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हेल्दी-लॉन्ग लाइफ के लिए रूटीन मेडिकल टेस्ट, जो रखेगा उम्रभर FIT

कुछ बेहद इंपॉर्टेंट मेडिकल रूटीन टेस्ट और उसे कराने की सही उम्र के बारे में।

हेल्दी-लॉन्ग लाइफ के लिए रूटीन मेडिकल टेस्ट, जो रखेगा उम्रभर FIT
नई दिल्ली.अवेयरनेस की कमी के कारण हमारे देश में ज्यादातर लोग रूटीन मेडिकल टेस्ट को महत्व नहीं देते हैं। ऐसा करना हेल्दी लाइफ के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि इसके जरिए इनिशियल स्टेज में ही किसी भी बीमारी का पता लग जाता है। इस तरह डेंजरस कंडीशन में पहुंचने से पहले ही उसका ट्रीटमेंट हम करा सकते हैं। जानिए, कुछ बेहद इंपॉर्टेंट मेडिकल रूटीन टेस्ट और उसे कराने की सही उम्र के बारे में।
कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके इनिशियल स्टेज में बाहरी तौर पर कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। जब इनके लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं और बीमारी का पता चलता है, तब तक पेशेंट की कंडीशन सीरियस हो चुकी होती है। यानी, बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। रूटीन मेडिकल चेकअप किसी भी बीमारी के सीरियस कंडीशन में पहुंचने से हमें बचाते हैं। इस तरह हम हेल्दी-लॉन्ग लाइफ जी सकते हैं।कोलेस्ट्रॉल स्नंग टेस्टकोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का फैटी एसिड है। यह दो प्रकार का होता है। एचडीएल या हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन और एलडीएल या लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन। एचडीएल को गुड कोलेस्टॉल कहते हैं, क्योंकि यह हार्ट को मजबूती प्रदान करता है और उसे बीमारियों से बचाता है। एलडीएल को बैड कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। इसका लेवल हाई होने से हार्ट डिजीज होने की संभावना बढ़ जाती है। हमारी बॉडी में कौन से कोलेस्ट्रॉल का लेवल कैसा है, इसे जांचने के लिए ही कोलेस्ट्रॉल स्नंग टेस्ट किया जाता है। यह टेस्ट बताता है कि हमारे हार्ट के बीमार होने के कितने पर्सेंट चांसेज हैं।

कब कराएं टेस्ट : कोलेस्ट्रॉल स्नंग टेस्ट की शुरुआत 20 साल की उम्र से कराना सही रहता है। हर पांच वर्ष में एक बार इस टेस्ट को जरूर करवाना चाहिए। लेकिन अगर इस टेस्ट में यह बात सामने आती है कि आपके ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का लेवल सामान्य से अधिक है या हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री है तो हर 6 से 12 महीने पर इस टेस्ट को कराना जरूरी होता है। बीपी टेस्टयह बहुत ही जनरल टेस्ट है। लेकिन हमारे हेल्थ के लिए रेग्युलर बीपी टेस्ट कराना बहुत जरूरी होता है। ऐसा करना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि हर पांच में से एक व्यक्ति का बीपी लेवल एबनॉर्मल होता है। अगर हमारी बीपी लेवल 140/90 से अधिक या कम होता है, तो इससे न सिर्फ हमारे हार्ट पर प्रेशर पड़ता है, बल्कि हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेल होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

कब कराएं टेस्ट : वैसे तो यह टेस्ट किसी भी उम्र में किया जा सकता है, लेकिन पंद्रह साल की उम्र से इसकी शुरुआत कर देना बेहतर रहता है। बीपी लेवल सामान्य रहने पर साल में एक बार इसकी जांच कराना सही रहता है, लेकिन अगर यह हाई या लो रहता है तो हर छह महीने में इसकी जांच करानी चाहिए। आई टेस्ट एंड विजन स्क्रीनिंग भले ही आपका विजन 6/6 हो यानी दूर और नजदीक की नजर एकदम सामान्य हो, फिर भी रेग्युलर आई टेस्ट कराना जरूरी है। आई टेस्ट के जरिए जहां आप्टिक नर्व, मोतियाबिंद, काला मोतिया आदि बीमारियों की जांच की जाती है, वहीं विजन स्क्रीनिंग टेस्ट में विजन यानी दृष्टि की जांच की जाती है। इस जांच में यह पता किया जाता है कि कहीं आपके दूर या पास की दृष्टि खराब तो नहीं हो गई है।

कब कराएं टेस्ट: इस टेस्ट को साल में एक बार जरूर करा लेना चाहिए। लेकिन जो डायबिटिक हैं, उन्हें हर 6 महीने में इस टेस्ट को करवाना चाहिए, क्योंकि डायबिटीज होने पर हमारी रेटिना प्रभावित होती है।

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