Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

छोटी बच्चियों में यूरिनरी इंफेक्शन होने के कारण, लक्षण और उपचार

यूरिनरी इंफेक्शन की समस्या छोटी बच्चियों को भी होती है, लेकिन पैरेंट्स का ध्यान अकसर इस तरफ जाता ही नहीं है। यह लापरवाही बच्चे के लिए बड़ी प्रॉब्लम बन सकती है। ऐसे में जानना जरूरी है कि छोटी बच्चियों में यूरिनरी इंफेक्शन कैसे होता है और इनसे कैसे बच सकते हैं?

छोटी बच्चियों में यूरिनरी इंफेक्शन होने के कारण, लक्षण और उपचारUrinary Infection Causes Symptoms And Treatment In Young Girls In Hindi

पांच साल से कम उम्र के स्कूल जाने वाले बच्चों, खासकर लड़कियों में यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन (यूटीआई) की प्रॉब्लम देखने को मिलती है। लड़कों की अपेक्षा लड़कियों में यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन होने की संभावना ज्यादा होती है। यह इंफेक्शन आमतौर पर स्टूल या मल में मिलने वाले ई, कोलाई बैक्टीरिया से होता है, जो हमारी आंतों में होता है। यह बैक्टीरिया यूरीन की तरफ आ जाए तो यूरीन एरिया में इंफेक्शन कर देता है। कई बार छोटे-छोटे कीड़े पिनवार्म या एंट्रोबियस वर्मीकुलरिस, रेक्टम या गुदा एरिया से निकलते हैं और यूरिनरी एरिया या वैजाइना की तरफ जाने लगते हैं। इससे बच्ची को यूरीन इंफेक्शन हो जाता है। ध्यान न दिए जाने और समुचित उपचार न कराए जाने पर यह इंफेक्शन यूरेथ्रा, ब्लैडर, किडनी तक भी फैल जाता है। ऐसे में पैरेंट्स को छोटी बच्चियों में होने वाले यूरिनरी इंफेक्शन को लेकर अलर्ट रहना चाहिए और समय पर उपचार करवाना चाहिए।




इंफेक्शन के अन्य कारण

यूरीन या स्टूल पास करने के बाद सभी एरिया की क्लीनिंग ढंग से नहीं करने से बैक्टीरिया बच्ची को इंफेक्ट कर सकते हैं। हाइजीन का ध्यान न रखने से इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा बच्ची को पहनाए जाने वाले अंडरगार्मेंट्स ढंग से नहीं धोए गए हों, उनमें साबुन लगा रह गया हो या पूरी तरह सूखे बगैर ही पहनाने से इंफेक्शन हो सकता है। कई बार टाइट अंडरगार्मेंट्स के कारण वैजाइना एरिया में हवा पास नहीं हो पाती, जिससे वहां नमी बनी रहती है और फंगल इंफेक्शन का खतरा रहता है। बच्चों के कम पानी पीने से यूरीन खुल कर नहीं आता और इंटरनल इंफेक्शन बना रहता है।




प्रमुख लक्षण

यूरीन एरिया में रेडनेस होना, ईचिंग होना, यूरीन पास करने में जलन और दर्द होना, यूरीन का कलर पीला या मटमैला होना, यूरीन से स्मेल आना। पेट दर्द, बुखार, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन इसके लक्षण हो सकते हैं।




उपचार

जांच में अगर यूटीआई पाया जाता है तो उपचार के लिए 7-10 दिन की लिक्विड एंटीबॉयोटिक सिरप दिया जाता है। वैजाइना एरिया में हुई रेडनेस, ईचिंग, खुजली को दूर करने के लिए ओएंटमेंट लगाने के लिए दी जाती है। डॉक्टर्स पैरेंट्स को हाइजीन मेंटेन करने की गाइडेंस देते हैं।

सावधानियां

-बच्ची को हाइजीन का ध्यान रखने के बारे में समझाना चाहिए। पैरेंट्स उन्हें बताएं कि जब स्टूल की क्लीनिंग करें तो स्टूल वाले हाथ यूरीन एरिया में नहीं लगाएं। बेहतर है कि वैजाइना एरिया को पहले सादे पानी से धोने के बाद ही रैक्टम एरिया को धोएं। अंडरगार्मेंट्स पहनाने से पहले जरूरी है कि वैजाइना और यूरिनरी एरिया को रूई या सॉफ्ट टॉवल से पोंछ कर अच्छी तरह सुखाएं।

- नहाते समय वैजाइना एरिया को बेबी सोप से वॉश करना चाहिए, क्योंकि ये सोप बच्ची की स्किन और पीएच लेवल के हिसाब से बने होते हैं। जहां तक हो सके वैजाइना एरिया में पावडर लगाना अवॉयड करें।

- बच्चे को रोजाना डेढ़ से दो लीटर पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। इससे किसी भी तरह का यूरिनरी इंफेक्शन वॉश आउट होकर शरीर से बाहर निकल जाएगा। कुछ बच्चे अकसर यूरीन पास करने में आना-कानी करते हैं, इससे बैक्टीरिया ब्लैडर में लंबे समय तक बने रहते हैं और इंफेक्शन का खतरा रहता है। बच्चों को हर दो घंटे में यूरीन पास करने के लिए कहना चाहिए।

- स्कूल में आया को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए कि यूरीनेशन के लिए जाने वाली बच्ची की हाइजीन का ध्यान रखें।

लेखिका - रजनी अरोड़ा

Next Story
Share it
Top