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World Laughter Day 2019 : 'लाफ्टर डे' का इतिहास, सबसे मजाकिया देश और लाफ्टर थेरेपी क्या है, जानें सबकुछ

World Laughter Day 2019 : हंसी किसी भी रूप में आए, शरीर और मन के लिए फायदेमंद होती है। कई वैज्ञानिक शोधों से भी यह प्रमाणित हो चुका है। यही वजह है कि पूरी दुनिया में लाफ्टर थेरेपी और लाफ्टर योगा की पॉपुलैरिटी बढ़ रही है।

World Laughter Day 2019 :

World Laughter Day 2019 : कभी मॉर्निंग वॉक के दौरान आपने देखा होगा कि कुछ लोग पार्क में जमकर ठहाके लगा रहे हैं। जबकि उनके इर्द-गिर्द आपको हंसने की कोई खास वजह नजर नहीं आएगी। आप इन्हें सिरफिरा समझने की भूल करें, इससे पहले जान लें कि दरअसल, ये लोग 'लाफ्टर थेरेपी' कर रहे हैं। बड़े शहरों ही नहीं छोटे कस्बों और गांवों में भी हेल्थ कॉन्शस लोग लाफ्टर थेरेपी का खूब लाभ उठा रहे हैं।

ऐसे हुई शुरुआत

भारत में लाफ्टर थेरेपी की शुरुआत डॉ. मदन कटारिया द्वारा 13 मार्च 1995 से हुई। इस दिन उनके साथ सिर्फ 5 लोग थे। लेकिन इसे इतनी ज्यादा सफलता मिली कि तब से अब तक दुनिया भर में 7,000 से ज्यादा लाफ्टर क्लब और उनके हजारों सदस्य बन चुके हैं। इसी के चलते हर साल मई के पहले रविवार को 'वर्ल्ड लाफ्टर डे' भी मनाया जाता है।

थेरेपी बनाम योग

लाफ्टर योग, लाफ्टर थेरेपी का थोड़ा उन्नत रूप है। डॉ. मदन कटारिया द्वारा शुरू किया गया लाफ्टर योग आज विश्वभर में पॉपुलर हो चुका है। उनका कहना है कि हंसने के लिए आपको किसी प्रकार की कॉमेडी, ह्यूमर या जोक की जरूरत नहीं। आप इसे एक एक्सरसाइज के रूप में करने की आदत डालें।

इसके लिए आपका खुश रहना भी जरूरी नहीं। जब आप किसी को देखते हुए हंसते हैं और उसकी नजरें आप से मिलती हैं तो उसे भी हंसी आ जाती है। इस प्रकार हंसी संक्रामक होती है। विश्व के 60 देशों मंस 600 लाफ्टर योग केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं।

अमेरिका में भी यह संस्थान साल 2004 में स्थापित किया गया। 'लाफ्टर थेरेपी' के तहत बिना किसी खास वजह के लगभग दो मिनट तक दिल खोल कर हंसा जाता है, जबकि 'लाफ्टर योगा थेरेपी' नियमित अंतराल पर सामान्य श्वांस व्यायाम और उत्तेजित हंसी का एक मिला-जुला रूप होता है।

क्या है लाफ्टर थेरेपी

'लाफ्टर थेरेपी-हाउ टू लाफ अबाउट एवरीथिंग इन योर लाइफ दैट इस नॉट रियली फनी'की लेखिका एनेटगुडहर्ट कहती हैं, 'हंसी एक प्रकार के परिशोधन की प्रक्रिया है, जो भावनाओं की केमिस्ट्री को संतुलित करती है। यह हीलिंग के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।'

उनकी इस थ्योरी की, हंसी के फायदों पर किए गए कई शोधों से पुष्टि हो चुकी है। जापान के जेनेटिक विशेषज्ञ काजुओ मुराकामी ने अपने शोध में पाया कि लाफ्टर थेरेपी एक प्रभावशाली, कम खर्च वाला मेडिकल ट्रीटमेंट है, जो सेहत पर होने वाले खर्च को कम कर सकता है।

न्यूरोसाइंटिस्ट जोडी डेलूसा कहते हैं, 'इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप क्यों हंसते हैं। आप दिन भर में कई बार छोटे-छोटे टुकड़ों में भी हंस लेते हैं तो आपके जीवन की गुणवता में सुधार आ जाता है। आप हंसी के माध्यम से लोगों के मन में पॉजिटिव फीलिंग ला सकते हैं।'

हंसी दिमाग को खोलती है और सृजनात्मकता को बढ़ावा देती है। अमेरिकी मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक विलियम जेम्स ने कहा था, 'हम सब इसलिए नहीं हंसते क्योंकि हम खुश हैं बल्कि हम इसलिए खुश हैं क्योंकि हम हंसते हैं।

सबसे कॉमन ह्यूमर

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के समाजशास्त्री क्रिस्टी डेविस बताते हैं कि दुनिया भर में सबसे कॉमन ह्यूमर (मजाक) है, दूसरों की गलती पर हंसना। किसी के मुंह से कोई गलत बात निकल जाने पर उसका मजाक बनाने की आदत दुनिया भर के लोगों में पाई जाती है।

यूएसए की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर में ह्यूमर रिसर्च लैब के निदेशक और चर्चित लेखक पीटर मैकग्रा कहते हैं, 'स्लैपस्टिक यानी दूसरे की मिमिक्री करना, उसके बोलने-चालने के तरीके में कमी ढूंढ़ना आदि दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रचलित और लोकप्रिय मजाक का तरीका है। बस, आपको इसके लिए सही शिकार तलाशने की जरूरत है, जिसका आप मजाक उड़ा सकें।'

सबसे मजाकिया देश

इंग्लैंड के लोगों को काफी मजाकिया माना जाता है। यहां दुनिया की कई मशहूर और लोकप्रिय कॉमेडी रची गई हैं और कॉमेडियंस हुए हैं। भारत के कुछ राज्यों में मजाक की आदत ज्यादा पाई जाती है जिनमें प. बंगाल, पंजाब और केरल का नाम शीर्ष पर आता है। किसी-किसी सर्वे में अमेरिकी भी दुनिया के सबसे मजाकिया लोग माने गए हैं।

यूनाइटेड स्टेट्स का मजाक अपरिपक्व और जरा बोरिंग किस्म का माना जाता है, जबकि आयरलैंड के नागरिकों को खिलंदड़ और जिंदादिल माना गया है। आयरलैंडवासी अजनबियों से परिचय बढ़ाने के लिए भी मजाक से शुरुआत करते हैं। स्पेन वासी भी सेंस ऑफ ह्यूमर के मास्टर माने जाते हैं। ग्रीस के लोगों को इस मामले में बेहद ठंडा माना गया है।

ऑस्ट्रेलिया के लोगों को तीखे मजाक करने का शौक होता है। फिलीपींस के लोग तमाम कुदरती आपदाओं के बावजूद खूब मजाकिया होते हैं। स्कॉटलैंड के लोग व्यंग्यात्मक मजाक करते हैं और तमाम तीखे मजाक के बावजूद वे इसे कभी गंभीरता से नहीं लेते।

इन्हें इंग्लैंड वासियों की तरह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मजाकियों में गिना जाता है, जबकि जर्मनवासी गंभीर नागरिक माने जाते हैं। इन्हें दुनिया का बसे कम हंसोड़ इंसान माना जाता है। एक ऑनलाइन सर्वे के मुताबिक दुनिया के दस सबसे मजाकिया लोगों के देश में शामिल हैं-अमेरिका, स्पेन, इटली, ब्राजील, फ्रांस, मैक्सिको, ब्रिटेन, पुर्तगाल, रूस, बेल्जियम।

लेखक - शिखर चंद जैन

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