिन इस मामले में पुरुष भी पीछे नहीं। पुरुषों में भी इस दिन अपनी पत्नी के लिए अलग ही लगाव,अपनापन झलकता है।

उनके मन-मंदिर में स्नेह के तार झंकृत होते हैं, वे भी अपने प्रेम का चटख रंग अपनी जीवन संगिनी के ऊपर उड़ेल देना चाहते हैं। कोई-कोई पुरुष तो पूरे दिन व्रत रहकर अपनी पत्नी के कठिन तप में बराबर की भागीदारी निभाते हैं। इस तरह दोनों पक्षों का स्नेह-भाव, उनके रिश्ते में ताजगी भरता है।

सौंदर्य और संपूर्णता

करवा चौथ पर्व का नाम लेते ही हमारे मन में सोलह श्रंगार किए एक स्त्री की छवि उभर कर सामने आ जाती है। असल में स्त्रियों द्वारा श्रंगार किया जाना सौंदर्य का प्रतीक है। यह श्रृंगार सिर्फ देह को सुंदर बनाने के लिए नहीं है, जीवन में भी सौंदर्य की लालसा लिए है, जो जीवन को एक संपूर्णता प्रदान करता।

जीवन में ऐसी संपूर्णता दांपत्य जीवन की मिठास और उससे मिलने वाली मानसिक संतुष्टि से आती है, यही भारतीय संस्कृति में परिवार नामक संस्था को जीवित रखने का आधार भी है।

पति के लिए व्रत की प्राचीन परंपरा

हमारी संस्कृति में पति की दीर्घायु के लिए व्रत किए जाने की परंपरा शायद उतनी ही पुरानी है, जितनी दांपत्य संबंधों की शुरुआत। इनमें से प्रमुख है ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत, सावन या भादों के महीने में पड़ने वाली तीज, सावन में ही पड़ने वाला मंगला गौरी व्रत। सभी व्रतों का विधि-विधान भले ही अलग हों लेकिन सबके पीछे का उद्देश्य एक ही है, पति के लिए मंगलकामना।

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