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World Laughter Day 2019 : विश्व हास्य दिवस पर जानें हंसने के फायदे

World Laughter Day 2019 : हाल के वर्षों में हम तकनीकी रूप से जितना एक-दूसरे से कनेक्ट हुए हैं, भावनात्मक रूप से उतने ही दूर। लोगों का मिलना-जुलना और संवाद कम हुआ है तो हंसने-हंसाने के मौके भी खत्म होते जा रहे हैं। नतीजा नैसर्गिक हंसी के अनुपम उपहार से हम वंचित हो रहे हैं। हास्य दिवस इसी उपहार को एक-दूसरे को बांटने का मौका देता है। आइए, इस अवसर पर हम न केवल कुदरत की इस नियामत का महत्व समझें, बल्कि इसे अपने जीवन में शामिल भी करें।

World Laughter Day 2019 : विश्व हास्य दिवस पर जानें हंसने के फायदे

World Laughter Day 2019 : आधुनिक जीवनशैली में तकनीकी विकास ने हमें बहुत सारी चीजें दी हैं, बहुत-सी सुविधाएं प्रदान की हैं। लेकिन बहुत कुछ छीन भी लिया है। इनमें हंसी और खुशी भी शामिल हैं। तमाम भौतिक संसाधनों और सुख-सुविधाओं ने जीवन को आरामदेह और आसान तो बना दिया लेकिन हमसे हमारा वक्त, खुशियां और मुस्कराहटें छीन लीं।

हम अपने आस-पास देख सकते हैं कि बहुतों के पास पैसा तो है लेकिन वे चाहकर भी उस पैसे से एक मुस्कान नहीं खरीद पा रहे हैं, क्योंकि हंसी-खुशी का संबंध धन-दौलत से नहीं होता। कई बार तो यह भी देखा जाता है कि जो जितना धनवान और संपन्न है, वह उतना ही खिन्न और परेशान भी होता है।

सिर्फ धनवान ही नहीं, बुजुर्गों, बच्चों और विद्यार्थियों के जीवन से भी हंसी की दौलत धीरे-धीरे खत्म हो रही है। छोटे से लेकर बड़े तक सबकी जिंदगियों ने इतनी जटिलताएं बटोर ली हैं कि लोग हंसना भूलते जा रहे हैं। दिनचर्या मशीनवत होती जा रही है और आदमी रोबोट सरीखा संवेदनहीन।

नतीजा हंसने-हंसाने का वक्त कम हुआ है। अवसाद, उदासी और तनाव लोगों के जीवन में तेजी से शामिल हो रहा है। अवसाद यानी डिप्रेशन इक्कीसवीं सदी की सबसे खतरनाक बीमारियों की लिस्ट में शामिल हो चुका है।

खोजते हैं हंसने के बहाने

ऐसे माहौल में हमें समझना होगा कि जिंदगी को जीने के लिए सबसे अच्छा और खूबसूरत रास्ता, हंसी और खुशहाली की पगडंडियों से होकर गुजरता है। हंसते-हंसते सौ साल की जिंदगी यूं ही कट जाती है लेकिन रोते हुए एक भी दिन गुजरना मुश्किल हो जाता है। रोने की हजार वजहें कम पड़ जाएं यदि हंसने की एक वजह मिल जाए। लेकिन एक समय बड़ी सहज और सर्वव्यापी हंसी को आज तलाशना पड़ रहा है।

लोग पार्कों में जाकर कृत्रिम ठहाके लगा रहे हैं। लाफ्टर क्लबों में जाकर सायास हंसने की कोशिशें करने में लगे हैं। मुस्कराने का अभ्यास कर चेहरे पर हंसी लाने का प्रयास हो रहा है। कॉमेडी फिल्में देख रहे हैं। हास्य धारावाहिकों और शोज की भरमार है। यानी हर संभव तरीके से तलाश किया जा रहा है, एक अदद हंसी का ठिकाना।

हंसी के मूल में खुशी

अगर हम गहराई से देखें तो हंसी के मूल में तो खुशी होती है। यानी जब तक हम अंदर से खुश नहीं होंगे, हमारी आत्मा उस खुशी को महसूस नहीं कर रही होगी, तब तक चेहरे पर हंसी आएगी कैसे? मुस्कराहट महज हमारे शरीर और मुंह की प्रतिक्रिया भर नहीं जीने का सलीका भी है।

हमारी जिंदगी की तमाम भौतिक और मानसिक तृप्तियों का उद्देश्य हमारी खुशी से जुड़ा होता है। हंसी और खुशी दोनों सगी बहनें हैं। जब खुशी की संभावना हो तो हंसी उसका साथ देने अवश्य आती है। लेकिन इन दोनों में खुशी बड़ी बहन है और उसकी महत्ता भी ज्यादा है।

क्योंकि हंसी को बुलाने के लिए खुशी का होना बहुत जरूरी है। जिसकी जिंदगी में ये दो बहनें मौजूद हैं, उसका जीवन फूलों की सुगंध-सा महमहाता रहता है और जिसकी जिंदगी से ये नदारद, उसका जीवन ठहरे हुए पानी सा बजबजा उठता है। तो क्यों न हंसी को तलाशने से पहले खुशी को खोजा जाए।

अपने जीवन की तमाम प्राथमिकताओं को पीछे कर खुशी को लिस्ट में सबसे ऊपर किया जाए। लेकिन स्वाभाविक हंसी तब ही आएगी, जब मन खुश रहेगा। मन को खुश रखने के लिए आवश्यकताओं और इच्छाओं पर नियंत्रण जरूरी है।

दूसरे की चीजों, दूसरे की कामयाबी देखकर खीजने के बजाए खुद की स्थिति से खुश रहने की आदत बनानी जरूरी है, क्योंकि आवश्यकताएं और इच्छाएं तो अनंत हैं। तमाम सुविधाओं से खुशी नहीं खरीदी जा सकती लेकिन खुशी से तमाम सुविधाओं जितना आनंद जरूर लिया जा सकता है। तो क्यों न थोड़ी-थोड़ी खुशियां बांटकर सबको हंसने की वजहें मुहैया कराई जाएं।

जमकर हंसिए-हंसाइए

हंसी एक ऐसी सुखद और संक्रामक अनुभूति है कि एक पर इसके प्रभाव से ही आस-पास के सारे लोगों को भी अपनी चपेट में ले लेती है। मसलन, अगर एक व्यक्ति ठहाके मार-मार बेसाख्ता हंस रहा हो तो उसे देखकर ही अगल-बगल वालों को हंसी आ जाती है। दिल खोलकर हंसने के बाद जो ताजगी महसूस होती है, उसका असर देर तक हमारे मन-मस्तिष्क में बना रहता है।

दरअसल, हंसी और खुशी दोनों ही हमारे भीतर निहित सकारात्मक ऊर्जा का परिणाम होती हैं। खुशी बांटनी और लेनी हो तो ऐसी ऊर्जा से भरे लोगों के इर्द-गिर्द रहिए और दिल खोलकर हंसिए। परिवार के सदस्यों के साथ अधिक से अधिक बात कीजिए। बच्चों के साथ समय बिताइए।

इन सब से खुशी और हंसने का माहौल मिलेगा। परेशानियों को मन में रखकर परेशान होने के बजाय परिवार और नजदीकी दोस्तों से साझा कर मन हल्का कीजिए। ऐसा करने पर मन खुश होगा तो हंसी भी आएगी। इसलिए सिर्फ इस दिन ही नहीं, जिंदगी के हर दिन दिल खोलकर हंसिए और हंसाइए।

सेहत के लिए फायदेमंद

खुलकर हंसने से लंग्स और सारे रेस्परेटरी आर्गन्स (श्वसन अंग) की एक्सरसाइज होती है। साथ ही उनमें ऑक्सीजन की अधिक मात्रा जाने की संभावना बनती है। इससे ब्लड और ब्रेन दोनों को फायदा पहुंचता है। मानसिक फायदों की बात की जाए तो हंसने से इमोशंस रिलीज होते हैं। नेगेटिव इमोशंस को बाहर जाने का रास्ता मिलता है। यानी उनका वेंटिलेशन होता है।

अगर हम नेगेटिव इमोशंस को अपने भीतर रखते हैं तो उसके बहुत सारे नुकसान हैं, जैसे एंग्जाइटी, डिप्रेशन या टेंशन। खुलकर हंसने का मतलब हम अपने नेगेटिव इमोशन को चैनलाइज कर रहे हैं और खुद को मानसिक रोगों से बचा रहे हैं। हंसना अधिकतर समूह में या किसी के साथ होता है तो यह एक तरह से लोगों में इमोशनल कनेक्टिविटी भी बनाता है। इससे सेंस ऑफ सपोर्ट भी मिलता है जिससे स्ट्रेस पर आसानी से काबू किया जा सकता है।

-सरस्वती रमेश

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