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हार्ट अटैक और हार्ट फेल में क्या है अंतर, इन लक्षणों को कभी भी न करें नजरअंदाज

हार्ट अटैक (Heart Attack) हो या हार्ट फेल (Heart Fail), दोनों ही बहुत खतरनाक कंडीशन हैं। इनका ट्रीटमेंट और इनसे बचाव संभव है लेकिन इसके लिए दोनों में अंतर को समझते हुए जरूरी सावधानी बरतनी जरूरी है। इस बारे में विस्तार से जानिए।

हार्ट अटैक और हार्ट फेल में क्या है अंतर, इन लक्षणों को कभी भी न करें नजरअंदाज
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हार्ट अटैक (Heart Attack) हो या हार्ट फेल (Heart Fail), दोनों ही बहुत खतरनाक कंडीशन हैं। इनका ट्रीटमेंट और इनसे बचाव संभव है लेकिन इसके लिए दोनों में अंतर को समझते हुए जरूरी सावधानी बरतनी जरूरी है। इस बारे में विस्तार से जानिए। अधिकतर लोग हार्ट फेल होने और हार्ट अटैक को एक ही समझ लेते हैं। भले ही ये दोनों दिल से जुड़ी जानलेवा बीमारियां हैं, लेकिन दोनों में काफी फर्क है।

क्या है अंतर

हार्ट अटैक होने का मतलब होता है, दिल की मांसपेशियों का बहुत कमजोर होना, जबकि हार्ट फेल होने का मतलब होता है, अलग-अलग कारणों से दिल का सही ढंग से कार्य न कर पाना। हार्ट अटैक खून जमने की वजह से होता है यानी हार्ट अटैक की वजह होती है, ब्लड क्लॉटिंग। दरअसल, खून की नलियों में खून के जम जाने से हार्ट अटैक आता है। ब्लड क्लॉटिंग से खून के बहाव में रुकावट आती है और दिल तक खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाते। उसी के चलते हार्ट अटैक होता है। जबकि हार्ट फेल होने का कोई एक कारण नहीं होता। इसके कई अलग-अलग कारण और बीमारियां हो सकती हैं। मसलन, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, डायबिटीज, हाइपर टेंशन और दिल की दूसरी बीमारियां।

लक्षणों में अंतर

जब किसी को हार्ट अटैक होता है, तब उसके सीने में भयंकर दर्द होता है। दर्द के साथ-साथ जलन होती है। यह दर्द हाथ, गले और जबड़े में भी हो सकता है या सीने के साथ ही इन सभी जगहों में दर्द हो सकता है। साथ ही मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है। वॉमिटिंग और चक्कर भी आ सकता है। हार्ट फेल होने की स्थिति में अचानक कोई लक्षण नहीं प्रकट होते हैं। लेकिन काफी पहले से कुछ लक्षण प्रकट होने लगते हैं। जैसे-फेफड़ों में कंजेशन, एड़ियों, पैर या पेट में रह-रहकर लगातार होती सूजन, बहुत ज्यादा वजन बढ़ना, भूख न लगना, सांस लेने में धीरे-धीरे तकलीफ का बढ़ना जैसे लक्षण हार्ट फेल होने के संकेत हो सकते हैं।

ट्रीटमेंट का तरीका

दिल की इन दोनों बीमारियों के इलाज में भी अंतर होता है। हार्ट अटैक के बाद दिल को सामान्य बनाया जा सकता है। इसके लिए आर्टरी से ब्लॉकेज को हटाना होता है, जबकि हार्ट फेल होन के बाद दिल को सामान्य बनाना मुश्किल होता है। हालांकि अपनी जीवनशैली में आमूल-चूल परिवर्तन करके, दवाइयां और ऑपरेशन के जरिए इस बीमारी से भी पेशेंट्स उबर जाते हैं। अगर पूरी तरह से नहीं उबर पाते तो भी सालों जीते हैं।

बचाव के उपाय

अगर आंकड़ों की मानें तो भारत में हर साल 18 लाख लोग हार्ट फेल होने की समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती होते हैं और अगर पूरी दुनिया के आंकड़ों को देखें तो ऐसे लोगों की संख्या 14 से 21 करोड़ होती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इंसानी स्वास्थ्य के संबंध में हार्ट अटैक और हार्ट फेल होने की समस्याएं कितनी बड़ी और कितनी गंभीर हैं? हार्ट से संबंधित जब कोई बीमारी हो जाए तो उसमें घरेलू इलाज करने की कोशिश न करें, तुरंत डॉक्टर से मिलें। लेकिन इसके पहले तमाम उपायों से सीरियस कंडीशन आने से रोका जा सकता है।

अगर आपको ब्लड प्रेशर की समस्या है तो ब्लड ग्लूकोज को लगातार नियंत्रण में रखें। खासकर ऐसे लोग जिनके परिवार में पहले से ही यह बीमारी रही हो। हार्ट फेल की नौबत न आए इसके लिए हमेशा धूम्रपान, शराब से दूर रहें। नियमित रूप से मौसमी फल खाएं। साबुत अनाज खाएं। सोडियम और चीनी का सेवन कम करें। रोजाना लगभग 30 मिनट तक नियमित व्यायाम करें ताकि ब्लड सर्कुलेशन में सुधार हो और हृदय की गति स्वस्थ हो। वजन बढ़ने से रोकें।

अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर को 130 एमजी/डीएल तक रखने की कोशिश करें। हार्ट अटैक की आशंका को कम करने के लिए कम से कम तला खाना खाएं। अपने रोजमर्रा के तनाव को कम करें, अगर नहीं होता तो मनोवैज्ञानिक की सलाह लें। ब्लड प्रेशर को 120/80 एमएमएचजी के आस-पास रखें। हर दिन 15 से 20 मिनट तक ध्यान और हल्के योग व्यायाम जरूर करें। इससे काफी हद तक बचाव संभव है।

डॉ. माजिद अलीम

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