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हाई ब्लड प्रेशर से हो सकती हैं कई दिक्कतें, रखें इन बातों का ध्यान

हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप वह स्थिति होती है, जब धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें तनाव, फास्ट फूड, व्यायाम की कमी, धूम्रपान का सेवन आदि शामिल है। सामान्य रक्तचाप का रेंज 120/80 एमएमएचजी होता है।

हाई ब्लड प्रेशर से हो सकती हैं कई दिक्कतें, रखें इन बातों का ध्यान

अगर आप भी जिंदगी में अधिक तनाव लेने लगे हैं, तो संभल जाइए। यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, हाइपरटेंशन के अधिकतर मामलों के पीछे तनाव एक मुख्य वजह है।

डॉक्टरों के अनुसार, एक समय था जब इस समस्या से खास उम्र के लोग ही परेशान हुआ करते थे, मगर आज की दौड़ती-भागती जिंदगी से कदम से कदम मिलाकर चलने की होड़ में हर उम्र के लोग हाइपरेटेंशन के शिकार हो रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

क्या है हाइपरटेंशन?

हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप वह स्थिति होती है, जब धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें तनाव, फास्ट फूड, व्यायाम की कमी, धूम्रपान का सेवन आदि शामिल है।

सामान्य रक्तचाप का रेंज 120/80 एमएमएचजी होता है। हाइपरटेंशन बढ़ने से इसका असर शरीर के मुख्य अंगों जैसे, ब्रेन, किडनी, हृदय, आंख आदि पर होता है।

ये हैं लक्षण

  • सिर में दर्द
  • घबराहट
  • नाक से खून बहना
  • छाती में दर्द
  • ठीक से नींद न आना

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मोबाइल-लैपटॉप भी है वजह

लखनऊ के केजीएमयू के फिजियॉलजी विभाग के प्रफेसर नरसिंह वर्मा ने बताया कि वर्किंग क्लास में 60 प्रतिशत लोगों को हाइपरटेंशन होने का खतरा बना रहता है।

इसका प्रमुख कारण लाइफस्टाइल में बदलाव और सही खानपान न होना है। इसके अलावा मोबाइल और कंप्यूटर के अधिक इस्तेमाल से भी हाइपरटेंशन के मरीज बढ़ रहे हैं।

खासकर बच्चों में हाइपरटेंशन की समस्या तेजी से बढ़ा रही है। दरअसल, मोबाइल के अधिक प्रयोग से फिजिकल ऐक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे रक्तचाप की समस्या का खतरा अधिक रहता है।

चेक कराते रहें ब्लड प्रेशर

केजीएमयू सीसीयू के प्रफेसर अविनाश अग्रवाल ने बताया कि हाइपरटेंशन से बचने के लिए 40 की उम्र पार करने वाले व्यक्तियों को 6 महीने में एक बार बीपी जरूर चेक करवाना चाहिए।

इसके अलावा अगर आपको घबराहट महसूस हो तो तत्काल जांच करवा सकते हैं। इसके अलावा अगर परिवार के सदस्यों को बीपी की समस्या है तो ऐसे लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

खाने में 3 ग्राम नमक घटाएं

फरीदाबाद के क्यूआरजी अस्पताल के डॉ. गजिंद्र गोयल ने बताया कि खाने में नमक का अधिक मात्रा में होना हाई बीपी होने का मुख्य कारण है। जो लोग पैक्ड फूड, रेस्तरां का खाना और फास्ट फूड के शौकीन हैं, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

डॉ. गोयल बताते हैं कि न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार अगर हम रोजाना खाने वाली चीजों से 3 ग्राम नमक घटाकर सेवन करें, तो सेहत में काफी सुधर आएगा। साथ ही इससे हृदय रोग, स्ट्रोक व हार्ट अटैक की आशंका एक तिहाई कम हो जाएगी।

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ऐसे करें बचाव

  • धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें।
  • हरी-सब्जियों और फलों का सेवन करें।
  • कम फैट वाले डेयरी प्रॉडक्ट्स को डायट में शामिल करें।
  • रोजना करीब एक घंटे तक व्यायाम करें।
  • भोजन में नमक की मात्रा कम रखें।
  • जिन लोगों के परिवार के सदस्यों को हाई बीपी की समस्या है, उन्हें नियमित रूप से बीपी चेक कराना चाहिए।
  • शरीर को ऐक्टिव रखें और अपना वजन घटाएं।
  • रोजाना मॉर्निंग वॉक या रनिंग की आदत डालें।
  • फैमिली के साथ अच्छा समय बिताएं। इससे आप हाइपरटेंशन और इससे होने वाली बीमारियों से दूर रह सकते हैं।

गर्मी में हीटस्ट्रोक से बचने के लिए ध्यान रखें जरूरी बातें

भीषण गर्मी में बच्चे सबसे ज्यादा हीट स्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं। बच्चों को गर्मी से होने वाली इस बीमारी से कैसे बचाया जाए, इस बारे में चिकित्सा विशेषज्ञों ने कई उपाय सुझाए हैं।

मुरादाबाद के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. एम. इरशाद के मुताबिक, 'इंसान के शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन होने की संभावना बढ़ जाती है। गर्मी में ज्यादा देर धूप में रहने से शरीर से अधिक मात्रा में पसीना निकलने के कारण पानी की कमी हो जाती है।

इससे सिरदर्द, थकान, सुस्ती, भूख का कम होना, बदन में ऐंठन, उल्टी होना, पेट में दर्द, जलन, दस्त होना, चक्कर आना साथ ही मानसिक संतुलन बिगड़ने जैसे हालात पैदा हो जाते हैं।'

पसीना न आए तो संभल जाएं

डॉ इरशाद ने कहा कि इंसान का शरीर 37 डिग्री तक तापमान सहन करने में सक्षम होता है। तापमान इससे ऊपर जाने पर शरीर में कई प्रकार की दिक्कत महसूस होने लगती है।

शरीर से पानी खत्म होने लगता है, खून गाढ़ा हो जाता है। लिहाजा जरूरी सावधानी न बरतने पर बच्चे बहुत जल्दी बीमारियों की गिरफ्त में आ जाते हैं।

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ऐहतियात बरतने की जरूरत

  • गर्मी में जितना हो सके बच्चों को कोल्ड ड्रिंक से दूर रखें
  • कोल्ड ड्रिंक की जगह शिकंजी का इस्तेमाल करें
  • साथ ही गुड़ को दही में मिलाकर खिलाएं
  • हीट स्ट्रोक से बचने के आयुर्वेदिक तरीके
  • गर्मी में फूड पॉइजनिंग होने की आशंका भी बढ़ जाती है इसलिए,
  • कटा हुआ फल न खरीदें
  • देर से रखा हुआ खाना न खाएं
  • बाहर खुले में बिकने वाले तले हुए खाद्य पदार्थ का सेवन न करें
  • जितना हो सके गर्मी में लिक्विड का सेवन करें
  • खुले में बिकने वाले जूस का सेवन भी घातक हो सकता है, उससे भी बचें
  • जरूरत पड़ने पर चिकित्सक से सलाह लें
  • धूप में बाहर निकलें तो सावधानी बरतें
  • चुस्त कपड़े की जगह ढीले कपड़े पहनें, ताकि शरीर में बाहर की हवा लगती रहे
  • सूती कपड़े पहनना ज्यादा बेहतर होगा। सिंथेटिक, पॉलिस्टर कपड़े पहनने से बचें
  • घर से बाहर निकलते समय खाली पेट न निकलें, अधिक देर भूखे रहने से बचें
  • घर से बाहर निकलते समय शिकंजी, ठंडा शर्बत या पानी पी कर निकलें साथ ही पानी की बोतल लेकर चलें
  • बहुत अधिक पसीना आने पर तुरंत ठंडा पानी न पिएं। सादा पानी पिएं। लस्सी का सेवन अधिक करें
  • गर्मी और लू से होने वाली बीमारियों से बचने के उपाय
  • भीषण गर्मी में बच्चों को स्कूल से लाने या ले जाने के समय...
  • तौलिए को पानी में भिगोकर उससे ढककर ले जाएं, जिससे बच्चे का बदन ठंडा रहे
  • छाते का इस्तेमाल भी बेहतर रहेगा
  • बच्चे को ऐसा कपड़ा पहनाएं, जिससे उसका शरीर पूरी तरह से ढका रहे
  • गहरे रंग के कपड़ों की जगह बच्चों को हल्के रंग या सफेद कपड़े ही पहनाएं
  • बच्चों के पेशाब का रंग चेक करते रहें, पेशाब पीला होने पर बच्चे को भरपूर पानी पिलाएं और जरूरी होने पर चिकित्सक से सलाह लें
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