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महिला दिवस पर भाषण : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए भाषण

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस यानि 8 मार्च को मनाया जाएगा। ये साल का एक ऐसा दिन है। जब पूरी दुनिया महिलाओं को उनके कार्यों और उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित करती है। ऐसे में अक्सर लोग कार्यक्रमों में महिला दिवस पर भाषण (Women Day Speech) देते हैं। अगर आप भी इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भाषण (International Women Day Speech) देने वाले हैं, तो आज हम आपके लिए ''वर्तमान में महिलाओं की चुनौतियां'' (''Presently Challenges of Women'') शीर्षक वाला एक भाषण लेकर आएं हैं।

महिला दिवस पर भाषण : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए भाषण
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Women's Day Speech : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस यानि 8 मार्च को मनाया जाएगा। ये साल का एक ऐसा दिन है। जब पूरी दुनिया महिलाओं को उनके कार्यों और उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित करती है। ऐसे में अक्सर लोग कार्यक्रमों में महिला दिवस पर भाषण (Women Day Speech) देते हैं। अगर आप भी इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भाषण (International Women Day Speech) देने वाले हैं, तो आज हम आपके लिए 'वर्तमान में महिलाओं की चुनौतियां' ('Presently Challenges of Women') शीर्षक वाला एक भाषण लेकर आएं हैं।

वैसे तो महिलाएं जीवन के हर क्षेत्र में पुरूषों से कंधें से कंधा मिलाकर चल ही नहीं रही हैं बल्कि धीरे-धीरे उनसे आगे निकल रही हैं। लेकिन फिर भी अब कई ऐसी चुनौतियां हैं, जो उनके कदमों को रोकने का काम कर रहीं हैं। जो किसी एक देश के लिए ही नहीं, दुनिया के कई सारे देशों में चिंता का विषय बनी हुई है। वैसे तो हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी काबिलियत, हुनर और मजबूत इच्छाशक्ति से उस हर चुनौती को चकनाचूर कर दिया है। जो उनकी तरक्की में बाधा पहुंचाने का काम करती है। लेकिन अब भी कई चुनौतियां ऐसी है, जिनसे वो आज भी जूझ रही है। चलिए अब आपको बताते हैं महिलाओं की राह में वर्तमान की चुनौतियों के बारे में...

महिला दिवस पर भाषण : वर्तमान में महिलाओं की राह की चुनौतियां

1. सेहत

कैंसर, मोटापा, डायबिटीज, किडनी रोग, हार्ट डिजीज, एनीमिया, आयरन की कमी होना जैसे रोग देश, दुनिया के कई सारे देशों के साथ ही विश्व हेल्थ
आर्गेनाइजेशन (WHO) में चिंता का विषय बन हुआ है। यही नहीं, बच्चों के जन्म के साथ मृत्यु होना महिलाओं की गिरती सेहत। महिलाओं को आगे
बढ़ने और उनकी उन्नति करने से रोक रही है। लेकिन अगर साफ-सफाई (हायजीन) का ख्याल रखा जाए, संतुलित खान-पान, व्यायाम वाली एक हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाया जाए और समय रहते बीमारियों का पता लगाया जाए, तो इन परेशानियों से मुक्ति पाई जा सकती है।

2.शिक्षा

आजादी के 70 साल बाद भी देश में एक बड़ी संख्या में लड़कियां और बच्चियां अपनी शिक्षा को पूरा नहीं कर पाती हैं और गरीबी या पारिवारिक समस्या की वजह से छोटी उम्र में ही स्कूल छोड़ने को मजबूर होती है। अशिक्षित होने की वजह अधिकांश महिलाएं अपने जीवन स्तर में सुधार करने में खुद को असमर्थ महसूस करती हैं। वैसे तो सरकारों ने महिला शिक्षा और छोटी बच्चियों की पढ़ाई पूरी करवाने के लिए कई सारी योजनाओं को शुरू किया है। लेकिन फिर भी अभी भी ये प्रयास ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही प्रतीत होते हैं।

3. भेदभाव या समान अवसर न मिलना (लैंगिक असमानता)

वैसे तो हमारे संविधान में पुरूषों और महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं, लेकिन आज भी जीवन के हर क्षेत्र में लड़कियों और महिलाओं को घर से लेकर कार्यक्षेत्र में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। जहां घर में लड़कियों की तुलना हमेशा भाईयों से की जाती है, तो वहीं कार्यक्षेत्र में कई बार महिला कर्मचारी के टेलेंटड होने के बाद भी पुरूषों की पदोन्नति होना, भेदभाव और लैंगिक असमानता को दर्शाता है।

4. बढ़ते अपराध

आज के दौर में महिलाएं ही नहीं छोटी-छोटी बच्चियां भी रेप, हत्या, किडनैपिंग और तस्करी जैसे गंभीर अपराध का शिकार हो रही हैं। तो वहीं महिलाओं के खिलाफ एसिड अटैक, गैंगरेप, घरेलू हिंसा जैसे मामलों ने महिलाओं के लिए देश को एक असुरक्षित स्थान बना दिया है। लेकिन अगर पुरूष और समाज महिलाओं के प्रति अपनी मानसिकता में बदलाव लाएं और कानूनों का सख्ती से पालन किया जाए, तो देश में बढ़ते अपराधों पर रोक लगाई जा सकती है।आपको बता दें हमारे देश में लक्ष्मी जैसी कई ऐसी अदम्य साहस वाली महिलाएं हैं, जो एसिड अटैक को झेलने के बाद भी एक आम जिंदगी जीना पसंद करती हैं और अन्य के लिए एक रोल मॉडल बनी हैं।

5. रूढ़िवादी सोच

आजादी के 70 साल बाद भी देश के कई हिस्सों में आज भी महिलाओं के लिए रूढ़िवादी सोच कायम है। वैसे तो महिलाओं ने पुरूषों से संबंधी खेलों
(कुश्ती,बॉक्सिंग,वेट लिफ्टिंग,कबड्डी,क्रिकेट) कार्यक्षेत्र (फाइटर पायलट, रेल, ऑटो, कैब ड्राईवर) में अपने कदम रखें और सफलता भी पाई है, लेकिन फिर भी आज भी महिलाओं को इन कार्यों को करने से पहले परिवार और समाज की नाराजगी का सामना करना पड़ता है।

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