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अगर चाहते हैं कि बच्चा माने आपकी हर बात, तो अपनाएं ये तरीके

कई पैरेंट्स को हमेशा शिकायत रहती है कि बच्चे उनकी बात नहीं सुनते हैं। जबकि बच्चों के इस व्यवहार के लिए कहीं न कहीं वे भी जिम्मेदार होते हैं। पैरेंट्स को चाहिए कि सबसे पहले अपना व्यवहार बच्चों के साथ सुधारें, तभी बच्चे भी अच्छा व्यवहार करेंगे।

अगर चाहते हैं कि बच्चा माने आपकी हर बात, तो अपनाएं ये तरीके
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कई पैरेंट्स को हमेशा शिकायत रहती है कि बच्चे उनकी बात नहीं सुनते हैं। जबकि बच्चों के इस व्यवहार के लिए कहीं न कहीं वे भी जिम्मेदार होते हैं। पैरेंट्स को चाहिए कि सबसे पहले अपना व्यवहार बच्चों के साथ सुधारें, तभी बच्चे भी अच्छा व्यवहार करेंगे। इस बारे में साइकोलॉजिस्ट प्रांजलि मल्होत्रा पूरी जानकारी दे रही हैं।

सीमा अपनी 11 साल की बेटी मुस्कान की वजह से बेहद परेशान है। वह जब भी मुस्कान से पढ़ने को या घर के किसी काम में मदद करने को कहती है, तो वह सीधा मना कर देती या कई बार असभ्यता से पेश आती है।

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सीमा, मुस्कान के ऐसे व्यवहार से बहुत परेशान है। उसे लगता है कि मुस्कान उसकी कोई बात नहीं सुनती है, जबकि मुस्कान का कहना है कि उससे कुछ भी गलती हो जाती है तो मम्मी सबके सामने डांटने लगती हैं।

खुद तो हमेशा फोन पर बिजी रहती हैं, लेकिन जैसे ही वह फोन पर कोई वीडियो देखती या गेम खेलती है तो उसे पढ़ने को कहने लगती हैं या फिर घर के काम सौंप देती हैं।

सीमा और मुस्कान जैसी कंडीशन कई घरों में देखने को मिलती है। पैरेंट्स को लगता है कि बच्चे उनकी बात नहीं सुनते, जबकि हकीकत यह है कि पैरेंट्स बच्चों के साथ जिस तरह पेश आते हैं, वैसा ही व्यवहार बच्चे भी करते हैं। अगर आप चाहती हैं कि बच्चा आपकी बात सुने तो पहले कुछ जरूरी बातों पर स्वयं ध्यान दें।

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कमतर न साबित करें

बच्चों से गल्तियां होना आम बात है। लेकिन पैरेंट्स अक्सर गल्तियों पर उन्हें डांटते हैं। कई बार तो बच्चों से यह तक कह देते हैं कि अब उनसे कोई उम्मीद नहीं है।

दिव्या ने अपनी बेटी सोनम से, उसके मंथली टेस्ट में कम नंबर आने पर कह दिया, ‘मुझे अब तुमसे कोई उम्मीद नहीं है कि तुम कभी अच्छे नंबर ला सकती हो।’

सोनम अपनी मां की बातों से इतना आहत हुई कि अपनी स्टडीज में ध्यान देना ही छोड़ दिया। जब पैरेंट्स ही बच्चों को कमतर आंकते हैं तो वे निराश हो जाते हैं, उनमें हीनता की भावना घर कर जाती है। जिससे वे पैरेंट्स से भी दूर होने लगते हैं।

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ऐसे में बच्चों को मोटिवेट करें। उन्हें बताएं कि आप उनसे कितनी उम्मीद करती हैं। जब बच्चों को लगता है कि पैरेंट्स उनसे उम्मीद करते हैं, तब वे खुद को बेहतर बनने की कोशिश करते हैं।

नियमों का सभी पालन करें

घर में पैरेंट्स बच्चों के लिए नियम बना देते हैं। हर काम के लिए बच्चों को समय से बांध देते हैं, जैसे कितने बजे से कितने बजे तक खेलना है? कब तक टीवी देखना है? सुबह कितने बजे सोकर उठना है? लेकिन यही रूल्स खुद फॉलो नहीं करते हैं।

ऐसा करने से भी बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं, उन्हें लगता है कि पैरेंट्स ने सभी नियम सिर्फ उन्हीं के लिए बनाए हैं। आपका बच्चा ऐसा न सोचे, इसके लिए उन रूल्स को आप भी फॉलो करें, जो बच्चा फॉलो कर रहा है। इससे बच्चे के दिमाग में कभी नेगेटिव थॉट्स नहीं आएंगे।

रोल मॉडल बनें

आप बच्चों से जैसे व्यवहार की उम्मीद करती हैं, वैसे ही उसके साथ पेश आएं। जैसे अगर आप चाहती हैं कि आपका बच्चा फोन पर कम से कम समय बिताए, टीवी एक समय सीमा तक देखे, दोस्तों के साथ आउटडोर गेम्स खेलने जाए।

इसके लिए खुद भी अनुशासित व्यवहार करें। जितना संभव हो खुद फोन का यूज कम करें। इसी तरह बच्चे और अपने लिए टीवी देखने का एक समय तय कर लें। जब वे टीवी देखे, आप भी उसके साथ देखें।

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इससे बच्चे का इंट्रेस्ट किसमें है, इस बारे में आपको पता चलेगा। अगर आप चाहती हैं कि बच्चा कोई नॉलेजेबल शो देखे तो पहले उसमें बातचीत के जरिए उस बारे में इंट्रेस्ट डेवलप करें।

खुद भी वही शो देखें। इस तरह बच्चे के सामने रोल मॉडल बनकर आप बच्चों के व्यवहार में पॉजिटिव चेंज ला सकती हैं।

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