Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

सावधान! शरीर के इन बदलावों के कारण होता है अनियमित पीरियड्स

इररेग्युलर पीरियड्स, महिलाओं में होने वाली एक कॉमन प्रॉब्लम है। इससे ग्रस्त महिलाओं को कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं। ऐसे में इसके कारण, लक्षण को जानकर उपचार कराना जरूरी है।

सावधान! शरीर के इन बदलावों के कारण होता है अनियमित पीरियड्स
X

इररेग्युलर पीरियड्स, महिलाओं में होने वाली एक कॉमन प्रॉब्लम है। इससे ग्रस्त महिलाओं को कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं। ऐसे में इसके कारण, लक्षण को जानकर उपचार कराना जरूरी है।

समय से इलाज कराकर पीरियड्स को रेग्युलर किया जा सकता है। इस बारे में श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. रेनू गुप्ता पूरी जानकारी दे रही हैं।

आमतौर पर महिलाओं में मासिक धर्म (पीरियड्स) 14 से 48-50 साल की उम्र के बीच होता है। यह चक्र महीने में एक बार होता है और तीन से पांच दिन तक रहता है।

लेकिन मौजूदा समय में अनियमित जीवनशैली की वजह से बहुत सी महिलाएं इससे जुड़ी समस्याओं से ग्रसित हो रही हैं। कई किशोरियों में जल्दी या फिर देर से मासिक धर्म होने की समस्या भी देखी जा रही है। इसे ओलिगोमेनोरिया कहा जाता है।

इसके अलावा युवा और मध्यम आयु वर्ग की महिलाएं भी अनियमित मासिक धर्म की समस्या से बड़ी संख्या में ग्रस्त हैं। मासिक धर्म से जुड़ी किसी भी समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए, वरना बाद में इसके परिणाम बड़ी स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आ सकते हैं।

कारण

एक स्वस्थ महिला के पीरियड्स की अवधि 21 से 35 दिन के बीच होती है। 20 से 40 वर्ष की उम्र के बीच महिलाएं अगर इररेग्युलर पीरियड्स का शिकार हो रही हैं, तो इसके पीछे अनियमित हार्मोनल असंतुलन, जीवनशैली में परिवर्तन और दवाइयों का प्रभाव जैसे कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

इसे सपोर्टिव ट्रीटमेंट या सही जीवनशैली की मदद से ठीक किया जा सकता है। जबकि 40 साल की आयु सीमा पार कर चुकी महिलाओं में इररेग्युलर पीरियड्स की प्रॉब्लम प्रीमेनोपॉज की वजह से होती है। इसके अलावा असंतुलित खान-पान यानी समय पर भोजन न करने और पौष्टिक आहार न लेने के कारण, महिलाओं का वजन अचानक कम या अधिक होने लगता है, इस वजह से भी अनियमित मासिक धर्म से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है।

अधिक तनाव की वजह से भी मासिक धर्म प्रभावित होता है। दरअसल, तनाव का सीधा असर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोंस पर पड़ता है। इन हार्मोंस के प्रभावित होने से मासिक धर्म में अनियमितता बढ़ जाती है। महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन नाम के तीन हार्मोन मौजूद होते हैं।

इन हार्मोंस में संतुलन बिगड़ने पर पीरियड्स में परेशानी शुरू होने लगती है। इसके अतिरिक्त महीने या फिर इससे ज्यादा समय तक लगातार बीमार रहने या फिर थाइरॉयड डिसआॅर्डर की वजह से भी महिलाओं में मासिक धर्म में बदलाव होने की आशंका बढ़ जाती है।

लक्षण

  • मासिक धर्म में अनियमितता बढ़ने के कारण महिलाओं के यूटेरस में दर्द होता है।
  • भूख कम लगती है।
  • इसके अलावा स्तन, पेट, हाथ-पैर और कमर में दर्द होने लगता है।
  • अधिक थकान महसूस होती है।
  • कब्ज या दस्त की समस्या शुरू हो जाती है।
  • यूटेरस में ब्लड क्लॉट्स का बनना भी मासिक धर्म की अनियमितता का लक्षण है।

इलाज

डॉक्टर के निर्देशानुसार हार्मोन थेरेपी और जीवनशैली में जरूरी सुधार करके अनियमित मासिक धर्म की समस्या से निजात मिल सकती है।

आयुर्वेद में इलाज

आयुर्वेद के अनुसार महिलाएं अपने खान-पान और जीवनशैली में कुछ बदलाव करके अनियमित माहवारी की समस्या से उबर सकती हैं। आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रताप चौहान ने इस बारे में जानकारी देते हुए कुछ सुझाव दिए हैं।

  • मसालेदार, खट्टे या भारी भोजन के सेवन से बचें।
  • चाय, कॉफी और ठंडे पेय के सेवन से बचें।
  • घरेलू उपचार के तौर पर एक कप पानी में 1 चम्मच धनिया के बीज और दालचीनी पावडर उबालें।
  • आधा कप पानी रह जाने पर इसमें आधा चम्मच पावडर रॉक कैंडी (या अनरिफाइंड चीनी) मिला लें।
  • इस पानी को दिन में दो बार पिएं। इससे भी मासिक धर्म नियमित होने लगेगा।
  • किसी भी तरह के शारीरिक और मानसिक तनाव से दूर रहें।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story