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सावधान! अगर आपका बच्चा जरूरत से ज्यादा एक्टिव है तो हो सकती है ये गंभीर बीमारी

हाइपरएक्टिव किड को संभालना थोड़ा टफ जरूर है लेकिन पैरेंट्स थोड़ी समझदारी से बच्चे की एनर्जी को चैनेलाइज करें, तो पॉजिटिव रिजल्ट सामने आ सकते हैं। यानी, बच्चे की हाइपर एनर्जी का इस्तेमाल उसकी बेहतरी के लिए किया जा सकता है। सभी पैरेंट्स की ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा एक्टिव हो, चुस्त हो। लेकिन कई बार कुछ बच्चे ज्यादा ही एक्टिव होते हैं, जिन्हें संभालना पैरेंट्स के लिए मुश्किल हो जाता है।

सावधान! अगर आपका बच्चा जरूरत से ज्यादा एक्टिव है तो हो सकती है ये गंभीर बीमारी

हाइपरएक्टिव किड को संभालना थोड़ा टफ जरूर है लेकिन पैरेंट्स थोड़ी समझदारी से बच्चे की एनर्जी को चैनेलाइज करें, तो पॉजिटिव रिजल्ट सामने आ सकते हैं। यानी, बच्चे की हाइपर एनर्जी का इस्तेमाल उसकी बेहतरी के लिए किया जा सकता है। इस बारे में सीनियर सायकिएट्रिस्ट डॉ. मीनाक्षी मनचंदा पूरी जानकारी दे रही हैं।

सभी पैरेंट्स की ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा एक्टिव हो, चुस्त हो। लेकिन कई बार कुछ बच्चे ज्यादा ही एक्टिव होते हैं, जिन्हें संभालना पैरेंट्स के लिए मुश्किल हो जाता है।

ऐसे बच्चे हाइपरएक्टिव होते हैं, वे हर वक्त बिना थके इधर-उधर भागते-दौड़ते रहते हैं। उनमें पूरे दिन बहुत एनर्जी रहती है। ऐसे बच्चे एक जगह टिक कर बैठ नहीं सकते हैं। उनका ऐसा व्यवहार घर से बाहर भी बना रहता है।

इस बिहेवियर की वजह से वे किसी एक काम पर फोकस भी नहीं कर पाते हैं, जिससे उनके डेवलपमेंट पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में हाइपरएक्टिव किड्स को अलग तरह से हैंडल किया जाना चाहिए।

हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर

इस अवस्था को अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ए.डी.एच.डी.) के नाम से भी जाना जाता है। यह छोटे बच्चों को होने वाला एक डिसऑर्डर है, जिसमें बच्चा जरूरत से ज्यादा एक्टिव होता है।

इस वजह से बच्चे के सामाजिक, मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस समस्या के लक्षणों को बच्चों में आसानी से पहचाना जा सकता है।

हाइपरएक्टिव किड्स हाथों के साथ बार-बार खेलते रहते हैं। एक जगह शांत होकर नहीं बैठते हैं। बेवजह बोलते रहते हैं और पूरा दिन एनर्जेटिक रहते हैं। अगर आपके बच्चे में भी ये लक्षण नजर आते हैं, तो समझ जाइए कि वह हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर का शिकार है।

पैरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान

  • डांट या मार इस समस्या का समाधान नहीं है।
  • पैरेंट्स को चाहिए कि हाइपरएक्टिव बच्चे की एनर्जी को बचपन से ही पॉजिटिव वर्क में लगाएं।
  • ऐसे बच्चे बहुत टैलेंटेड होते हैं, अगर उनकी ऊर्जा को सही दिशा में लगाया जाए, तो वे क्रिएटिव बनते हैं, इनोवेटिव काम करते हैं।
  • पैरेंट्स को जितना मुमकिन हो उतना बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाना चाहिए। उसको सोशली एक्टिव करना चाहिए।
  • अगर बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता है तो उसकी इसमें मदद करनी चाहिए।
  • एडीएचडी से ग्रसित बच्चे अपने पैरेंट्स का पूरा अटेंशन चाहते हैं।
  • अगर पैरेंट्स उन पर ध्यान देंगे, तो वे एग्रेसिव नहीं होते हैं।
  • आपका बच्चा एडीएचडी से पीड़ित है तो उसके एनर्जी लेवल को सामान्य बनाए रखने के लिए उसके साथ खेलें।
  • वीकेंड पर कहीं घुमाने लेकर जाएं। सुबह-शाम पार्क लेकर जाएं, एक्सरसाइज करवाएं।
  • बच्चे के आस-पास ऐसा माहौल बनाएं, जिससे वह अपने हाइपर एक्टिव बिहेवियर को कंट्रोल कर सके।
  • अगर उसे किसी काम को करने से रोकना है, तो दूसरों के सामने डांटकर न रोकें।
  • बेहतर है कि उसे अकेले में प्यार से समझाएं कि कब कौन सा काम उसे करना चाहिए और कौन सा नहीं।
  • कई बार हाइपर एक्टिव बच्चे पैरेंट्स का ध्यान अपनी तरफ करने के लिए बार-बार सवाल पूछते हैं।
  • जब कोई उनकी बात नहीं सुनता तो वह और हाइपर हो जाते हैं।
  • ऐसे में जरूरी है कि पैरेंट्स, बच्चे की बात को जरूर सुनें।
  • इससे वह शांत रहेगा और जब आप उसके कुछ कहेंगे, तो उस बात को मानेगा भी।
  • हाइपर एक्टिव बच्चों को खेलकूद, आउटडोर एक्टिविटी में ज्यादा से ज्यादा बिजी रखें।
  • रूटीन से उसके स्कूल टीचर से मिलती रहें।
  • इससे बच्चे के व्यवहार को समझने में आपको बहुत मदद मिलेगी।

योग-मेडिटेशन

योगा और मेडिटेशन करने से ए.डी.एच.डी. की समस्या में काफी सुधार आता है। रोजाना बच्चे को योगा कराने से सोशल एंग्जायटी और ए.डी.एच.डी. की समस्या में काफी सुधर होता है। नियमित तौर पर मेडिटेशन करने से बच्चे की एकाग्रता भी बढ़ती है। साथ ही अपने काम पर, पढ़ाई पर फोकस करना भी सीखते हैं।

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