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Holi 2019 : होली पर इन खास तरीकों से रिश्तों में घोलें प्यार के रंग

जाने-अनजाने परिवार के सदस्यों के बीच ऐसी बातें हो जाती हैं, जिससे हमारे रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है। ऐसे में आपसी मनमुटाव को दूर करने के लिए होली से बेहतर दिन क्या हो सकता है। बस, जरूरत है प्यार भरे रंगों के साथ एक पहल करने की, रिश्ते खुद-ब-खुद फिर से प्यार के रंग में रंगते चले जाएंगे।

Holi 2019 :  होली पर इन खास तरीकों से रिश्तों में घोलें प्यार के रंग

Holi 2019 : कभी सोचा है आपने, क्या होता अगर जिंदगी में अलग-अलग रंग ही ना होते, जिंदगी कितनी नीरस हो जाती। ये रिश्ते ही तो हैं, जो हमारी बेरंग जिंदगी में एक नए रंग बिखेरते है, एक उजाला भर देते हैं। लेकिन कभी-कभी समय का अभाव या फिर किसी-भी रिश्ते में आपसी समझ की कमी, एक-दूसरे के दिलों में दूरियां पैदा कर देती हैं। इन्हीं दूरियों को मिटाने का काम करता है, रंगोत्सव, क्योंकि यही अवसर होता है, रिश्तों को प्यार के रंग से सराबोर करने का। अपने मन की बात बेझिझक कहने का, उलझे रिश्ते के मांझे को समेटने का। तो क्यों ना फिर से एक हो जाएं और खुलकर खिलखिलाएं। गुझिया खाएं, गुलाल लगाएं और एक स्वर में जोर से बोलें ‘बुरा न मानो होली है।’

भुलाएं गिले-शिकवे

वंदिता और अंकुर में कुछ समय से अनबन चल रही थी। नाराजगी इतनी कि दोनों एक-दूसरे से बात तक नहीं कर रहे थे। होली के दिन जब अंकुर उठा तो उसे देख वंदिता मुस्कुराए जा रही थी। जब उसने आईने में अपना चेहरा देखा तो, वो रंगों से पूरा सना हुआ था। उसने भी आव देखा न ताव, वंदिता को जमकर रंग डाला। इस रंग-बिरंगी मीठी-सी पहल से उनके बीच के सारे गिले-शिकवे छू हो गए। होली के त्योहार ने बिगड़े रिश्ते में फिर से रंग भर दिए। अगर आपके जीवन में भी किसी रिश्ते में खिंचाव या तनाव है, चाहे पति-पत्नी हों, दोस्त हों या कोई रिश्तेदार, उन्हें फिर से मधुर बनाने का होली से अच्छा कोई समय नहीं है। मन के सारे गिले-शिकवे भुलाकर एक चुटकी गुलाल ही अपना कमाल दिखा देगी। बस, एक पहल करके तो देखिए।

खुद करें पहल

शादी से पहले मेघा की जिंदगी बिल्कुल अलग थी। वो खुले आसमान में उड़ते पंक्षी की तरह थी, पर शादी के बाद सब बदल गया। मेघा की सास काफी
अनुशासनप्रिय थीं, यही वजह थी कि दोनों में अनबन चलती रहती। पर मेघा को पता था कि उसकी सासू मां उससे प्यार करती हैं, सो उसने उनकी
नाराजगी को दूर करने का फैसला किया। होली वाले दिन मेघा ने खुद पहल करते हुए जब सासू मां के पैरों में रंग लगाकर मुस्कुराई तो सासू मां ने भी उसे अपने गले से लगा लिया। उनके मन में जमी कालिमा पर रंगों की फुहार ने अपना असर दिखा दिया। हर परिवार में छोटी-छोटी बातों पर रिश्तों में ऐसी स्थिति बन जाती है और हमें पता ही नहीं चलता मनभेद कब मतभेद में बदलकर, हमारे रिश्ते में एक चुप्पी में तब्दील हो जाते हैं। तो इस होली के
त्योहार पर रिश्तों में आई इन मन की गांठों को खोल दीजिए। वैसे भी त्योहारों और रिश्तों का बड़ा ही गहरा बंधन होता है, दोनों एक-दूसरे के बिना बड़े
सूने-सूने लगते हैं। यही समय है, जब हम सब कड़वी यादों को भुलाकर अपने रिश्ते को एक नया रूप दे सकते हैं। रिश्ते की नाजुक डोर को संभालने का
सबसे अच्छा समय है, रंगों का पर्व होली।

सबके साथ मनाएं खुशियां

आजकल व्यस्तताओं और बेहतर करियर बनाने की चाह में बहुत से लोग, परिवार के साथ नहीं रह पाते। सभी एक-दूसरे से फोन पर बात करके या फिर मैसेज करके ही त्योहार सेलिब्रेट कर लेते हैं। लेकिन अपने रिश्तों में ताजगी लाना है तो होली से बेहतर समय क्या होगा, जब आप परिवार के साथ
मिलकर खुशियां मनाएं। तो इस बार होली व्हाट्सएप, फेसबुक या ई-मेल पर नहीं, बल्कि परिवार के साथ, रिश्तेदारों के साथ, दोस्तों के साथ मिलकर
मनाएं।
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