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बच्चों के साथ बड़ों के लिए जरूरी है टीकाकरण, जानें वजह...

World Immunization Awareness Week : अधिकांश लोगों में आम धारणा है कि कुछ बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण नवजात शिशुओं और बच्चों का ही होता है। सच यह है कि वैक्सीनेशन के द्वारा केवल बच्चे ही नहीं वयस्क भी कई गंभीर बीमारियों से अपना बचाव कर सकते हैं। विभिन्न प्रकार के वैक्सीनेशन के बारे में विस्तार से जानिए।

बच्चों के साथ बड़ों के लिए जरूरी है टीकाकरण, जानें वजह...

World Immunization Awareness Week : टीकाकरण हमारे शरीर में टीके (वैक्सीन) लगाने की प्रक्रिया है, जिससे शरीर में रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करने के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन हो सके। वैक्सीन, ओरल ड्रॉप या इंजेक्शन द्वारा दी जा सकती है। वैक्सीनेशन, बच्चे ही नहीं हर उम्र के व्यक्तियों में रोग के प्रसार को कम करने में मदद करता है। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 24 से 30 अप्रैल तक 'वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन अवेयरनस वीक'मनाया जाता है।

क्यों जरूरी है वैक्सीनेशन

नई दिल्ली स्थित धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशिएलिटी ह़ॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉक्टर गौरव जैन कहते हैं, 'वैक्सीनेशन, संक्रमण के खिलाफ व्यक्ति की रक्षा के लिए उसके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है। बच्चे कुछ प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता के साथ पैदा होते हैं, जो उन्हें स्तनपान के माध्यम से अपनी मां से प्राप्त होती है।

यह प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है क्योंकि बच्चे की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित होना शुरू हो जाती है। ऐसे में कई बीमारियों से बचाव में वैक्सीनेशन काफी इफेक्टिव साबित होता है।' बच्चों के लिए जरूरी श्रीबालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली में पीआईसीयू के हेड डॉक्टर प्रदीप शर्मा बच्चों के लिए बेहद जरूरी कुछ महत्वपूर्ण वैक्सींस के बारे में बताते हैं।

बी.सी.जी. वैक्सीन:

बी.सी.जी. के टीके के जरिए बच्चें को टी.बी. की बीमारी से बचाया जा सकता है। आमतौर पर बच्चों के जन्म लेने के तुरंत बाद उन्हें बैसिले कैल्मेट गुरिन (बीसीजी) का टीका लगाया जाता है। यह मेनिनजाइटिस से संक्रमित होने की संभावना को भी कम करता है।

हेपेटाइटिस ए:

यह एक विषाणुजनित रोग है, जो लीवर को प्रभावित करता है। यह रोग बच्चों में ज्यादा होता है। इससे बचाव के लिए हेपेटाइटिस ए वैक्सीन का पहला टीका बच्चे के जन्म के 1 साल बाद और दूसरा टीका पहली डोज के 6 महीने बाद लगाना आवश्यक है।

हेपेटाइटिस बी:

हेपेटाइटिस बी रोग के कारण बच्चों के लीवर में जलन और सूजन होने लगती है। इसलिए बच्चे के जन्म के बाद पहली डोज, दूसरी डोज 4 हफ्ते बाद और 8 हफ्ते के बाद हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की तीसरी डोज दी जाती है।

डीटीपी:

बैक्टीरिया के कारण बच्चों को डिपथीरिया, टेटनस, काली खांसी जैसी गंभीर बीमारियां हो जाती हैं। इन बीमारियों से निजात के लिए बच्चों को जन्म के 6 हफ्ते बाद डीटीपी का पहला टीका और इस टीके के 4 हफ्ते बाद दूसरा, बाद में 4 हफ्ते के अंतराल पर तीसरा और चौथा टीका 18 महीने और पांचवां टीका 4 साल के बाद लगवाना चाहिए।

टायफॉइड वैक्सीन:

टायफॉइड फीवर एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो दूषित भोजन, पानी और पेय पदार्थ के सेवन से होता है। इसके कारण डायरिया हो जाता है। इसके लिए बच्चों को टायफॉइड वैक्सीन का पहला टीका 9 महीने की उम्र में और दूसरा टीका इसके 15 महीने बाद लगवाना चाहिए।

पोलियो ड्रॉप:

पोलियो का विषाणु दिमाग और मेरूदंड पर हमला करता है, जो लकवे का कारण बन सकता है। इससे निजात के लिए बच्चों को पोलियो ड्रॉप डॉक्टर के निर्देशानुसार पिलवाना चाहिए।

एमएमआर वैक्सीन:

बच्चों को मीजल्स, खसरा, मंप्स, गलगंड रोग से बचाव के लिए जन्म के 9 महीने में एमएमआर का पहला टीका और इसके 15 महीने में दूसरा टीका लगाना जरूरी है।

इंफ्लूएंजा वैक्सीन: इंफ्लूएंजा का टीका 7 महीने की उम्र में बच्चे को लगाया जाता है।

बरतें सावधानी

गुरुग्राम स्थित नारायणा सुपर स्पेशिएलिटी ह़ॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट-इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर सतीश कौल वैक्सीनेशन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताते हैं।

-वैक्सीनेशन हमेशा अच्छे अस्पताल में ही करवाना चाहिए।

-टीकाकरण से पहले टीके की एक्सपायरी डेट जरूर देख लें, क्योंकि एक निश्चित समय के बाद टीका खराब हो जाता है, जिससे बच्चे की सेहत को नुकसान हो सकता है।

-टीकाकरण के बाद बच्चों में बुखार, दर्द, सूजन इत्यादि लक्षण दिखना आम बात है, इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन टीकाकरण के बाद अगर बच्चा लगातार रोए, बुखार तेज हो, दर्द और सूजन बहुत ज्यादा नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

-इंजेक्शन लगने के बाद बच्चों में इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन और लाली हो सकती है, उस जगह पर गांठ भी बन जाती है जो कुछ सप्ताह बाद अपने आप ठीक हो जाती है।

वयस्क भी कराएं वैक्सीनेशन

जयपुर गोल्डन अस्पताल, दिल्ली के मेडिसिन-कंसल्टेंट डॉक्टर आलोक कल्याणी वयस्कों को भी कुछ बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीनेशन कराने की सलाह देते हैं।

इंफ्लूएंजा वैक्सीन:

कुछ वयस्कों को हर साल बदलते मौसम की शुरुआत में इंफ्लूएंजा फ्लू हो जाता है, उन्हें यह वैक्सीन लगवाना चाहिए। खासकर जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो, जैसे- 60 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति, एचआईवी के मरीज, प्रेग्नेंट महिलाएं।

हाई रिस्क हाइपर हेपेटाइटिस बी:

हेपेटाइटिस बी का खतरा मूलतः संक्रमित व्यक्ति का ब्लड लेने से, असुरक्षित यौन संबंध, नशीले पदार्थों का सेवन करने, हेरीडिटरी या फैमिली हिस्ट्री, किडनी डायलिसिस, संक्रमित व्यक्ति की पर्सनल हाइजीन की चीजें इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को होता है। पीड़ित व्यक्ति को शुरुआती लक्षण दिखने पर ही अगर हेपेटाइटिस ए, बी का वैक्सीन और ओरल मेडिसिन दी जाए तो इससे मरीज का आसानी से बचाव हो जाता है। प्रेग्नेंट महिलाओं को हेपेटाइटिस बी इंफेक्शन से बचने के लिए 0-1-6 महीने में हेपेटाइटिस बी वैक्सीन दी जाती है।

रूबैला वैक्सीन:

प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीने में तो बच्चे में भी बर्थ प्रॉब्लम्स आ सकती हैं। रिप्रोडक्टिव उम्र की महिलाओं और प्रेग्नेंसी प्लान करने वाली महिलाओं को रूबैला चेक कराने पर अगर यह नॉन-इम्यून आए, तो उसे एमएमआर वैक्सीन दी जाती है। उन्हें 6 महीने तक प्रेग्नेंसी प्लान न करने की सलाह दी जाती है।

न्यूमोकोकल:

लीवर, अस्थमा, किडनी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को हर 5 साल में पीसीवी (न्यूमोकोकल कॉन्जगेट वैक्सीन) और पीपीएस (न्यूमोकोकल पॉलिसेचाराइड वैक्सीन) दी जाती है। खासकर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में ये लाइफ वैक्सीन न्यूमोकोकल बैक्टीरिया से बचाव करती है। लेकिन जो महिलाएं प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हों या प्रेग्नेंट हों, उन्हें ये वैक्सीन नहीं देनी चाहिए।

-एच1एन1 वायरस से बचाव के लिए साल में एक बार स्वाइन फ्लू का इंजेक्शन लगवाया जा सकता है।

-जिन्हें बचपन में चिकनपॉक्स न हुआ हो उन्हें हर्पीस या जोस्टर वायरस से चिकनपॉक्स कभी भी हो सकता है। इसके लिए उस वयस्क को चिकनपॉक्स की वैक्सीन 4 सप्ताह के अंतराल पर 2 डोज में दी जाती है।

- सृजन अरोड़ा

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