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International Tiger Day : अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस की शुरुआत कब और क्यों हुई, जानें भारत के किस जंगल में है कितने शेर

International Tiger Day हर साल 29 जुलाई (29 July) को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) मनाया जाता है, अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर दुनिया के लोगों में बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए जागरुकता किया जाता है, ऐसे में आज हम आपको इंटरनेशनल टाइगर डे (International Tiger Day) की शुरुआत और उसको मनाने की वजह के बारे में बता रहे हैं।

International Tiger Day : अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस की शुरुआत कब और क्यों हुई, जानें भारत के किस जंगल में है कितने शेर
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International Tiger Day इंटरनेशनल टाइगर डे हर साल की तरह 29 जुलाई को भारत समेत पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। साल 2019में पांचवा इंटरनेशनल टाइगर डे मनाया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस को ग्लोबल टाइगर डे के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन दुनिया में बाघ संरक्षण और उसकी संख्या में वृद्धि के लिए जागरुकता अभियान चलाए जाते हैं। भारत में भी 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) नाम से एक अभियान की शुरुआत की गई थी। ऐसे में आज हम आपको बड़ी बिल्ली के नाम से पुकारे जाने वाले टाइगर यानि बाघ और टाइगर डे से जुड़ी जानकारी लेकर आएं हैं...




International Tiger Day History / अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का इतिहास

साल 2010 में रुस के शहर सेंट पीट्सबर्ग में सबसे पहले 29 जुलाई को बाघ संरक्षण के लिए शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था। जिसमें बाघों की घटती जनसंख्या के कारणों और उनके संरक्षण के तरीकों पर चर्चा के साथ लोगों में जागरुकता बढ़ाने की पहल की गई थी। एक सदी से भी कम समय में जहां दुनिया में बाघों की संख्या 1 लाख के करीब थी। वहीं आज कुल 3000 रह गई है।

ऐसे में चार प्राथमिक मुद्दों यानि पर अवैध शिकार, आवास विनाश, मानव-पशु संघर्ष और बाघों की प्रजातियों को बचाने में तकनीक का सहारा लेना। इसके अलावा इस सम्मेलन में साल 2022 तक जंगली बाघों की संख्या को दुगुना करने का लक्ष्य रखा गया था। ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम की शुरुआत की गई। जिसके तहत बाघों में चिप या इसी तरह के अन्य उपकरणों का उपयोग करके उनकी स्थिति पर नजर रखना आसान हो सके।

International Tiger Day Importance / अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का महत्व :

हर साल अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस दुनिया में बाघों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास को बचाने, मानव-बाघ संघर्ष को कम करने और शिकार को रोकने की कोशिशों के बारे में जागरुकता फैलान के रुप में मनाया जाता है।




Various Species of Tigers / बाघ की विभिन्न प्रजातियां

टाइगर वर्ल्ड, जीववैज्ञानिकों के मुताबिक, दुनिया में अब सिर्फ बाघ की 6 तरह की उप प्रजातियां ही जीवित हैं, जो इस प्रकार हैं...

बंगाल टाइगर - बंगाल टाइगर भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है। जो घास के मैदानों और पानी से भरे स्थान पर रहना पसंद करता है। भारत के पश्चिम बंगाल के सुंदर बन को बंगाल टाइगर की जन्नत कहा जाता है।

2. साइबेरियन टाइगर - रुस के साइबेरिया यानि बर्फ से ढके स्थान पर पाया जाता है। साइबेरियन टाइगर अन्य टाइगर्स की तुलना में बड़े आकार का होता है।

3. सुमात्रान टाइगर - ये सुमात्रा द्वीप पर पाया जाता है। ये बाघ की अन्य प्रजातियों के मुकाबले छोटे आकार का होता है। सुमात्रान टाइगर की संख्या बेहद कम है। जिसकी वजह से इसे जीववैज्ञानिकों ने प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ की रेड लिस्ट यानि विलुप्त होने वाली प्रजातियों में स्थान दिया है।

4. इंडोचाइनीज टाइगर - इंडो चाइनीज टाइगर, भारत, वियतनाम, चीन,कंबोडिया और थाईलैंड में पाया जाता है। इंडोचाइनीज टाइगर की संख्या एशिया में सबसे ज्यादा थी। बढ़ते शिकार और खाल व्यापार की वजह से बेहद तेजी से संख्या में गिरावट आई थी। लेकिन भारत समेत अन्य देशों के संरक्षण प्रयासों से स्थिति में सुधार आया है।

5. मलय टाइगर - ये सुमात्रा की तरह एक प्रायद्वीप पर ही निवास करता है। इसे आमतौर पर इंडोचाइनीज टाइगर की प्रजाति ही माना जाता था, लेकिन आंनुवाशिक कारण अलग होने की वजह से इसे एक अलग प्रजाति माना गया।

6.दक्षिण चीन टाइगर - चीन के दक्षिणी भाग में पाएं जाते हैं। ये आकार में सबसे ज्यादा छोटे होते हैं। दक्षिण चीन टाइगर एक विलुप्त प्रजाति में गिना जाता है। क्योंकि 25 सालों से उसके प्राकृतिक आवास में उसकी मौजूदगी का कोई संकेत नहीं मिला है।

7. विलुप्त टाइगर प्रजाति -1937 में बाली टाइगर, 1950 में कैस्पियन टाइगर के अलावा बींसवी सदी में कुल 3 बाघ की उप-प्रजातियां विलुप्त हो गईं हैं।

What is Tiger Project / क्या है टाइगर प्रोजेक्ट

भारत में बाघों की घटती संख्या को बढ़ाने के लिए 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) की शुरुआत की। इसमें देश के सभी टाइगर्स को एक यूनिक नंबर दिया गया। जिससे उनकी संख्या और उनकी गतिविधियों को मॉनिटर किया जा सके। इसके तहत बंगाल के टाइगर की आबादी बढ़ाने, उसके प्राकृतिक आवासों में सुनिश्चित करना और बीमारियों से बचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाए गए। जबकि शिकारियों से बचाने के लिए सरकार नें टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया।

साल 2015 में बाघ की जनगणना में बेहद चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आएं। जिसमें बाघों की संख्या 2,226 थी। जो 2018 में 2,967 पहुंच गई हैं। ये इजाफा 33 फीसदी बढ़ा हैं। 2010-11 में नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)के साथ मिलकर बाघों की राज्यों के अनुसार एक सूची का मूल्यांकन किया गया। जिसके मुताबिक, कर्नाटक में 1.58 वर्ष की आयु के बाघों की संख्या सबसे अधिक 408 बाघ है। अन्य राज्यों में मध्य प्रदेश (308), तमिलनाडु (229), महाराष्ट्र (190), असम (167), केरल (136) और उत्तर प्रदेश (117) उत्तराखंड (215) शामिल हैं।




Reason Low Number of Tigers / टाइगर्स की संख्या कम होने के कारण

1. भारत समेत दुनिया में तेजी से बाघों की घटती संख्या के लिए सबसे बड़ा कारण हैं। बाघ की खाल और उनकी हड्डियों के लिए किया जाने वाला शिकार। क्योंकि खाल का जहां उपयोग फैशन एस्सेरीज बनाने में किया जाता है, तो वहीं हड्डियों का प्रयोग दवाओं को बनाने में किया जाता है। पिछले सौ सालों से भी कम समय में दुनिया में बाघों की संख्या 1 लाख से घटकर सिर्फ 3000 रह गई है।

2. आधुनिकीकरण की तेज रफ्तार की वजह से भी बाघों की संख्या में गिरावट दर्ज हुई है। क्योंकि जंगलों की कटाई और प्राकृतिक आवास के संकुचन की वजह और बाघ का रिहाईशी इलाकों में आना बेहद सामान्य हो गया। जिसकी वजह से मानव-पशु संघर्ष की घटनाओं में भी इजाफा देखा गया है।

3.पेड़ों की तेजी से कटाई और बिगड़ते पर्यावरण संतुलन की वजह से भी बाघों की संख्या में गिरावट और उनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।धीरे-धीरे समुद्र के स्तर में वृद्धि होने से सुंदर बन के खत्म होने का खतरा बढ़ गया है। जिसका असर बंगाल टाइगर पर भी देखा जा सकता है।

4. बाघों के संरक्षण के बुनियादी ढांचे में कमी होना और बढ़ता सफारी टूरिज्म बाघों की घटती संख्या और विलुप्त होने के मुख्य कारणों में से एक है। इसके अलावा बाघों में बढ़ती बीमारियां भी उनके विलुप्ति में अहम भूमिका निभाती हैं, जिनमें फेलाइन प्यूलुकोपनिया, तपेदिक आदि शामिल हैं।

Tiger Reserve In India / भारत में टाइगर रिजर्वस





Methods of Tiger Conservation / बाघ संरक्षण के तरीके

1. बाघ संरक्षण के लिए नेशनल लेवल पर अभियान की शुरुआत करना। बाघ संरक्षण जागरुकता के लिए गांवों और शहरों में जागरुकता अभियानों को बड़े स्तर पर चलाना ।

2. बाघ संरक्षण के लिए केन्द्र सरकार और राज्यों सरकारों के अलावा आम लोगों को भागीदार बनाना।

3. बाघ संरक्षण के लिए जंगलों के पास औद्योगिकीकरण को पूरी तरह से रोक लगाना।

4. बाघ संरक्षण के लिए फंड इकट्ठा करना।

5. बाघ संरक्षण अभियान के बारे में रेडियों, टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों को जागरुक करना।

6. बाघ संरक्षण के लिए सरकारी-गैर सरकारी संगठनों का साथ काम करना।

7. इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बाघ संरक्षण से संबंधित कैंपेन चलाना।

8. बाघों के शिकार संबंधी कानून का सख्ती से पालन किया जाना।

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