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बच्चों में कॉन्फिडेंस बढ़ाते वक्त भूलकर भी न करें ये गलती, बच्चा हो सकता है आपसे दूर

कई पैरेंट्स अपने बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीद करते हैं, उन्हें ऑलराउंडर बनाने की चाह रखते हैं। इस वजह से कई बार बच्चे का कॉन्फिडेंस लूज हो जाता है। वह खुद को कमतर समझने लगता है। कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखा कई पैरेंट्स अपने बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीद करते हैं, उन्हें ऑलराउंडर बनाने की चाह रखते हैं। इस वजह से कई बार बच्चे का कॉन्फिडेंस लूज हो जाता है। वह खुद को कमतर समझने लगता है।

बच्चों में कॉन्फिडेंस बढ़ाते वक्त भूलकर भी न करें ये गलती, बच्चा हो सकता है आपसे दूर
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कई पैरेंट्स अपने बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीद करते हैं, उन्हें ऑलराउंडर बनाने की चाह रखते हैं। इस वजह से कई बार बच्चे का कॉन्फिडेंस लूज हो जाता है। वह खुद को कमतर समझने लगता है। अगर कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखा जाए, बच्चे को सही गाइडेंस मिले तो वह कॉन्फिडेंट बनेगा और स्टडी, अपने पसंद के काम में अच्छा परफॉर्म भी करेगा।

अनघा सेवेंथ क्लास में पढ़ती है। हर बार एग्जाम में उसके बहुत अच्छे पर्सेंटेज आते हैं। लेकिन उसके पैरेंट्स चाहते हैं कि वह पढ़ाई में और भी बेहतर करे। इस वजह से हमेशा उस पर एक्सट्रा प्रेशर बनाते हैं। अनघा की मम्मी तो उसे कई तरह की एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में भी हिस्सा लेने के लिए दबाव बनाती है, जिससे वह क्लास की ऑल राउंडर स्टूडेंट्स में शुमार हो सके।

अनघा को कई बार लगता है कि वह अपने पैरेंट्स की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। इस वजह से वह परेशान रहती है, जिसका असर उसके व्यक्तित्व पर होने लगा है, वह खुद को कमतर समझने लगी है, उसका कॉन्फिडेंस लेवल कम होने लगा है। अगर समय रहते उसके पैरेंट्स ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया तो आगे चलकर कमतरी का यह अहसास उसकी पर्सनालिटी का हिस्सा बन जाएगा। ऐसा आपके बच्चे के साथ भी हो सकता है।

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बच्चों में कॉन्फिडेंस डेवलप करने के उपाय :

1.जानें बच्चे की एबिलिटी

सबसे पहले पैरेंट्स को चाहिए कि उनका बच्चा जैसा है, उन्हें वैसे ही एक्सेप्ट करें। असल में हर बच्चे की अपनी अलग क्वालिटी, एबिलिटी होती है। कोई पढ़ाई में अच्छा होता है, कोई गाने में अच्छा होता है तो कोई डांस में।

अगर पैरेंट्स अपने बच्चे को हर फील्ड में अव्वल लाने की जद्दोजहद में जुटे रहेंगे तो वह किसी भी एक काम में परफेक्ट नहीं बन पाएगा। कहने का मतलब है कि बच्चे को अपने पसंद के काम पर ही फोकस करने दें, उसे ऑलराउंडर बनाने की कोशिश न करें।

2.कंपैरिजन से बचें

आजकल बच्चों से ज्यादा पैरेंट्स कॉम्पिटिटव हो गए हैं। वे हमेशा अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं, उन्हें वैसा ही बनने की सलाह देते हैं। इससे बच्चों को बुरा लगता है। कई बार वे सोचते हैं कि अपने दोस्त या कजिन की तरह नहीं बन पाए तो अपनी लाइफ में कुछ नहीं कर पाएंगे।

यह सोच उन्हें आगे बढ़ने से रोकती है। पैरेंट्स को चाहिए कि अपने बच्चों का कंपैरिजन दूसरे बच्चों से न करें। इसके बजाय बच्चे को मोटिवेट करें कि वह जितना बेहतर कर सकता है, उतना करने की कोशिश करे।

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3.एप्रीशिएट जरूर करें

पैरेंट्स को अपने पैरेंटिंग स्टाइल में एप्रीशिएशन यानी तारीफ को जरूर शामिल करना चाहिए। अगर आप हमेशा बच्चों से बेहतर करने की उम्मीद करती हैं, तो जब वह अच्छा परफॉर्म करे तो उनकी खुलकर तारीफ जरूर करें। अगर वह हार जाता है या कभी असफल हो जाता है तो भी उसे मोटिवेट जरूर करें। बच्चे से कहें-‘तुमने बहुत अच्छी कोशिश की।

इस बार सक्सेस नहीं मिली तो क्या हुआ, आगे तुम जरूर जीतोगे।’ इस तरह की बातों का बच्चों की पर्सनालिटी पर बहुत गहरा असर पड़ता है। अगर वह खुद को कमतर समझनी की भूल कर भी रहा है तो आपकी बातों से उसे मोटिवेशन मिलेगा।इन सभी बातों पर अमल करके आप बच्चे की पर्सनालिटी को कॉन्फिडेंट बना सकती हैं।

4.अपना व्यवहार भी परखें

अगर आप चाहती हैं कि आपके बच्चे खुद को कमतर न समझें तो इसके लिए उन्हें मोटिवेट करने के साथ ही अपने व्यवहार में भी बदलाव लाएं। कहने का मतलब है कि आप भी नकारात्मक बातों से परहेज करें।

खुद को भी बच्चों के सामने कमजोर और कमतर साबित न करें। दरअसल, जैसे व्यवहार की आप उम्मीद बच्चों से करती हैं वैसा ही व्यवहार आपको उनके सामने करना चाहिए। ऐसे में सबसे पहले खुद की पर्सनालिटी को कॉन्फिडेंट बनाएं।

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