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आप हार्मोनल इमबैलेंस का शिकार तो नहीं, ना करें इग्नोर

महिलाओं को हार्मोनल इमबैलेंस की प्रॉब्लम ज्यादा फेस करनी पड़ती है।

आप हार्मोनल इमबैलेंस का शिकार तो नहीं, ना करें इग्नोर

महिलाओं को हार्मोनलइम्बैलेंस की प्रॉब्लम ज्यादा फेस करनी पड़ती है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते इसके लक्षणों को पहचानकर लाइफस्टाइल में चेंज लाएं, तभी समस्या से निजात पाई जा सकती है। जानिए, हार्मोनल इम्बैलेंस के कारण, लक्षण और उपचार के बारे में।

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अचानक क्या आपका मूड स्विंग होने लगा है? अकसर उदास रहती है? इर-रेग्युलर पीरियड्स हो रहे हैं? अचानक वेट बढ़ या घट रहा है? अगर आप इनमें से किसी भी तरह की प्रॉब्लम फेस कर रही हैं, तो अलर्ट हो जाएं। दरअसल, आप हार्मोनल इम्बैलेंस का शिकार हो सकती हैं। यह समस्या बाद में कई बड़ी मेडिकल प्रॉब्लम को जन्म दे सकती है। इसलिए समय रहते उपचार कराना जरूरी है।

एंडोक्राइनोलॉजिस्ट मैक्स हॉस्पिटल डॉ. सप्तर्षि भट्टाचार्य के अनुसार,

प्रभावित होने की उम्र

आमतौर पर हार्मोनल इम्बैलेंस की प्रॉब्लम 12 से 15 साल की उम्र की लड़कियों और मेनोपॉज के बाद यानी 45 प्लस की उम्र की महिलाओं में देखने को मिलती है। लगभग 30 से 50 प्रतिशत महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं। महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल इम्बैलेंस देखे जाते हैं। लेकिन इनमें से मुख्य हैं-थाइरॉयड, इंसुलिन और प्रोलैक्टिन हार्मोंस मेंइम्बैलेंस।

कारण

हार्मोनल इम्बैलेंस के कई कारण हो सकते हैं। कई बार लाइफस्टइाल की वजह से हार्मोनल प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है। इतना ही नहीं जेनेटिक प्रॉब्लम, दवाइयों का नेगेटिव इफेक्ट, लंबे समय तक दवाइयों पर डिपेंड रहना भी हार्मोनल इम्बैलेंस के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

लक्षण

-इर-रेग्युलर पीरियड्स

-मूड स्विंग

-डिप्रेशन

-अनिद्रा यानी डी-स्लीप

-अचानक वेट घटना या बढ़ना

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उपचार

अगर आपको हार्मोनल इम्बैलेंस से जुड़े कोई भी लक्षण नजर आएं, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं। डॉक्टर से संपर्क करें, टेस्ट कराएं। बताई गई दवा का सेवन करें। इसके अलावा हेल्दी डाइट लें। योगा-एक्सरसाइज-वॉक रेग्युलर करें। ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। लाइफस्टाइल को बैलेंस करें। हमेशा खुश रहें, इससे डिप्रेशन नहीं होगा। इस तरह आप इस समस्या से छुटकारा पा सकती हैं।

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