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सिर्फ घंटों बैठकर पढ़ने से नहीं, ऐसे बढ़ेगा ''ब्रेन पॉवर''

रीजनिंग से संबंधित सवालों को 40 फीसदी लोग बगैर पेन और कागज के नहीं सुलझा पाते हैं।

सिर्फ घंटों बैठकर पढ़ने से नहीं, ऐसे बढ़ेगा
नई दिल्ली. आजकल छोटे-छोटे जोड़ घटाव के लिए हम केल्कुलेटर का इस्तेमाल करते हैं, जबकि पुरानी पीढ़ी के लोग उंगलियों पर चंद पलों में बड़ें-बड़े केल्कुलेशन हल कर लेते हैं। इसी विषय पर हाल ही में हुए एक शोध ने यह साबित करने का प्रयास किया है कि उंगलियों पर जोड़-घटाव करने से इसका असर सीधे दिमाग पर पड़ता है। और व्यक्ति का मानसिक विकास भी होता है।
उंगलियों के जरिए अभ्यास करने से घटनाओं व आंकड़ों को भी ज्यादा समय तक याद रखा जा सकता है। पीएटडी करने वाले शोधकर्ताओं के मुताबिक, अक्सर हमने देखा है कि बच्चे को होमवर्क कराने के दौरान उनके पिता उंगलियों पर जटिल समीकरण को सुलझा देते हैं। कई लोग अपनी उंगलियों के आधार पर ही अपने सीक्रेट पासवर्ड याद रखते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि हमारे सोचने समझने के वास्तविक कारणों को लेकर हमारे हांथों के उपयोग को लेकर परीक्षण किया गया। उनका मानना है कि इस तरह के अभ्यास से दिमाग के अंदरूनी हिस्सों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, एक शिक्षक इस तरह के दिमागी अभ्यासों को अच्छी तरह जानता है और वह अपने छात्रों से इसलिए जटिल समीकरण हल कराता है। इस तरह के दिमागी अभ्यास इसलिए जरूरी होते हैं क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ कुछ लोगों में भूलने की बीमारी भी बढ़ने लगती है।
न्योरोलॉजिस्ट भी दिमागी कसरत के लिए इस तरह के करीकों का अस्कर उपयोग करते हैं। शोधकर्ताओं ने कई तरीकों से यह समझने का प्रयास किया है, दिमाग के अंदरूनी हिस्से को सक्रिय रखने के लिए छोटे-छोटे अभ्यास किस तरह से लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। उनका मानना है कि रीजनिंग से संबंधित सवालों को 40 फीसदी लोग बगैर पेन और कागज के नहीं सुलझा पाते हैं। इसलिए ये अभ्यास बेहद जरूरी है।
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