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इंफर्टिलिटी को दूर करने में मददगार है योगाभ्यास

Infertility Removing : नियमित योगाभ्यास से हम मानसिक, शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। साथ ही इसकी मदद से कई तरह की बीमारियां भी दूर होती हैं। इंफर्टिलिटी को दूर करने में भी नियमित योगाभ्यास कारगर है। जानिए, इंफर्टिलिटी की समस्या दूर करने में कौन-कौन से योगासान कारगर हैं।

इंफर्टिलिटी को दूर करने में मददगार है योगाभ्यास

Infertility Removing:मां बनना हर स्त्री के लिए अनोखा अनुभव होता है। लेकिन आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी और व्यस्त जीवनशैली के चलते महिलाएं कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में आ जाती हैं। वे टेंशन, डिप्रेशन की भी शिकार हो जाती हैं। इसके चलते कई महिलाओं को इंफर्टिलिटी की समस्या भी हो जाती है। यह उनके लिए बहुत पीड़ादायक होता है। लेकिन अपनी जीवनशैली को सुधारने, सही इलाज करवाने के साथ वह नियमित कुछ योगाभ्यास करें तो इंफर्टिलिटी की समस्या को दूर कर सकती हैं।




भ्रामरी प्राणायाम

यह इंफर्टिलिटी के एक बड़े कारण तनाव और चिंता से राहत पहुंचाने वाला प्राणायाम है। सुबह के समय इसके नियमित अभ्यास से तन-मन रिलैक्स हो जाता है और गर्भधारण की संभावना को बढ़ाने में मददगार है। इसे करने के लिए सुखासन या पद्मासन मुद्रा में सीधे बैठ जाएं। अपनी आंखें बंद कर लें। कोहनियां मोड़ कर हाथों को कानों के कार्टिलेज के पास ले आएं।

अपने हाथों के अंगूठों से दोनों कान बंद कर लें। अपने दोनों हाथों की पहली अंगुली को आंखों की भौहों के थोड़ा-सा ऊपर लगाएं और बाकी तीनों अंगुलियां आंखों और नाक के आस-पास रखें। नाक के आस-पास रखी तीनों अंगुलियों से नाक को धीरे से दबाएं। मुंह बिल्कुल बंद रखें और नाक के माध्यम से अंदर सांस लें।

फिर नाक के माध्यम से ही गुनगुनाते हुए धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। इस आसन में सांस अंदर लेने का समय करीब 3-5 सेकेंड और बाहर छोड़ने का समय 10-15 सेकेंड का होना चाहिए। भ्रामरी प्राणायाम शुरू में 6-7 बार करें। धीरे-धीरे इसे बढ़ा भी सकती हैं।



पश्चिमोत्तानासन

यह आसन पीठ के निचले हिस्से, कूल्हे और जांघों की मसल्स को रिलैक्स करता है। यह आसन गर्भाशय से जुड़े अंगों को मजबूती प्रदान करता है। तनाव कम करगर्भधारण में मदद करता है। इस आसन को करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाकर सीधे बैठें। पैरों की अंगुलियां आपकी तरफ मुड़ी हों। गहरी सांस लेते हुएदोनों हाथ सिर के ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए कूल्हों के जोड़ से आगे झुकें।

अपनी रीढ़ को सीधा रखते हुए अपने पंजों को छुएं। अगर आपके हाथ पंजोंतक नहीं पहुंचते तो पैरों पर रखें। अगर पंजों को पकड़कर खींच सकें तो आगे झुकने में मदद मिलेगी और सिर से घुटने को छूने की कोशिश करें।

इस स्थिति में1-2 मिनट रहें। फिर गहरी सांस लें, धीरें से सिर उठाएं जिससे रीढ़ की हड्डी में खिंचाव हो। धीरे-धीरे अपनी पहले वाली स्थिति में वापस आ जाएं। सांस छोड़ते हुए हाथों को नीचे ले आएं। यह प्रक्रिया 2-3 बार करें। ध्यान रहे जबरदस्ती पैरों के पंजे छूने या घुटनों को छूने की कोशिश न करें।




सुप्त बद्धकोणासन

यह आसन आंतरिक जांघ और कमर की मसल्स को आराम देता है। आईवीएफ, मासिक धर्म की अनियमितता, इसमें होने वालीं ऐंठन, सूजन और दर्द में राहतपहुंचाता है। प्रजनन प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं को दूर करता है। तनाव और डिप्रेशन कम करने में भी मदद करता है। हाथ का सहारा लेकर जमीन पर पीठके बल सीधा लेट जाएं।

जरूरत हो तो अपनी गर्दन के नीचे तकिया रख लें, इससे गर्दन को आराम मिलेगा। फिर दोनों हाथों और पैरों को बाहर की तरफ फैलाएं।हाथों की हथेलियां ऊपर की ओर रखें। घुटनों को मोड़ लें और पैरों के तलवों को जमीन पर रखें, दोनों एड़ियों को मिलाएं। 10 मिनट तक इस मुद्रा में रहें। सांसनॉर्मल तरीके से लेते रहें। अपने हाथों की मदद से जांघों को एक साथ दबाएं। एक तरफ मुड़ें और धीरे-धीरे उठ जाएं। यह आसन दिन में दो बार कर सकते हैं।




भुजंगासन

कोबरा पोज या भुजंगासन प्रजनन क्षमता में सुधार करने वाले आसनों में से एक है। महिलाओं को तनाव मुक्त होने, उनमें होने वाले हार्मोनल डिसबैलेंस को ठीककरने में मदद करता है। अंडाशय और गर्भाशय में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, अधिक मात्रा में फ्ल्यूड उत्पादन करता है, जिससे गर्भधारण प्रक्रिया में आसानीहोती है।

इस आसन को करने के लिए जमीन पर पेट के बल लेट जाएं। हथेली को कंधे की सीध में रखें। पैरों को साथ-साथ रखें और पैर तने हुए होने चाहिए।सांस लें और अपने पैरों, हाथों और कूल्हों को नीचे की ओर धकेलते हुए शरीर के अगले हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं।

ध्यान रखें कि कमर पर ज्यादा खिंचाव नआए। इस अवस्था में सांस रोक कर आधा मिनट रहें। सांस छोड़ते हुए पहली अवस्था में आ जाएं। शुरू में यह आसन 2-3 बार करें। धीरे-धीरे करने का समय बढ़ाते जाएं।

लेखिका - रजनी अरोड़ा

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