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योग दिवस 2019 : योग गुरु मोहन कार्की ने बताया कैसे करें कम समय में अच्छा योगाभ्यास और किस योग से मिलेगा कौनसा लाभ

Yoga Day 2019: नियमित योगाभ्यास हमारे शारीरिक ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी है। लेकिन बहुत से लोग इन्हें केवल इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि योगाभ्यास करने में बहुत समय लगता है। हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे योगासनों के बारे में, जो बहुत लाभकारी हैं और जिन्हें करने में आपको ज्यादा समय भी नहीं लगेगा।

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Yoga Day 2019: आज के समय में बहुत-सी महिलाएं सिर्फ गृहस्थी नहीं संभालतीं, बल्कि नौकरी भी करती हैं। लेकिन घर और बाहर की जिम्मेदारियों का निर्वहन सही तरह से करने के दबाव में वे स्वयं की सेहत का ध्यान नहीं रख पाती हैं। दरअसल, कामकाजी महिलाओं के पास इतना समय ही नहीं होता कि वे अपना ख्याल रख सकें। अगर आप भी इस स्थिति का सामना कर रही हैं तो आप कम समय में भी कुछ योगासनों का नियमित अभ्यास करके स्वयं को स्वस्थ रख सकती हैं।




सूर्य नमस्कार

बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के लिए काफी लाभकारी है। चाहे आपको वजन कम करना हो या पाचनतंत्र बेहतर बनाना हो, चिंता दूर करनी हो या अन्यस्वास्थ्य समस्या को दूर करने में सूर्य नमस्कार सहायक है। अगर आपके पास इतना समय नहीं है कि आप कई तरह के योगासन कर सकें तो सूर्य नमस्कार काअभ्यास ही आपके लिए लाभदायक रहेगा। आप इसके सभी आसन दस से पंद्रह मिनट में कर सकती हैं। इसमें 12 अवस्थाएं होती हैं, इन्हें क्रमानुसार किया जानाचाहिए।

प्रणामासन

इसके लिए सर्वप्रथम सीधे खड़े होकर छाती को चौड़ा करें और मेरूदंड को खींचें। एड़ियां मिली हुई हों और दोनों हाथ छाती के मध्य में नमस्कार की स्थिति में जुड़े हो, गर्दन तनी हुई और नजर सामने हो। इस स्थिति में आराम से श्वांस लें और इस मुद्रा में कुछ क्षण रुकें।

हस्तउत्तानासन

प्रणामासन कुछ क्षण करने के बाद सांस को धीरे से अंदर खींचते हुए हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं और हथेलियों को मिलाए रखें। अब जितना ज्यादा हो सके, कमर को पीछे की ओर मोड़ते हुए अर्धचंद्रकार बनाएं। जितनी देर संभव हो, श्वांस को रोकने का प्रयास करें। यह आसन फेफड़ों के लिए काफी अच्छा होता है।

उत्तानासन या पादहस्तासन

अब श्वांस छोड़ते हुए और कमर को आगे झुकाते हुए दोनों हाथों से अपने पंजों को पकड़ें। इस दौरान पैरों को जितना ज्यादा हो सके, सीधा रखें और नीचे झुकने की कोशिश करें।

अश्वसंचालन आसन

पादहस्तासन के बाद श्वांस भरते हुए दोनों हाथों को मैट पर रखें और नितंबों को नीचे करें। सीधे पैर को खींचते हुए जितना ज्यादा हो सके,पीछे की ओर रखें। अब पैर को सीधा मैट के ऊपर रखें और वजन पंजों पर रखें। आप चाहें तो घुटना मोड़कर भी मैट पर रख सकते हैं। अब ऊपर देखते हुए गर्दनपर खिंचाव को महसूस करें। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मददगार है।

संतोलनासन या दंडासन

अब धीरे-धीरे श्वांस छोड़ें और बाएं पैर को पीछे लेकर जाएं। इस दौरान हाथों को सीधा कंधों की चौड़ाई के बराबर मैट पर रखें। अब कूल्हे की तरफ से स्वयं को ऊपर उठाएं। इस पोज में आपका शरीर उल्टे वी के समान दिखाई देगा। इस समय आपका पेट अंदर और कसा हुआ हो और नाभि अंदर मेरूदंड की तरफ खिंची हुई हो। यह आसन पेट को मजबूत बनाता है।





अष्टांग नमस्कार

संतोलनासन के बाद श्वांस को रोकते हुए दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़ें। अब दोनों घुटनों और छाती को मैट पर लगाएं। दोनों कोहनियों को छाती के नजदीक लाएं। अब छाती, दोनों हथेलियों, पंजे और घुटने जमीन पर छूने चाहिए और शेष अंग हवा में हों। कुछ देर इस अवस्था में रहें।

भुजंगासन

अष्टांगासन के बाद मैट पर पेट के बल लेट जाएं। अब श्वांस लेते हुए कोहनियों को कसें। अब छाती को ऊपर की ओर उठाएं और कंधों को पीछे की तरफ कसें। लेकिन घुटनों और पंजों को मैट पर देखें। इस दौरान आपकी दृष्टि ऊपर की ओर होनी चाहिए।

पर्वतासन या अधोमुखासन

भुजंगासन के बाद धीरे से श्वांस छोड़ते हुए पंजों को अंदर करें, कमर को ऊपर की ओर उठाएं और हथेलियों, पंजों को मैट पर रखें। इस दौरान एड़ियां मैट पर रहें। ठुड्डी को नीचे की ओर करें।

पादहस्तासन:

अब श्वांस छोड़ते हुए, कमर को आगे झुकाते हुए दोनों हाथों से अपने पंजों को पकड़ें। इस दौरान पैरों को जितना ज्यादा हो सके, सीधा रखें। अब दोनों पैरों को मजबूती से पकड़कर नीचे झुकने की कोशिश करें।

शवासन

सूर्य नमस्कार के बाद सारी ऊर्जा को वापस संरक्षित करने और खुद को विश्राम देने के लिए तीन से पांच मिनट के लिए शवासन करें। शवासन करने के लिए पहले आप किसी शांत जगह पर आसन बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं और दोनों हाथों को शरीर से कम से कम 5 इंच की दूरी पर करें। इस दौरान दोनों पैरों के बीच में भी कम से कम 1 फुट की दूरी रखें। ध्यान रहे हथेलियों को आसमान की तरफ रखें और हाथों को ढीला छोड़ दें। आंखें बंद कर लें और धीरे-धीरे शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें। अब अपना पूरा ध्यान अपनी सांसों पर केंद्रित करें। करीबन दो से तीन मिनट बाद वापस चेतना में आ जाएं।




ओम उच्चारण

शवासन के बाद करीब दस से पंद्रह मिनट प्राणायाम करना अच्छा माना जाता है। इसकी शुरुआत आप ओम (चैंटिंग) उच्चारण से करें। इसके लिए आप किसी भी आसन में बैठ जाएं और आंखें बंद करके ओम का जाप करें।

कपालभाति

कपालभाति प्राणायाम कई बीमारियों को दूर करने में कारगर है। इसका अभ्यास करने के लिए आप सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन या ध्यान मुद्रा में बैठें। अब शरीरको ढीला छोड़ें और सांसों को बाहर की तरफ तेजी से छोड़ें। इस अवस्था में आपका पेट अंदर की तरफ जाएगा। ध्यान रखें, कपालभाति में सांस को अंदर नहीं खींचना होता, बस बाहर की ओर फेंकना होता है। आप इस अभ्यास को लगातार 30 से 40 बार करें। इसके बाद धीरे-धीरे इसकी गिनती और समय बढ़ाएं।

नाड़ी शोधन प्रणायाम

नाड़ी शोधन प्राणायाम शरीर की अशुद्धियों को दूर करने में सहायक है। इसे अनुलोम-विलोम भी कहा जाता है। सबसे पहले किसी भी आसन में सीधा बैठें। अब दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका बंद कर पूरी श्वांस बाहर निकालें। अब बाईं नासिका से श्वांस को भरें, तीसरी अंगुली से बाईं नासिका को भी बंद कर आंतरिक कुंभक करें। जितनी देर स्वाभाविक स्थिति में रोक सकते हैं, रोकें। फिर दायां अंगूठा हटाकर श्वांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें और 1-2 क्षण बाह्य कुंभक करें। फिर दाईं नासिका से गर्दन उठाकर श्वांस को रोकें, फिर बाईं नासिका से धीरे से निकाल दें।

भ्रामरी प्रणायाम

इस प्रणायाम को करने के लिए सबसे पहले एक स्वच्छ और समतल जगह पर चटाई बिछाकर उस पर पद्मासन या सुखासन की अवस्था में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर अपने कंधों के समांतर ले जाएं। इसके बाद दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर अपने कानों के पास लाएं। अब अपने दोनों हाथों के अंगूठों से अपने दोनों कानों को बंद कर लें। दोनों हाथों की तर्जनी अंगुली को माथे पर और मध्यमा, अनामिका और कनिठिष्का अंगुली को आंखों के ऊपर रखना हैं। अब अपना मुंह बिल्कुल बंद रखें और अपने नाक के माध्यम से सामान्य गति से सांस अंदर लें। फिर नाक के माध्यम से ही मधुमक्खी जैसी आवाज करते हुए सांस बाहर निकालें। ध्यान रहे कि सांस बाहर निकालते हुए 'ओम' का उच्चारण करें। अब इस क्रिया को 5-7 बार दोहराएं।


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