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दिमाग में आएं अश्लील बातें, तो ऐसे छुड़ाएं पीछा

ये परेशानी करोड़ो की आबादी में कुछ 100 या 200 लोगों की नहीं है, बल्कि हर दूसरा इंसान की है।

दिमाग में आएं अश्लील बातें, तो ऐसे छुड़ाएं पीछा

आज के वक्त में हर इंसान किसी ना किसी बीमारी का शिकार है या किसी लत का। कई बार तो ये बीमारी या लत हम पर हावी हो जाती है। आज हम आपको ऐसी ही लत के बारे में बताने जा रहे हैं।

इस परेशानी से करोड़ों की आबादी में कुछ 100 या 200 लोगों की नहीं है, बल्कि हर दूसरा इंसान की है। इसी तरह से सोच में बदलाव आना भी संभव है। सोच एक ऐसी चीज़ है जो निरंतर चलती जाती है। मनुष्य किसी भी समय बिना सोच के नहीं रह सकता।

एक बच्चे को खेलने की चिंता, एक मां को परिवार की चिंता और एक पिता को अपने घर-परिवार के आने वाले भविष्य की चिंता। कुछ ऐसी ही सोच जुड़ी है संभोग की प्रक्रिया से है।

अक्सर लोग यह शिकायत करते हैं कि जब उनका आकर्षण यदि सेक्स जैसी बातों की ओर बढ़ता है, तो दिन-प्रतिदिन यह बढ़ता ही जाता है। बल्कि हर दूसरा इंसान, फिर चाहे वो पुरुष हो या स्त्री, जो भी सेक्स जैसे विषय से संबंध रखता है, वह इस ‘फैंटेसी’ से जुड़ा है।

इस परेशानी से परेशान व्यक्ति का काम में मन नहीं लगता है। जिसका नतीजा है लोग अपना कार्य छोड़ इस अंतरमन की कल्पना को शांत करने में लग जाते हैं।

लेकिन कुछ तो उपाय होगा इस परेशानी से बाहर आने का। वह क्या जरिया है जो व्यक्ति के मन को शांत कर सेक्स फैंटेसी से बचाता है। लेकिन उससे पहले यह जानना भी जरूरी है कि आखिरकार यह भावना है क्या और क्यों उत्पन्न होती है।

तमाम अध्ययन के बाद यह माना गया है कि दिमाग में आने वाले अश्लील विचार स्वभाविक हैं। अकसर इंसान निरंतर आने वाले इन ख्यालों से बेहद परेशान हो जाता है और उसे लगता है कि इसमें उसी की कोई भूल है जो वह इस प्रकार के विचारों से अपना पिंड नहीं छुड़ा पा रहा है।

दूसरी ओर जब यह ख्याल व्यक्ति के काम में भी दखल देते हैं, तब वह खुद को इन्हें रोकने से असमर्थ होने की अवस्था में खुद को ही कोसता है। लेकिन इस लत से छूटकारा पाने के लिए बातों का हमेशा रखे ख्याल....

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