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हेल्दी बॉडी स्टेंडर्ड फिगर्स: नंबर के अनुसार जानें आप कितने सेहतमंद हैं

आप अपनी बॉडी को हेल्दी रखने के लिए कॉन्शस रहते हैं, यह अच्छी बात है। लेकिन इसके लिए आपको यह भी पता होना चाहिए कि हेल्दी बॉडी के स्टेंडर्ड फिगर्स क्या होते हैं। यहां आपको बता रहे हैं इससे जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां।

हेल्दी बॉडी स्टेंडर्ड फिगर्स: नंबर के अनुसार जानें आप कितने सेहतमंद हैं
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शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों के सही माप के साथ-साथ उन अंकों की जानकारी होना भी जरूरी है, जो स्वस्थ रहने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इन अंकों को उसके उसी स्तर तक बनाए रखना भी जरूरी है।

बोन डेंसिटी

अगर बोन डेंसिटी (हड्डियों का घनत्व) 0 से -1.5 के बीच है, तो यह सामान्य है। अगर यह -1.5 से -2.5 के बीच है, तो इसका अर्थ है कि आपको ऑस्टियोपीनिया है। यदि हड्डियों का घनत्व -2.5 से भी कम है तो ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार हैं। इसका अर्थ है कि हड्डियों का घनत्व औसत से कम होने पर जीवनशैली में सुधार लाने की जरूरत होती है। ऑस्टियोपोरोसिस से फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है और तब इलाज कराने की जरूरत होती है।

कोलेस्ट्रॉल लेवल

शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 5 एमएमओएल/एल से अधिक नहीं होना चाहिए। एमएमओएल/एल स्वास्थ्य को मापने की इकाई है। यदि किसी को दिल की बीमारियों का खतरा अधिक है, तो ज्यादा से ज्यादा 5 नंबर सुरक्षित माना जाता है। भारतीयों में यह स्तर औसतन 5.7 से 6.0 होता है, जो अधिक माना जाता है। जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो यह धमनियों की दीवारों में जमा हो जाता है। इससे दिल का दौरा होने का खतरा बढ़ जाता है।

ब्लड शुगर

अगर फास्टिंग में ब्लड ग्लूकोज (शुगर) का स्तर 100 एमजी/डीएल यानी 5.6 एमएमओएल/एल है तो उसे नॉर्मल मानते हैं। 109 एमजी/डीएल यानी 6.1 एमएमओएल/एल से अधिक चला जाता है, तो यह इस बात का संकेत है कि आपका शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा में परिवर्तित नहीं कर रहा है, जैसा कि इसे करना चाहिए।

यानी आप प्रीडायबिटिक हैं। फास्टिंग में ब्लड टेस्ट कराने का मतलब है कि टेस्ट कराने के कम से कम 8 घंटे पहले तक कुछ खाया ना हो। यह इस बात का सूचक है कि डायबिटीज होने का खतरा बढ़ गया है। यदि स्तर 6.1 और 6.9 एमएमओएल/एल के बीच है, तो इसे आईजीटी या इंपेयर्ड ग्लूकोज टोलरेंस कहते हैं, जिसका अर्थ है कि दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा भी थोड़ा ज्यादा बढ़ गया है।

कमर का आकार

अगर कमर का साइज 32 इंच से अधिक है, तो इससे दिल की बीमारियां, स्ट्रोक और डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। साइज 32 इंच से जितना अधिक होगा, खतरा भी उतना अधिक होगा। ऐसा समझा जाता है कि कमर पर फैट बढ़ना, उस हिस्से के अंगों जैसे लिवर के लिए अच्छा नहीं होता।

इस तरह के अंगों पर चरबी चढ़ने से उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है और इनमें से ऐसे रसायन निकलते हैं, जो शरीर के इंसुलिन सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

दिल की धड़कन

दिल की धड़कन भी आपके स्वास्थ्य का हाल बताती है। हाल ही में की गई रिसर्च से पता चलता है कि आराम करते समय दिल की धड़कन के 90 बीपीएम (बीट्स पर मिनट) से अधिक होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन 62 से 85 के बीच के अंक को सामान्य समझा जाता है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल का स्तर, वजन और फिटनेस आदि सभी इसके महत्वपूर्ण कारण माने जाते हैं।

ब्लड प्रेशर

ब्लड प्रेशर 140/85 से अधिक हो तो चिकित्सक से मिल कर फिजिकल चेकअप करवा लेना चाहिए। अगर ब्लड प्रेशर की रीडिंग इससे कम आए, तो दिल की बीमारियों और स्ट्रोक होने का खतरा कम होता है। यदि किसी को हार्ट अटैक, स्ट्रोक, दिल की बीमारी या डायबिटीज है, तो यह स्तर किसी भी सूरत में बढ़ने नहीं देना चाहिए। यदि हाई ब्लड प्रेशर का इलाज ना किया जाए, तो इससे गुर्दे की बीमारी, डिमेंशिया और आंखों की समस्याएं भी हो सकती हैं।

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