Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

नवजात शिशु को ठंड से बचाने के लिए अपनाए जाने वाले ये तरीके होते हैं जानलेवा

सर्दी के मौसम में गर्माहट के लिए रजाई या कंबल में छुपकर बैठना बच्चे हो या बड़े सभी को बेहद पसंद होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं भूलवश या अनजाने में अक्सर बच्चों को खासकर नवजात शिशु को ठंड से बचाने और गर्म रखने के लिए अपनाए जाने वाले तरीके, उनके लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। अगर नहीं, तो आज हम आपको सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम क्या है और इसका नवजात शिशु से संबंध के अलावा सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम के लक्षण और गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जो आपके बच्चे को मौत के करीब ले जा सकते हैं।

जानिए क्या है सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम और नवजात बच्चों से इसका क्या है संबंध और इसके लक्षणक्या है सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम और नवजात बच्चों से इसका क्या है संबंध

अक्सर मांएं अपने नवजात शिशु बच्चों को सर्दियों में गर्म रखने के लिए उन्हें मोटे कंबल या रजाई में लपेटे रहती हैं, लेकिन कई बार उनकी ऐसी छोटी-छोटी गलतियां शिशु के लिए सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (Sudden Infant Death Syndrome) यानी SIDS का कारण बन जाते हैं। अगर आप सर्दियों में इस स्थिति से शिशु को बचाना चाहती हैं, तो हम आपके लिए लेकर आएं हैं सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम के लक्षण और गलतियां। जिन्हें पहचान कर आप अपनी गलतियों को सुधार सकें और शिशु की बेहतर तरीके से देखभाल कर सकें।

सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम क्या है

एक स्वस्थ शिशु की बिना किसी कारण से अचानक होने वाली मृत्यु को सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम यानि अचानक शिशु मृत्यु सिड्रोंम कहा जाता है। इसे कॉट डेथ भी कहते हैं। ये समस्या आमतौर पर शिशु के सोते होने वाली घटना या स्थिति होती है।

सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम के लक्षण :


1. सोते समय कंबल या रजाई को मुंह तक न ढकें

अगर आप भी अक्सर अपने शिशु को ठंड से बचाने के लिए उसके सोते समय रजाई या कंबल को मुंह तक कवर कर देती हैं, तो जल्द इस आदत को बदल लें। क्योंकि लंबें समय तक मुंह ढककर सोने से शिशु को फ्रेश एयर यानि ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। साथ ही रजाई या कंबल के अंदर गर्माहट, कार्बनडाई ऑक्साइड के स्तर में वृद्धि होना उसकी लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

2. कमरे में शिशु को अकेले सुलाना

आपने अक्सर फिल्मों और सीरियल्स में शिशु को अलग कमरे में सुलाते हुए जरुर देखा होगा, लेकिन ये गलती आप हकीकत में कभी भी न करें, क्योंकि शिशु को जन्म के बाद से लगभग 2 साल तक बेहद खास देखभाल की जरुरत होती है। ऐसे में उसे अकेले सुलाने से उसके बार-बार डरने, लंबे समय तक भूख लगने या अन्य वजह से रोने के कारण शिशु की सांस रुकने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा शरीर के ठंड लगने से बुखार, निमोनिया आदि बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।


3. पेट के बल न सुलाएं

अगर आप अक्सर अपने शिशु को पेट के बल सुलाना पसंद करती हैं, तो जल्द इस आदत को सुधार लें, क्योंकि पेट के बल सुलाने से शिशु के शरीर में ऑक्सीजन सही तरीके से नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में सीधा सुलाने से शरीर में ऑक्सीजन स्तर सामान्य रहता है साथ ही शारीरिक विकास में तेजी भी आती है। इसके अलावा अगर वो करवट लेते समय पेट के बल हो जाएं, तो उन्हें सीधा करें। वैसे तो मां के संपर्क में रहने से कुछ गुण जिंदगी में जरुरी होता है।

4. सही झूले या बेड का चुनाव न करना

आमतौर पर सभी लोग शिशु को अपने पास ही सुलाना पसंद करते हैं, लेकिन इससे होने वाली कई परेशानियों की वजह से कुछ लोग शिशु को अलग बेड या झूले में अपने पास सुलाना पसंद करते हैं। अगर आप भी ये तरीका अपना रही हैं, तो शिशु के लिए सही साइज या बेड का चुनाव जरुर करें। जिससे शिशु के लेटने, बैठने और खड़े होने पर गिरने का खतरा न हो। इसके अलावा शिशु की नाजुक त्वचा पर रेशेज से बचाने के लिए उनके बिस्तर का मुलायम होना भी बहुत जरुरी है, लेकिन वो फ्लैट भी हो जिससे बिस्तर को बार-बार ठीक न करना पड़े।


5. सामान्य बुखार को न करें इग्नोर

नवजात शिशु का शरीर बेहद नाजुक होता है। ऐसे में सर्दी के मौसम में गर्म रखने के लिए सभी उपयुक्त तरीकें अपनाएं (हाथ, सिर और पैरों को ढक कर रखें,लेयरिंग पहनाएं) इससे वो स्टाइलिश दिखने के साथ फिट होने में भी मदद मिलेगी।

Next Story
Top