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होली 2019 : होली पर खुशियों के रंगों से ऐसे पाएं तनाव से छुटकारा

आज के दौर में हम सब काम के दबाव और तमाम तनावों से परेशान रहते हैं। ऐसे में होली जैसे त्योहार ही हैं, जो सुकून और खुशी देते हैं, हमारे तनाव को दूर करते हैं। तो क्यों ना हम भी सारे तनावों को भूलकर अपने और अपनों के जीवन में खुशियों के रंग घोलें।

होली 2019 : होली पर खुशियों के रंगों से ऐसे पाएं तनाव से छुटकारा

Holi 2019 : जीवन की आपा-धापी में भागते-भागते, हमारे भीतर आई नीरसता को दूर करने का काम हमारे तीज-त्योहार करते हैं, हमें एक नई ऊर्जा देते हैं। इन्हीं त्योहारों में से एक है होली। उमंग और मस्ती का ऐसा पर्व है। इसे ऐसे ही खाली ना जाने दें, रंगों की रंग-बिरंगी दुनिया में खो जाएं।

रंगों का कमाल

प्रिया एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती थी। एक दिन प्रोजेक्ट बंद हो जाने की वजह से प्रिया को कंपनी से टर्मिनेट कर दिया गया। प्रिया की तो
मानो मुस्कुराहट ही चली गई। घर वालों को भी उसके चेहरे पर निराशा साफ नजर आ रही थी। इसी बीच होली का त्योहार भी नजदीक था, लेकिन प्रिया अपनी टेंशन में उसे भी भूल गई थी। ऐसे में प्रिया के पैरेंट्स ने होली के दिन उसके कजिंस को होली खेलने के लिए घर पर बुलाया। सभी प्रिया को, जबर्दस्ती होली खेलने बाहर ले गए। प्रिया अनमनी हो कर गई पर उन रंगों ने मानो उसमें नया जोश भर दिया। पूरा दिन हंसी-ठिठोली और मस्ती करने में ही चला गया। अब जो घर वापस लौटी, वह एक नई प्रिया थी, नए जोश के साथ। इस सोच के साथ कि क्या हुआ जो एक नौकरी ही तो थी, चली गई तो दूसरी मिल जाएगी। दरअसल, रंगों ने उसके मन के सूनेपन को दूर कर दिया। वैसे भी प्रकृति का रंगों से गहरा नाता है। रंग हमारे मन के भावों को बताते हैं। विज्ञान भी रंगों का चमत्कार मानता है। कलर थैरेपी तो आज विदेशों के साथ-साथ भारत में भी प्रचलित हो रहा है।

तनाव हो जाए दूर

आज की जीवनशैली में हम खुद को समय देना भूलते जा रहे हैं। मशीनी युग में हम भी कब मशीनी हो गए, पता ही नहीं चलता, जिसकी वजह से हम
अपने त्योहारों से भी दूर हो जाते हैं। धीरे-धीरे ये तीज-त्योहार छोटे शहरों, गांवों और कस्बों में सिमटकर रह गए हैं। जबकि हकीकत में देखा जाए तो ये
त्योहार एक स्ट्रेस रिमूवर होते हैं, रोज की भागदौड़ से मन को सुकून देते हैं। यही तो ताकत होती है, हमारे इन त्योहारों की जो इस बेरंग-सी जिंदगी में भी नए रंग भर देते हैं। तो क्यों ना इन त्योहारों का मिलकर मजा लें।

बन जाएं बच्चे

होली जैसे त्योहारों पर भूल जाइए कि आपकी क्या उम्र है, आपका क्या रुतबा है? बस याद रखिए, अपना बचपन। बच्चों की तरह उठाएं इस रंगीन त्योहार का मजा। जिम्मेदारियां तो जिंदगी भर पीछा नहीं छोड़ेंगी, पर बचपना दिखाने का मौका बार-बार नहीं मिलता। उम्र भले ही पचास-पचपन हो पर मस्ती ऐसे करें, जैसे आप अपने बचपन को फिर से जी रही हों।

रंगों में हो जाएं सराबोर

हम अकसर खुशियों का इंतजाम पैसा खर्च करके करते हैं पर असली खुशियों की कोई कीमत नहीं होती है। ये खुशियां तो इन त्योहारों पर हमें मुफ्त में ही मिल जाती हैं तो जम के उठाएं रंगों का मजा और नीरस जिंदगी में घोलें फागुन की मस्ती। इस बार खिड़की से झांक कर बाहर लोगों को होली खेलते
देखने से बेहतर होगा, अपने घर का दरवाजा खोलिए और शामिल हो जाइए, रंगों की इन फुहारों में। लाल, पीले, हरे, नीले सब रंग आपके इंतज़ार में हैं।
यकीन मानिए, होली के ये रंग आपकी जिंदगी को और भी रंगीन बना देंगे।
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