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Chamki Fever : क्या है चमकी बुखार, जानें चमकी बुखार के कारण, लक्षण, उपचार और सावधानी

Chamki Fever : चमकी बुखार (Chamki Bukhar) बच्चों में होने वाली एक गंभीर बीमारी है। इस जानलेवा बीमारी को मस्‍तिष्‍क ज्‍वर, दिमागी बुखार, जापानी इंसेफ्लाइटिस, नवकी बीमारी के नाम से भी जाना जाता है। चमकी बुखार (Chamki Fever) बहुत ज्यादा गर्मी और नमी वाले इलाकों में तेजी से फैलता है। इस बीमारी से अब तक बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर में 90 बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं। चमकी बुखार (Chamki Bukhar) से सबसे ज्यादा 1 से 15 साल की उम्र के बच्‍चे प्रभावित हुए हैं। इसलिए आज हम आपको जानलेवा चमकी बुखार क्या है (What is Chamki Fever) चमकी बुखार के लक्षण (Chamki Fever symptoms), चमकी बुखार के कारण (Chamki Fever Causes) , चमकी बुखार का उपचार (Chamki Fever treatment ) चमकी बुखार की सावधानियां (Chamki Fever Precautions) के बारे में बता रहे हैं।

Chamki Fever : क्या है चमकी बुखार, जानें चमकी बुखार के कारण, लक्षण, उपचार और सावधानी

Chamki Fever : चमकी बुखार (Chamki Bukhar) बच्चों में होने वाली एक गंभीर बीमारी है। इस जानलेवा बीमारी को मस्‍तिष्‍क ज्‍वर, दिमागी बुखार, जापानी इंसेफ्लाइटिस, नवकी बीमारी के नाम से भी जाना जाता है। चमकी बुखार (Chamki Fever) बहुत ज्यादा गर्मी और नमी वाले इलाकों में तेजी से फैलता है। इस बीमारी से अब तक बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर में 90 बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं। चमकी बुखार (Chamki Bukhar) से सबसे ज्यादा 1 से 15 साल की उम्र के बच्‍चे प्रभावित हुए हैं। इसलिए आज हम आपको जानलेवा चमकी बुखार क्या है (What is Chamki Fever) चमकी बुखार के लक्षण (Chamki Fever symptoms), चमकी बुखार के कारण (Chamki Fever Causes) , चमकी बुखार का उपचार (Chamki Fever treatment ) चमकी बुखार की सावधानियां (Chamki Fever Precautions) के बारे में बता रहे हैं।


चमकी बुखार के कारण :

अब तक की जांच के मुताबिक चमकी बुखार आने का मुख्य कारण अधपकी या कच्ची लीची खाना पाया गया है। ऐसे में खाली पेट लीची या कच्ची लीची का सेवन करने से बचें।

चमकी बुखार के लक्षण :

1. बच्‍चे का सुस्‍त होना

2. तेज बुखार आना

3. पूरे शरीर या किसी खास हिस्से में ऐंठन होना

4. बेहोश होना व नोचने पर शरीर में कोई हरकत नहीं होना।

ये लक्षण दिखते ही अपने नजदीक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र पर जाकर डॉक्‍टर को दिखाएं। अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जा रहा है तो आगे चलकर ये गंभीर हो सकता है।




चमकी बुखार के उपचार :

1.बच्‍चों को लगातार ओआरएस (ORS) का घोल पिलाते रहें।

2.बेहोशी व मिर्गी आने की अवस्‍था में मरीज को हवादार स्‍थान पर लिटाएं।

3.बच्‍चे के शरीर से कपड़ें हटा लें एवं गर्दन सीधा रखें।

4.डॉक्टर की सलाह पर ही पैरासोटामोल की गोली और अन्‍य सीरप दें।

5.तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें एवं पंखा से हवा करें ताकि बुखार कम हो सके।




चमकी बुखार आने पर बरतें ये सावधानियां...

1.बच्चा तेज धूप के संपर्क में न आए।

2.बच्‍चों को दिन में दो बार स्‍नान कराएं।

3.गर्मी के दिनों में बच्‍चों को ओआरएस अथवा नींबू-पानी-चीनी-नमक का घोल पिलाएं।

4.रात में बच्‍चों को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं।

5.बच्‍चे को खाली पेट लीची न खिलाएं, अधपके अथवा कच्‍चे लीची को खाने से बचें।

6.बच्‍चे को कंबल अथवा गर्म कपड़ों में न लपेटें, बच्‍चे की नाक न बंद करें। बच्‍चे की गर्दन झुकाकर न रखें।

7.मरीज के बिस्‍तर पर न बैठे साथ ही ध्‍यान रखें की मरीज के पास शोरगुल न हो।

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