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मानसिक बीमारियों के लिए रोज करें ये योगासन, परेशानी होगी छूमंतर

आज की आपा-धापी भरी जिंदगी से भौतिक सुख-सुविधाएं तो कुछ बढ़ी हैं लेकिन उसी अनुपात में हमारा चैन और सुकून भी छिन रहा है। ध्यान और प्राणायाम के अलावा भी कुछ आसन आप कर सकते हैं। इनसे भी आप मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करेंगे। जानिए कुछ कारगर योगासनों के बारे में।

मानसिक बीमारियों के लिए रोज करें ये योगासन, परेशानी होगी छूमंतर

21 जून को देश और दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2018 मनाया जाएगा। इन दिनों बढ़ते तनाव की वजह से देश में ही नहीं पूरे संसार में मानसिक रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनके इलाज के लिए रोगी तरह-तरह की दवाइयां खाते हैं, जबकि इनसे बचाव के लिए आपको ना तो दवाइयां खाने की जरूरत है और ना ही महंगे ईलाज की। अगर आप नियमित तौर पर ध्यान, प्राणायाम और कुछ योगासनों को अपनी जीवनशैली में शामिल कर लें तो मानसिक रोगों से बचे रह सकते हैं।

आज की आपा-धापी भरी जिंदगी से भौतिक सुख-सुविधाएं तो कुछ बढ़ी हैं लेकिन उसी अनुपात में हमारा चैन और सुकून भी छिन रहा है। अत्यधिक तनाव अंतत: ऐसी स्थिति में ले जाता है, जहां व्यक्ति के भीतर आत्महत्या तक के विचार आ सकते हैं।

सामान्य उपचार विधियां केवल उन्हीं रोगों का उपचार करने में ज्यादा कारगर साबित होती हैं, जो बाहरी कारणों से और भौतिक शरीर से जुड़ी होती हैं। लेकिन मन से उपजी बीमारियों का प्राय: किसी भी पैथी में कोई स्थायी इलाज नहीं है क्योंकि इसका संबंध हमारी वृत्तियों से होता है।

बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए इस समस्या के भविष्य में और गंभीर होने के आसार हैं। चिंताजनक बात यह भी है देश में मनोचिकित्सकों की संख्या काफी कम है। ऐसे में यह जरूरी है कि मानसिक विकारों का शिकार होने से बचने के प्रति निरंतर सचेत रहा जाए। मन को स्वस्थ रखने का सर्वोत्तम तरीका है-ध्यान।

अनुलोम-विलोम भी दिमाग की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचाने में काफी कारगर है। ध्यान और प्राणायाम के अलावा भी कुछ आसन आप कर सकते हैं। इनसे भी आप मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करेंगे। जानिए कुछ कारगर योगासनों के बारे में।

धनुरासन

विधि: सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं और हाथ पीछे करते हुए पैरों को पकड़ें। सांस भरते हुए सीने और पैरों को ऊपर उठाएं और हाथों को सीधा रखते हुए कूल्हों को ऊपर उठाकर, पैरों को पीछे की ओर खींचें। सिर और जांघों को जमीन से यथाशक्ति ऊपर उठाएं। लंबी सांसों के संग लगभग 20 सेकेंड तक करें। सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं। यही प्रक्रिया तीन से पांच बार दुहराएं।

लाभ: धनुरासन करने से दिमागी खराबी में तो लाभ होता ही है, मानसिक रोगों से बचना भी संभव होता है। मन की चंचलता दूर होती है। यह आसन उत्तेजना से दूर रखता है, जिससे कई मानसिक रोगों से बचाव होता है। मस्तिष्क का संतुलन बना रहता है। सिरदर्द या माइग्रेन के रोगी और गर्भवती महिलाएं यह आसन न करें।

मत्स्यासन

विधि: इसे करने के लिए सीधे बैठकर पद्मासन लगाएं। दोनों हाथ नितंबों के नीचे रखें। अब पीछे की ओर झुककर लेट जाएं। गर्दन को मोड़कर माथा जमीन से लगाएं ताकि पीठ थोड़ा ऊपर उठ जाए। अब पैरों के अंगूठों को पकड़ें और कुछ देर रुकेें। कुछ पल बाद गर्दन सीधी कर हाथों को फिर से नितंबों के नीचे रखें। गर्दन और धड़ को ऊपर उठाकर गर्दन को बार्इं-दार्इं ओर 3-3 बार क्लॉक और एंटी-क्लॉकवाइज घुमाएं। अंत में पद्मासन खोलकर विश्राम करें।

लाभ: मत्स्यासन के नियमित अभ्यास से श्वांस नलिका की ऊष्णता बढ़ती है और म्यूकस बाहर निकल जाता है तथा सांस लेना सहज हो जाता है। इससे तंत्रिका तंत्र को नई ऊर्जा मिलती है। शरीर से टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं, तनाव कम होता है और दिमाग तरोताजा महसूस करता है।

सुखासन

विधि: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख

करके सिर, गर्दन और रीढ़ को एक सीध में रखकर बैठें। सहज रूप से पालथी बनाएं और दोनों हाथों को पैरों पर रखें। अंगुलियां खुली रहें और कंधे ढीले। सिर हल्का सा ऊपर उठा हुआ हो। आंखें बंद रखें। धीमी, लंबी और गहरी सांस लें। पांच से 10 मिनट तक करें। घुटनों के दर्द या सायटिका के रोगी इसे न करें।

लाभ: सुखासन करने से मन एकदम शांत हो जाता है और चित्त की एकाग्रता बढ़ती है। पैर मुड़े होने के कारण घुटने से ऊपर का रक्त-प्रवाह तेज होता है और मस्तिष्क को ऊर्जा मिलती है। यह आसन आध्यात्मिक लाभ देता है। स्मरण-शक्ति और सकारात्मक सोच बढ़ती है।

शवासन

विधि: शवासन करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेटें। हाथ शरीर के अगल-बगल कमर से थोड़ा हटाकर रखें। हथेलियों की दिशा ऊपर की ओर रहे। शरीर को ढीला छोड़ दें और आंखें बंद कर हल्की सांसें लें और आती-जाती श्वांसों को महसूस करें। शरीर के प्रत्येक अंग को बंद आंखों से देखने का प्रयास करें। आराम के लिए घुटनों के नीचे पतला तकिया या गद्दा रख सकते हैं।

लाभ: शवासन करने से पूरे शरीर को आराम मिलने के कारण मानसिक तनाव और सिरदर्द दूर होता है, थकान मिटती है, काम करने के लिए ऊर्जा मिलती है और अच्छी नींद आती है। यह आसन हताशा-निराशा से निकालकर आपमें सकारात्मक भाव भरता है। स्मरण शक्ति बढ़ती है और नई चेतना का संचार होता है।

बालासन

विधि: बालासन करने के लिए पहले वज्रासन में बैठकर सांस भरते हुए हाथों को ऊपर ले जाएं। कुछ सेकेंड बाद, सांस छोड़ते हुए कूल्हे से इतना झुक जाएं कि हथेलियां जमीन को स्पर्श करने लगें। जिनके कंधों में दर्द हो वे हाथ पीछे भी रख सकते हैं। माथा जमीन से लग जाने दें। कुछ देर बाद, दोनों हाथों की अंगुलियों को फंसाकर उस पर सिर रखें। सांस को नाभि तक जाने दें।

लाभ: जन्म से पहले शिशु गर्भ में जिस अवस्था में रहता है, वही बालासन की अवस्था होती है। बच्चा गर्भ में आराम की मुद्रा में होता है, इसलिए यह आसन मन की पीड़ा को हरने और बहुत आराम देने वाला माना गया है। यदि यह आसन शीर्षासन के बाद किया जाए तो लाभ और बढ़ जाता है।

(लेखक भारतीय योग एवं प्रबंधन संस्थान, दिल्ली से संबद्ध हैं)

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