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World No Tobacco Day Theme 2019 : वर्ल्ड नो टोबेको डे थीम और वर्ल्ड नो टोबेको डे अवेयरनेस- नपुंसक से लेकर कैंसर तक हो सकता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) लोगों में जागरूकता लाने के लिए वर्ल्ड नो टोबैको डे (World No Tabacco Day 2019) यानी तंबाकू निषेध दिवस 31 मई (31 May) को मनाता है। इस वर्ष की थीम 'तंबाकू और लंग कैंसर' (World No Tobacco Day Theme 2019) रखी गई है। हम में से अधिकतर लोग तंबाकू और धूम्रपान के शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानते हैं लेकिन इसकी अनदेखी करते हैं। टोबैको का सेवन किसी भी रूप में किया जाए, यह शरीर के लिए बेहद हार्मफुल है। इससे कैंसर होने की संभावना तो बढ़ती ही है, पुरुषों और महिलाओं की फर्टिलिटी पावर पर भी बैड इफेक्ट पड़ता है। इसलिए तंबाकू से होने वाली बीमारियों से सावधान (world no tobacco day awareness) रहना जरूरी है।

World No Tobacco Day Theme 2019 : वर्ल्ड नो टोबेको डे थीम और वर्ल्ड नो टोबेको डे अवेयरनेस- नपुंसक से लेकर कैंसर तक हो सकता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) लोगों में जागरूकता लाने के लिए वर्ल्ड नो टोबैको डे (World No Tabacco Day 2019) यानी तंबाकू निषेध दिवस 31 मई (31 May) को मनाता है। इस वर्ष की थीम 'तंबाकू और लंग कैंसर' (World No Tobacco Day Theme 2019) रखी गई है। हम में से अधिकतर लोग तंबाकू और धूम्रपान के शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानते हैं लेकिन इसकी अनदेखी करते हैं। टोबैको का सेवन किसी भी रूप में किया जाए, यह शरीर के लिए बेहद हार्मफुल है। इससे कैंसर होने की संभावना तो बढ़ती ही है, पुरुषों और महिलाओं की फर्टिलिटी पावर पर भी बैड इफेक्ट पड़ता है। इसलिए तंबाकू से होने वाली बीमारियों से सावधान (world no tobacco day awareness) रहना जरूरी है।

तंबाकू से कैंसर

  1. दिल्ली के धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के सर्जिकल ओंकोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. अंशुमन कुमार के अनुसार तंबाकू के सेवन के बारे में दो तरह के यूजर्स के बारे में हम जानते हैं, एक्टिव स्मोकर, पैसिव स्मोकर और इसी कड़ी में तीसरी श्रेणी आती है, 'थर्ड हैंड स्मोकर्स' की।
  2. थर्ड हैंड स्मोकिंग दरअसल सिगरेट के अवशेष हैं, जैसे राख, सिगरेट बट और जिस जगह तंबाकू सेवन किया गया है, वहां के वातावरण में उपस्थित धुएं के रसायन। बंद कारें, घर के फर्नीचर, बैठक आदि नहीं चाहते हुए भी थर्ड हैंड स्मोकिंग एरिया बन जाते हैं।
  3. नोएडा के जेपी हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर-सर्जिकल ओंकोलॉजी, डॉक्टर आशीष गोयल के अनुसार तंबाकू का असर केवल लंग कैंसर तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके अलावा मुंह का कैंसर, फूड पाइप कैंसर होना भी इसी कड़ी में शामिल हैं।


तंबाकू छोड़ने का तरीका

उचित इलाज के साथ तंबाकू की लत को छोड़ा जा सकता है। किसी भी लत को अपनाना या छोड़ना इंसान के अपने दृढ़ संकल्प पर है। व्यक्ति चाहे तो वह इस लत से छुटकारा पा सकता है। कुछ तरीके आपकी सहायता अवश्य कर सकते हैं।

निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी: यह थेरेपी पैच के रूप में भी जानी जाती है। इसमें एक छोटा सी पट्टी की तरह स्टीकर/ पैच होता है उसको उपयोगकर्ता के हाथ या पीठ पर लगाया जाता है। पैच शरीर में निकोटिन की छोटी खुराक पहुंचाता है, जो धीरे-धीरे लत छुड़ाने में मदद करता है।

निकोटिन गम: निकोटिन गम धूम्रपान और तंबाकू चबाने की लत को छुड़ाने में उपयोगकर्ताओं की मदद करता है।

स्प्रे या इनहेलर: निकोटिन स्प्रे और इनहेलर भी तंबाकू और सिगरेट की लत छुड़ाने में निकोटिन की कम खुराक देकर मदद करता है।

मनोवैज्ञानिक उपचार: तंबाकू नशा उन्मूलन के प्रबंधन हेतु बहुत सारी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। कुछ तंबाकू उपयोगकर्ताओं को हिप्नोथेरेपी, संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी या न्यूरो भाषाई प्रोग्रामिंग जैसे तरीकों से तंबाकू की लत छुड़ाने में सफलता मिली है।


फर्टिलिटी पर पड़ता है बैड इफेक्ट

धूम्रपान या तंबाकू का सेवन न केवल कैंसर का कारण बनता है, यहां तक कि पुरुषों और महिलाओं की रिप्रोडक्टिव पावर को भी नुकसान पहुंचाता है। हाल के शोध से पता चला है कि महिलाओं में धूम्रपान का एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से संबंध हो सकता है और इसके कारण फैलोपियन ट्यूब में समस्या आ सकती है।

यह महिलाओं में इनफर्टिलिटी की संभावना को 60 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। इसके कारण यूटेरस में परिवर्तन आ सकता है और कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। सिगरेट में मौजूद रसायन अंडाशय के भीतर एंटीऑक्सीडेंट स्तर में असंतुलन पैदा कर सकते हैं।

यह असंतुलन निषेचन को प्रभावित कर सकता है और स्पष्ट है कि इसके बाद इम्प्लांटेशन में कमी आ जाएगी। तंबाकू का पुरुषों की फर्टिलिटी पर भी भारी दुष्प्रभाव पड़ता है। यह रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है।

यह शुक्राणु को नुकसान पहुंचाता है जिसके कारण निषेचन की संभावना कम हो जाती है। आईवीएफ भी प्रजनन क्षमता पर धूम्रपान के दुष्प्रभाव को पूरी तरह से काबू पाने में सक्षम नहीं हो सकता है।

(डॉ. शिल्पा पवार गायनेकोलॉजिस्ट-आईवीएफ एक्सपर्ट, इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल, रायपुर)

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