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लड़का हो या लड़की, आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देंगे ये योगासन

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून, 2018 को पूरी दुनिया में मनाया जाएगा। योग दिवस के लिए भारत के साथ-साथ दूसरे देशों में भी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। योग हर तरह से फायदेमंद होता है। योग सिर्फ शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के लिए ही लाभकारी नहीं है। नियमित योगाभ्यास से कांतिमय त्वचा, मजबूत और घने बाल पाए जा सकते हैं।

लड़का हो या लड़की, आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देंगे ये योगासन

International Yoga Day 2018

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून, 2018 को पूरी दुनिया में मनाया जाएगा। योग दिवस के लिए भारत के साथ-साथ दूसरे देशों में भी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। योग हर तरह से फायदेमंद होता है। योग सिर्फ शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के लिए ही लाभकारी नहीं है। नियमित योगाभ्यास से कांतिमय त्वचा, मजबूत और घने बाल पाए जा सकते हैं।

अधिकतर महिलाएं और युवतियां अपनी सुंदरता को बढ़ाने के लिए कई तरह के सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करती हैं। इसके बावजूद मनचाहा परिणाम नहीं मिलता है।

कई बार तो सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल से त्वचा को नुकसान भी पहुंचता है। जबकि नियमित योगाभ्यास सौंदर्य के लिए बहुत ही कारगर साबित होते हैं और इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।

पद्मासन

  • इस आसन से चेहरे की कांति बढ़ती है। पद्मासन के लिए सबसे पहले सुखासन में बैठें।
  • बाएं पैर के पंजे को दाहिनी जांघ पर और दाहिने पैर के पंजे को बाईं जांघ पर रखें।
  • घुटने को जमीन से सटाएं। रीढ़ सीधी रखें।
  • अब बाएं हाथ के तलवे के नाभि के जरा सा ऊपर और दाहिने हाथ को बाएं हाथ के पंजे के ऊपर रखें।
  • श्वांस को सहज रखें। जितनी देर सहज हो यह आसन करें।

पादहस्तासन/हस्तपादासन

  • इस आसन को नियमित करने से बालों का झड़ना बंद होता है।
  • विपरीत करणी से भी यह लाभ मिलता है। इसके लिए खड़े होकर दोनों पैरों को पास-पास रखें।
  • अब आगे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों के पंजों को पैरों के अगल-बगल जमीन पर टिका दें।
  • घुटनों को बिल्कुल सीधा रखते हुए सिर को घुटने से सटाएं। यह सूर्य नमस्कार की तीसरी मुद्रा है।
  • अंतिम अवस्था में ध्यान स्वाधिष्ठान चक्र पर यानी नाभि के थोड़ा नीचे केंद्रित करें। इससे आपको लाभ मिलेगा।

त्रिकोणासन

इस आसन को करने से पेट के निचले हिस्से में जमा चर्बी कम होती है। इसे करते समय खड़े होकर दोनों पैरों के बीच 3 फीट की दूरी बनाएं। दोनों हाथों को कंधों के समानांतर फैलाएं।

अब सांस छोड़ते हुए दाहिने हाथ से बाएं पैर के पंजे को छुएं। इस दौरान बायां हाथ 90 डिग्री पर बिल्कुल ऊपर की तरफ हो। लगभग 5 सेकेंड बाद पुरानी स्थिति में लौट आएं। यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से दोहराएं।

इंद्र मुद्रा

शरीर का 72 प्रतिशत हिस्सा जल से बना होता है। इसके बावजूद हम जल की कमी से होने वाले रोगों का शिकार हो जाते हैं। इंद्र मुद्रा इसका सहज समाधान है।

यह मुद्रा शरीर में जल तत्व का संतुलन बनाए रखती है। इसके अभ्यास से त्वचा कोमल, मुलायम और स्निग्ध रहती है। चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़तीं, व्यक्ति लंबे समय तक युवा दिखाई देता है।

इसे करने के लिए अंगूठे के ऊपरी हिस्से को कनिष्ठा के शीर्ष से मिलाएं। शेष अंगुलियां एकदम सीधी रहें। इसे रोजाना 15-15 मिनट के लिए तीन बार करें।

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