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जानें ल्यूकोडर्मा यानि सफेद दाग से छुटकारा पाने के लिए करवाया जा सकता है परमानेंट मेकअप?

मेडिकल साइंस में ल्यूकोडर्मा का इलाज संभव है। लेकिन इसमें काफी लंबा वक्त लग सकता है। ऐसे में आप इलाज के दौरान टेंपरेरी डर्मा कलर्स का यूज करके इन दागों को कुछ समय के लिए छुपा सकती हैं। लेकिन कभी-कभी इलाज के बाद भी ये दाग पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते हैं, इसलिए उस स्थिति में दागों को छुपाने के लिए, परमानेंट कलरिंग तकनीक काम आती है। जिससे ल्यूकोडर्मा के दागों को पूरी तरह छुपाया जा सकता है।

जानें ल्यूकोडर्मा यानि सफेद दाग से छुटकारा पाने के लिए करवाया जा सकता है परमानेंट मेकअप?
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 जानें ल्यूकोडर्मा यानि सफेद दाग से छुटकारा पाने के लिए करवाया जा सकता है परमानेंट मेकअप? (फाइल फोटो)

मेडिकल साइंस में ल्यूकोडर्मा का इलाज संभव है। लेकिन इसमें काफी लंबा वक्त लग सकता है। ऐसे में आप इलाज के दौरान टेंपरेरी डर्मा कलर्स का यूज करके इन दागों को कुछ समय के लिए छुपा सकती हैं। लेकिन कभी-कभी इलाज के बाद भी ये दाग पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते हैं, इसलिए उस स्थिति में दागों को छुपाने के लिए, परमानेंट कलरिंग तकनीक काम आती है। जिससे ल्यूकोडर्मा के दागों को पूरी तरह छुपाया जा सकता है। इसमें सबसे पहले किसी एक सफेद पैच को चुनकर उस पर टेस्ट किया जाता है।

अगर स्किन उस रंग को ग्रहण कर लेती है तो 2-3 महीने के बाद स्किन से मैच करते कलर को त्वचा की डर्मिस लेयर तक पहुंचाया जाता है, जिससे दाग छुप जाते हैं। एक इंच स्कवॉयर एरिया पर कलरिंग करने में लगभग 10 से 15 मिनट का समय लगता है, ऐसे में इस उपचार को एक ही सिटिंग में पूरा किया जा सकता है। परमानेंट कलरिंग का असर 2 साल से लेकर 15 साल तक बना रह सकता है। परमानेंट कलरिंग हमेशा किसी अच्छे कॉस्मेटिक क्लीनिक में मौजूद एक्सपर्ट से ही करवाएं।

परमानेंट कलरिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कलर्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट द्वारा एप्रूव्ड होते हैं। इसे करवाते समय नीडिल और कलर्स को किसी एक व्यक्ति पर इस्तेमाल करने के बाद दूसरे व्यक्ति पर इस्तेमाल ना किया जाए और नीडल का इस्तेमाल स्टरलाइज्ड करने के बाद ही किया जाए, इन सभी बातों की पुष्टि करने के बाद ही परमानेंट कलरिंग करवानी चाहिए।

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