Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

हेल्दी लाइफ के लिए कहिए GOOD MORNING !

हेल्दी लाइफ के लिए ये उपाय करना होगा सबसे फायदेमंद।

हेल्दी लाइफ के लिए कहिए GOOD MORNING !
नई दिल्ली. हम सब ने इस नर्सरी राइम, अर्ली टू बेड एंड अर्ली टू राइज, मेक्स ए मैन हेल्दी वेल्दी एंड वाइज यानी जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने से व्यक्ति स्वस्थ, धनी और बुद्धिमान बनता है, को जरूर पढ़ा होगा। इस राइम में सुबह उठने के महत्व को बताया गया है। वैसे देखा जाए तो सुबह जल्दी जगने के इस महत्व को सभी धर्मों ने भी माना है। तभी तो कुछ धार्मिक क्रियाओं को इस तरह निर्धारित किया गया है कि उसके लिए सुबह उठना जरूरी है। भले ही सभी धर्मों और हमारे बड़े-बुजुगरें ने सुबह उठने के महत्व को माना हो, लेकिन आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल ने इसके महत्व को पूरी तरह नकार दिया है। इस लाइफस्टाइल की वजह से ही अधिकतर लोगों को यह तक याद नहीं है कि उन्होंने आखिरी बार सूरज को उगते हुए कब देखा था? सच तो यह है कि आज ज्यादातर लोगों का डेली रूटीन पूरी तरह बदल गया है। वे लोग पूरी रात जागकर काम करते हैं और सुबह होने के कुछ देर पहले सो जाते हैं। इनमें से कुछ लोगों की सुबह तो कभी-कभी अगले आधे दिन तक खिंच जाती है। यानी पूरे चौबीस घंटे जगने के बाद दूसरे दिन इनकी सुबह होती है। मजे की बात यह कि आज इस तरह की लाइफस्टाइल नॉर्मल मानी जाती है। लेकिन ऐसा करना, हमारी हेल्दी लाइफ के लिए बहुत हार्मफुल है।
क्या है सिरकाडियन रिद्म
भले ही आज की लाइफस्टाइल में सुबह उठना टफ लगता है, लेकिन सूरज उगने के साथ उठने का अपना महत्व है। दरअसल, सुबह-सुबह उठना प्रकृति के नियमों के साथ चलना है। साइंस कहता है कि नेचर का अपना एक स्पेसिफिक पैटर्न और रिद्म होता है, जो सूर्य पर निर्भर होता है। नेचर के इसी पैटर्न और रिद्म को हमारी बॉडी फॉलो करती है। यही कारण है कि जब भी हममें से कोई इस नियम को तोड़ता है, उसे हेल्थ रिलेटेड सीरियस प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़ता है। प्लांट्स और एनिमल्स की तरह हमारी बॉडी भी एक खास पैटर्न यानी टाइम टेबल और रिद्म का पालन करती है। इस रिद्म को सिरकाडियन रिद्म कहते हैं। यह एक बायलॉजिकल प्रोसेस है, जिसके तहत हमारी बॉडी 24 घंटे की इंटरनल क्लॉक के आधार पर अपनी एक्टिविटीज पूरी करती है। सिरकाडियन का अर्थ है एक पूरा दिन घूमना। इसलिए पूरे 24 घंटे यानी एक दिन के बायलॉजिकल प्रोसेस को सिरकाडियन रिद्म कहते हैं।
एन्वॉयरमेंटल क्यू
हमारी सिरकाडियन रिद्म, बाहरी संकेतों यानी एन्वॉयरमेंटल क्यू (जिटगेबर्स यानी नेचुरल क्लॉक) के अनुसार एडजस्ट होती है। इन जिटगेबर्स में सूर्य की रोशनी प्रमुख है। भले ही सिरकाडियन रिद्म रोशनी और अंधेरे के चक्रों से तालमेल बिठाती है और उससे ही सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। लेकिन यह दूसरे बाहरी संकेतों यानी एक्सटर्नल क्यू जैसे मील टाइम, टेंपरेचर, स्ट्रेस और एक्सरसाइज से भी प्रभावित होती है।
राइट मील साइकिल
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हमारी प्रेजेंट लाइफस्टाइल किस तरह हमारे सिरकाडियन रिद्म को प्रभावित करती है। आज हममें से ज्यादातर लोग डिनर हैवी लेते हैं और सुबह ऑफिस पहुंचने की जल्दी में ब्रेकफास्ट स्किप कर देते हैं। इस तरह हम अपने मील साइकिल यानी खाने के इस चक्र को पूरी तरह से उलट देते हैं। जबकि हमारी बायलॉजिकल क्लॉक यह कहती है कि डिनर लाइट होना चाहिए, क्योंकि रात में हमारी बॉडी का एनर्जी लेवल बहुत कम होता है, क्योंकि रात में हमें एनर्जी की कम जरूरत होती है। इस वजह से हमारा डाइजेशन बहुत स्लो हो जाता है। ऐसे में जब हम रात में हैवी डाइट लेते हैं तो उसका डाइजेशन सही तरीके से नहीं हो पाता है और वह फैट के रूप में हमारी बॉडी में जमा होने लगता है। इसलिए सिरकाडियन क्लॉक के अनुसार चलने का सबसे अच्छा तरीका है, सुबह बैलेंस्ड डाइट के साथ भर पेट ब्रेकफास्ट किया जाए।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, पूरी खबर-

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

Next Story
Top