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Human Rights Day 2019 / मानवधिकार दिवस क्यों मनाया जाता है और आज के दौर में प्रासंगिकता

  • Human Rights Day 2019 : हर साल 10 दिसंबर को पूरी दुनिया में मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों में जाति, रंग, धर्म, लिंग, भाषा, राजनीतिक, राष्ट्रीय या सामाजिक मूल, संपत्ति, जन्म संबंधी अधिकारों के प्रति जागरुकता के साथ इनका उल्लघंन करने पर सजा का प्रावधान की जानकारी देना होता है।
  • मानवाधिकार संबंधी अंतर्राष्ट्रीय कानून की व्याख्या 500 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है, यह दुनिया में सबसे अधिक अनुवादित दस्तावेज़ हैं। साल 2019 में मानवाधिकार दिवस की थीम 2019 : मानव अधिकारों के लिए युवा खड़े हों (Human Rights Day 2019 Theme : Youth Standing Up for Human Rights) रखी गई है।
  • क्योंकि आने वाले समय में युवा ही दुनिया के सभी क्षेत्रों की नई दिशा तय करेगें। ऐसे में आज हम आपको मानवाधिकार दिवस की शुरुआत कैसे हुई और इसको मनाने के कारण बता रहे हैं।

Human Rights Day 2019 / मानवधिकार दिवस क्यों मनाया जाता है और आज के दौर में प्रासंगिकता
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Human Rights Day 2019 / मानवधिकार दिवस क्यों मनाया जाता है और आज के दौर में प्रासंगिकता

Human Rights Day 2019 : आज के दौर में दुनिया में महिलाओं और बच्चों के प्रति बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने मानवाधिकारों की परिभाषा को बदलने के बारे में संयुक्त राष्ट्र समेत सभी देशों को दुबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में अपराध को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अलावा राज्य, जिले और फिर घर तक के सभी लोगों को अहम भूमिका निभाते हुए एक नैतिक जिम्मेदारी को निभाना होगा। इसलिए आज हम आपको मानवधिकार क्या हैं, मानवधिकार किसे मिलने चाहिए और किन वजहों से मानवाधिकार खत्म हो सकते हैं जैसी जरुरी जानकारी दे रहे हैं।

क्या है मानवाधिकार और मानवाधिकार दिवस

हर व्यक्ति के प्राकृतिक और नैसर्गिक अधिकार यानि (आज़ादी, समानता, जीवन जीने का अधिकार, राजनीतिक, सामाजिक, सम्मान का अधिकार, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकार के अलावा जाति, धर्म, लिंग, समुदाय, भाषा, समाज संबंधी अधिकारों) के समूह को मानवाधिकार कहा जाता है। इसके अलावा हर देश में लोगों को मिले मौलिक अधिकारों (जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता का अधिकार) को भी मानवाधिकार के अंतर्गत ही माना जाता है।

जबकि साल 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) के बाद से हर साल 10 दिसंबर को मानवाधिकार की रक्षा और उससे जुड़े कानून के बारे में जागरुकता फैलाने वाला दिन मानवाधिकार दिवस कहलाता है।


मानवाधिकार दिवस 2019 की थीम

साल 2019 में मानवाधिकार दिवस की थीम 2019 : मानव अधिकारों के लिए युवा खड़े हों (Human Rights Day 2019 Theme : Youth Standing Up for Human Rights) रखी गई है। क्योंकि 20 नवंबर 2019 को बाल अधिकार कन्वेंशन की 30 वीं वर्षगांठ मनाई गई थी, जिसमें वर्तमान योजना को गति देने के लिए युवाओं की नेतृत्व को महत्वपूर्ण के साथ बेहतर भविष्य के लिए जरुरी भी माना गया है।

UN जेनेरिक कॉल टू एक्शन "स्टैंड अप फॉर ह्यूमन राइट्स" (Generic call to action "Stand Up for Human rights,") के तहत, युवाओं की क्षमता में परिवर्तन लाकर रचनात्मकता के जरिए तैयार किए गए लक्ष्यों को प्राप्त करना है। जिसमें नस्लवाद, अभद्र भाषा, गुंडागर्दी, भेदभाव और जलवायु के खिलाफ खड़ा होना है।

युवा पर ही थीम क्यों ?

आज के दौर में जब युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है, तो ऐसे में विकास की गति को बढ़ाने में भी युवाओं की भागीदारी अहम भूमिका बनती है। सार्वजनिक जीवन में भागीदारी मानव अधिकारों का एक मूल सिद्धांत होता है। ऐसे में उन सभी क्षेत्रों में युवाओं का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव जरुर पड़ता है। युवा हमेशा राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख चालक रहे हैं। वे सकारात्मक बदलाव के लिए जमीनी स्तर पर जुटने वालों में सबसे आगे हैं और एक बेहतर दुनिया के लिए नए विचार और समाधान लाते हैं। ऐसे में युवाओं को अपने अधिकारों के बारे में बेहतर जानकारी होना बेहद जरुरी है। जिससे वो देश के साथ दुनिया के विकास में एक अहम भूमिका निभा सकें।


मानवाधिकार दिवस का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने साल 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा करके लोगों को उनके रंग, धर्म, लिंग, भाषा, राष्ट्रीय या सामाजिक मूल, संपत्ति आदि के फलस्वरुप होने वाले भेदभाव से सुरक्षा देने के वाले कानूनों की घोषणा की गई है। जबकि भारत में 28 सितंबर 1993 से मानव अधिकार कानून को अमल में लाया जा रहा है। जिसके तहत हर देश में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया जाता है। मानवाधिकार कानून में नागरिक और राजनीतिक, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकार, बाल मजदूरी, एचआईवी/एड्स, स्वास्थ्य, भोजन, बाल विवाह, महिला अधिकार, हिरासत और मुठभेड़ में होने वाली मौत के अलावा सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक, अधिकार भी आते हैं।


मानवाधिकार आज के समय में प्रासंगिक हैं या नहीं

मानवाधिकार लंबे समय से लोगों के साथ अलग-अलग तरीकों से हो रहे भेदभाव और अपराध के खिलाफ आवाज उठाने का एक सुगम तरीका माना जाता है। इसमें लोग समानता, न्याय और स्वतंत्रता के साथ हिंसा को रोककर शांति को बनाने में सहयोग करती है। क्योंकि मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा हम सभी यानि गरीब, अमीर, महिला, पुरुष और बच्चों सभी को कानून की समान रुप से मदद लेने का अधिकार प्रदान करते हैं। ऐसे में आज के दौर में जब अपराध और हिंसा का दायरा रोजाना विस्तृत हो रहा है, तो ऐसे में मानवधिकारों की प्रासंगिकता भी बढ़ती जा रही है।

मानवाधिकार के अंतर्गत में आने वाले मुद्दे :

प्रेस की आजादी

एल जी बी टी (LGBT) अधिकार

मानव तस्करी

धार्मिक हिंसा

जाति से संबंधित मुद्दे

हिंसा संबंधी मुद्दे

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