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स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, जानिए कैसे संभव है आईएलडी ट्रीटमेंट

ट्रीटमेंट

आईएलडी या लंग फाइब्रोसिस के कई घातक परिणाम सामने आ सकते हैं। इससे फेफड़ों में उच्च रक्तचाप, हार्ट और श्वसन प्रणाली के फेल हो जाने की भी संभावना रहती है। इस प्रकार के रोगियों में व्हारटन जेली से प्राप्त मीसेनकायमल स्टेम सेल्स और अंबलाइक्रल कॉर्ड ब्लड से प्राप्त सेल्स को एक निश्चित मात्रा में प्रवाहित किया जाता है, जिससे टिश्यू में लचीलेपन के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी कंट्रोल किया जा सके। सूखी खांसी से पीड़ित मरीज पर दवाओं का असर न होने पर उसे कॉर्टिसोन (एक प्रकार का स्टेरॉयड) दिया जाता है, लेकिन इसका शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसलिए बाद में ऐसे मरीजों में स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन किया जाता है। स्थिति गंभीर होने पर स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सर्जन से सलाह लेनी चाहिए।

(मेट्रो हॉस्पिटल, नोएडा के डॉ. पुरुषोत्तम लाल से बातचीत पर आधारित)

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