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भारत में बढ़ रहा है मानसिक रोग, महिलाएं अपने जीवन से जुड़े निर्णय लेने में अक्षमः रिपोर्ट

भारत में मानसिक अवसाद तेजी बढ़ रहा है।

भारत में बढ़ रहा है मानसिक रोग, महिलाएं अपने जीवन से जुड़े निर्णय लेने में अक्षमः रिपोर्ट
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नई दिल्ली. भारतीय स्वास्थय मंत्रालय के मुताबिक देश की कुल जनसंख्या में 6-7 फीसदी लोग मानसिक बीमारियों से ग्रस्त हैं और इनमें से एक फीसदी गंभीर मानसिक बीमारियों के शिकार हैं। विश्व स्वास्थय संगठन की मुताबिक भारत में साढ़ें तीन लाख लोगों पर 3500 मनोचिकित्सक है। जबकि अमेरिका में 12837 लोगों के लिए एक मनोचिकित्सक है।

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इनमें से एक फीसदी गंभीर मानसिक बीमारियों के शिकार हैं। भारत में महिलाओं की स्थिति दिन पर दिन दयनीय होती जा रही हैं। हुमेन राइट वाच की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाएं मानसिक उत्पीड़न से गुजर हैं। महिलाएं अपने जीवन से जुड़े निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं।

विश्व स्वास्थय संगठन के मेंटल हेल्थ ऐटलस के मुताबिक भारत के लोक स्वास्थय प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य पर सरकार स्वास्थ्य बजट का 0.06% खर्च करती है। अमेरिका जीडीपी का 6.2% मानसिक स्वास्थय पर खर्च करता है। इंग्लैंड 10.82% मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च करता है। यहां तक कि बांग्लादेश भी भारत से अधिक 0.44% खर्च करता है।
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