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इन तरीकों से मां-बेटी के खास रिश्ते को बनाएं ''अटूट''

वैसे तो मां का अपने हर बच्चे के साथ एक खास रिश्ता होता है, लेकिन अपनी बेटी के जन्म के बाद से ही मां उसमें खुद की परछाई देखने लगती है। वक्त के साथ-साथ मां को बेटी के एक अलग व्यक्तित्व का एहसास होने लगता है और वो जिंदगी के हर मोड़ पर मिलने वाली कठिनाईयों के लिए बेटी को तैयार करने लगती है।

इन तरीकों से मां-बेटी के खास रिश्ते को बनाएं अटूट
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वैसे तो मां का अपने हर बच्चे के साथ एक खास रिश्ता होता है, लेकिन अपनी बेटी के जन्म के बाद से ही मां उसमें खुद की परछाई देखने लगती है। वक्त के साथ-साथ मां को बेटी के एक अलग व्यक्तित्व का एहसास होने लगता है और वो जिंदगीं के हर मोड़ पर मिलने वाली कठिनाईयों के लिए बेटी को तैयार करने लगती है,

इसके लिए कभी मां बच्ची को डांटती-फटकारती है तो कभी प्यार से समझाती है,लेकिन कई बार मां-बेटी के इस खट्टे-मीठे रिश्ते में अनजानें में ही गलतफहमियां अपनी जगह बनाने लगती हैं।

आखिर में इतनी दूरी आ जाती है कि एक-दूसरे से काफी समय तक बातचीत तक नहीं करतीं,इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जिससे आप अपने रिश्ते को फिर से बचपन की तरह फूलों सा महका सकतीं हैं।

मां-बेटी के रिश्ते को ऐसे बनाएं खास :

1.पहला कदम खुद बढ़ाएं - मां-बेटी के स्पेशल रिश्ते से दूरियों की दीवार गिराने के लिए कभी भी एक-दूसरे की पहल का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि हमेशा ये सोचें कि हमने कहां और ऐसी कौन सी गलती की जिससे रिश्ते में गलतफहमी जन्म ले पाईं।

फैमिली डॉक्टर और आई लव माई मदर की लेखक लिंडा मिन्टल के मुताबिक "दूसरे व्यक्ति को पहला कदम उठाने की प्रतीक्षा न करें, लेकिन ... आपके रिश्ते से अधिक लाभ उठाने के लिए व्यावहारिक सहायता। ऐसा करने से अनिवार्य रूप से रिश्तों को छोड़ दिया जाता है। "इस संबंध में सोचें कि आप रिश्ते में कैसा महसूस करते हैं और आप क्या बदल सकते हैं।"

2. अपने आप को बदलें - अक्सर लोग अपनी की गई गलती का ठीकरा भी दूसरों पर डाल देते हैं,लेकिन कभी भी इस सोच से किसी भी रिश्ते में सुधार नहीं लाया जा सकता है। अगर आप वास्तव में अपनी मां के साथ रिश्ते में सुधार लाना चाहती हैं, तो सबसे पहले खुद को बदलें। आप अपनी क्रिया और प्रतिक्रिया में बदलाव लाकर ही इस समस्या को खत्म कर सकती हैं।

3. कभी भी बातचीत बंद न करें - किसी भी समस्या का हल तभी निकाला जा सकता है,जब उस पर खुलकर बात की जाए। क्योंकि बातचीत करने से ही एक-दूसरे के नजरिये को समझने में आसानी होती है। जिसके बाद रिश्तों आई दूरियों को आपसी समझ के साथ मिटाया जा सकता है।

आपको बता दें कि "कुछ मायनों में वे इतने करीब हो सकते हैं या इतने करीब महसूस कर सकते हैं कि उनका मानना ​​है कि उनमें से प्रत्येक को पता होना चाहिए कि दूसरा कैसा महसूस करता है।" "नतीजतन क्या होता है कि वे संवाद नहीं करते हैं।" या वे कठोर रूप से संवाद करते हैं।

4 दूसरे को ध्यान से सुनें - अक्सर हम सभी लोग हर किसी से सिर्फ अपनी बात कहते हैं और जब दूसरे के बात करने की बारी ऐती है तो हम वहां से चले जाते हैं। किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए सबसे पहले आपको सामने वाले की बात को सुनना आना चाहिए।

क्योंकि जब आप ध्यान से सामने वाले की बात सुनेगें, तभी आप अपना भी पक्ष अच्छे से दूसरे को समझा पायेगें। जब आप वापस सोचते हैं कि आपकी माँ या बेटी क्या कह रही है, तो आप उसे बता रहे हैं कि उसे सुना जा रहा है और आप समझते हैं।

5. संतुलित व्यक्तित्व और निकटता - किसी भी रिश्ते में परेशानी तब आती है जब हम उस रिश्ते को अपने तौर-तरीकों के अनुरूप ढालने की कोशिश करते हैं। हम अक्सर रिश्तों में ये भूल जाते हैं कि रिश्ते में हर शख्स का अपना एक अलग व्यक्तित्व होता है। जिसे हमें स्वीकार और सम्मान करना चाहिए। ऐसी सोच रखने से ही मां-बेटी के रिश्ते की दूरियों को कम करके नजदीक लाया जा सकता है।

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