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गर्मी में परिवार के साथ बिताएं क्वालिटी टाइम, ऐसे करें एंज्वॉय

हमारे जीवन की छोटी-बड़ी खुशियां, हमारे अपनों से, परिवार से जुड़ी होती हैं। हर रिश्ता हमें अलग अहसास से भरता है, एक अनोखी खुशी देता है। जरूरत है कि हर रिश्ते की महत्ता को हम समझें और इन्हें संजोए रखें। परिवार बिना हमारा जीवन अधूरा सा रहता है।

गर्मी में परिवार के साथ बिताएं क्वालिटी टाइम, ऐसे करें एंज्वॉय
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हमारे जीवन की छोटी-बड़ी खुशियां, हमारे अपनों से, परिवार से जुड़ी होती हैं। हर रिश्ता हमें अलग अहसास से भरता है, एक अनोखी खुशी देता है। जरूरत है कि हर रिश्ते की महत्ता को हम समझें और इन्हें संजोए रखें। परिवार बिना हमारा जीवन अधूरा सा रहता है। दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता, ताऊ-ताई, चाचा-चाची, मामा-मामी और भाई-बहन जैसे अनेक रिश्तों से मिलकर परिवार बनता है।

चाहे सब साथ रहें या अलग-अलग शहरों में, सभी एक-दूसरे से प्यार की डोर से बंधे होते हैं। ऐसा होने पर ही परिवार खुशहाल बनता है, इसलिए हम सबको हर रिश्ते के मायने और उसकी अहमियत को समझना चाहिए।

माता-पिता का निस्वार्थ प्रेम

वेदों में माता को धरती और पिता को आकाश कहा गया है यानी, मां, धरती के समान हमें जीवन देती है, हमारा पालन करती है और पिता, आकाश की तरह हमें अपनी छत्रछाया में रखते हैं, सुरक्षा देते हैं।

दोनों ही बच्चों के दुख में दुखी और सुख में सुखी होते हैं। बच्चों के जीवन में आने वाली हर मुश्किल को आसान करते हैं। अगर कभी डांटते-डपटते भी हैं तो इसमें बच्चों की भलाई ही छुपी होती है। दोनों ही निस्वार्थ भाव से ऐसा करते हैं, क्योंकि बच्चे ही उनका संसार होते हैं।

दादा-दादी का दुलार

दादा-दादी का दुलार हर बच्चे के लिए बहुत अनोखा होता है। इनका प्यार, पेड़ की शीतल छांव सा होता है। दादी की परियों वाली कहानियों में न जाने कितने सबक छिपे होते हैं, जो ताउम्र हमारे काम आते हैं।

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माता-पिता से ज्यादा बच्चों को संस्कारित दादा-दादी करते हैं। इसी तरह नाना-नानी का प्यार बच्चे के लिए बहुत अनोखा होता है, वह भी अपने नाती-नातिन पर ढेर सारा प्यार लुटाते हैं।

भाई-बहन से अटूट नाता

भाई-बहन का साथ हमारे बचपन को खुशियों से भरता है। चाहे भाई-बहन सगे हों या चचेरे-ममेरे, सभी के साथ ढेर सारी शरारतें होती हैं, मस्ती होती है। भाई, बहनों के साथ रहकर ही बच्चे शेयरिंग, केयरिंग सीखते हैं।

मुश्किल वक्त में भी भाई-बहन, एक-दूसरे का साथ देते हैं। इन बातों से धीरे-धीरे भाई-बहनों के बीच नाता गहरा होता है, अटूट होता है। बड़े होने पर भी यह नाता बना रहता है, चाहे सब अपनी जिंदगी में कितने भी व्यस्त हों, लेकिन भाई-बहन एक-दूसरे से संपर्क में बने रहते हैं।

ये रिश्ते भी हैं खास

जहां दादा-दादी, नाना-नानी और माता-पिता हमें ढेर सारा प्यार देते हैं। तो चाचा-चाची, मामा-मामी का प्यार भी हमारे लिए कुछ कम नहीं होता है।

अगर माता-पिता या घर के बुजुर्ग हमारी कोई बात नहीं मानते हैं, तो चाचा-चाची, मामा-मामी सबको समझाते हैं या खुद ही हमारी ख्वाहिशों को पूरा कर देते हैं।

समय-समय पर वह अपना मार्गदर्शन भी देते रहते हैं। इसी तरह बुआ, मौसी भी अपना खूब स्नेह देती हैं, तीज-त्योहारों पर घर के बच्चों को कभी नहीं भूलती हैं, इनसे प्यारे उपहार भी मिलते हैं।

जब ये सभी रिश्ते तीज-त्योहारों पर या किसी समारोह में एक साथ जुटते हैं, तो खूब रौनक होती है। जीवन खुशियों से भर जाता है।

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