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पीरियड्स में लड़कियों को स्विमिंग करनी चाहिए या नहीं...

लड़कियों को हर महीने पीरियड्स के असहनीय दर्द और हैवी ब्लीडिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनकी रोजाना की लाइफ काफी डिस्टर्ब हो जाती है। क्योंकि पीरियड्स के दौरान उनकी रेगुलर करने वाली चीजों पर अचानक से ब्रेक लगा दिया जाता है जैसे मंदिर नहीं जाना, किचन में नहीं जाना के अलावा स्विमिंग नहीं करना आदि। क्या आप भी मानते हैं कि पीरियड्स में लड़कियों को स्विमिंग करनी चाहिए या नहीं। अगर आप भी अक्सर ऐसे सवालों में कंफ्यूज रहते हैं और सही जवाब नहीं ढूंढ पाते हैं, तो परेशान न हो, क्योंकि आज हम आपको इस सवाल का जवाब दे रहे हैं।

पीरियड्स में लड़कियों को स्विमिंग करनी चाहिए या नहीं, जानें यहां
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पीरियड्स में स्विमिंग करना है सुरक्षित या नहीं...

अगर आपको भी स्विंमिंग करना पसंद है, लेकिन हर महीने सिर्फ पीरियड्स के दौरान स्विमिंग करना इसलिए छोड़ देती हैं कि इससे सभी लोगों को आपके पीरियड्स के बारे में पताचला जाएगा, इंफेक्शन और दर्द बढ़ने के डर, पूल में ब्लड के बिखरने का डर आदि। अगर आप भी अक्सर पीरियड्स संबंधी प्रश्नों से परेशान होकर अपने रेगुलर रुटीन को ब्रेक करदेती हैं या फ्रेंड्स के साथ ऑउटिंग जाने पर भी फुल इंज्वॉय नहीं कर पाती हैं, तो आज हम आपकी इस समस्या का हल लेकर आए हैं, जिसे जानकर आप पीरियड्स में भी अपनीस्विमिंग को खुलकर इंज्वॉय कर पायेगीं।


लड़कियों पीरियड्स में स्विमिंग करनी चाहिए या नहीं

लड़कियों को पीरियड्स में भी अन्य दिनों की तरह स्विमिंग करना सुरक्षित होता है। इसके लिए बस आपको कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर आप पीरियड्स में स्विमिंग करना चाहती हैं, तो ऐसे में टैम्पोन और मैन्सुटुअल कप का इस्तेमाल करें। इससे आप स्विमिंग के दौरान ब्लीडिंग होने के डर से खुद को मु्क्त रख पायेगीं। इसके अलावा अगर आपका स्विमिंग के दौरान ही पीरियड्स स्टार्ट होते हैं, तो ये पानी में मिलकर उसे मैला करके दूसरे लोगों को इंफेक्टिड कर देगा, तो आप गलत हैं, क्योंकि पूल के पानी को क्लोरीन से क्लीन किया जाता है। जो न सिर्फ मूत्र और पसीने बल्कि अन्य बीमारियों के संक्रमण को भी कम करने में कारगर होता है।


पीरियड्स में लड़कियों को स्विमिंग करते समय की सावधानियां

1. टैम्पोन और मेन्सुटुअल कप का करें यूज

अगर आप पीरियड्स के दौरान स्विमिंग करना चाहती हैं, तो ऐसे में हमेशा टैम्पोन और मेन्सुटुअल कप का यूज करें। क्योंकि ये बॉडी में अंदर चला जाता है, जिससे आपको बाहरी रुप से किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा, जबकि सेनेटरी पेड्स पानी को सोख लेगा और आपके ब्लीडिंग होने पर यूज नहीं हो पायेगा।

2. हमेशा गहरे रंग के कपड़े पहने

अगर आप पीरिड्स में स्विमिंग करना चाहती हैं, तो हमेशा गहरे रंग का स्विम सूट ही पहनें। इससे आपकी ब्लड स्टेन आने के बाद होने वाली शर्मिंदगी से खुद को बचा सकेगीं। आप काले, डार्क ब्लू या डार्क ग्रीन कलर का चुनाव करें।

3. वॉटरप्रूफ पैंटी का करें यूज

अगर आप पीरियड्स में स्विमिंग करना चाहती हैं लेकिन टैम्पोन या मेन्सुटुअल कप का यूज नही करना चाहती हैं, तो ऐसे में आप वॉटरप्रूफ पैंटी का ऑप्शन चुन सकती हैं। ये ऑप्शन थोड़ा महंगा है। दरअसल इन पैंटस का बाहरी सतह वॉशप्रूफ होती है, जिससे किसी भी तरह की लीकेज होने की संभावना बेहद ही कम होती है। इन पैंटस में कलीसिया होती है। जिससे वैजाइना सेट हो सके और ब्लड फ्लो को डायरेक्ट अब्जॉर्व कर सके। जिससे आप हमेशा सूखा फील कर सकें। इन पैंटस की खासियत ये है कि ये आपके पीरियड्स में होने वाले फ्लो को ही सोखता है पानी को नहीं।


पीरियड्स में स्विमिंग करने से जुड़े कॉमन सवाल

1. क्या पीरियड्स में स्विमिंग करने से पेट की ऐंठन बढ़ जाती है

लड़कियों को अक्सर पीरियड्स के दौरान पेट में ऐंठन और असहनीय दर्द से गुजरना होता है। मान्यताओं के मुताबिक, पीरियड्स में स्विमिंग करने से पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द में इजाफा होता है। जबकि कई शोधों में ये खुलासा हुआ है कि अगर पीरियड्स के दौरान तैराकी की जाए, तो इससे शरीर के साथ मन भी बेहद राहत महसूस करता है खासकर अगर पूल का पानी गर्म हो, तो ये बेहद फायदेमंद रहता है।

2. कॉम्पाटिशन्स में स्विमर कैसे करते हैं इस सिचुएशन से डील

आमतौर पर स्विमर कॉम्पाटिशन के दौरान टैम्पोन और मेन्सुटुअल कप का उपयोग करते हैं, जबकि कुछ इस समय पीरियड्स कंट्रोल करने वाली मेडिसिन या बर्थ कंट्रोल पिल्स का सहारा लेते हैं। ऐसा वो अक्सर डॉक्टर की सलाह पर ही करते हैं। क्योंकि ज्यादा दवाओं के सेवन करने से पीरियड साइकिल में बदलाव हो सकता है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।


3. क्या पानी में होने पर पीरियड्स आना रुक जाता है

आमतौर पर पानी में जाते हैं, तो इससे रक्त का बहाव तो होता है, लेकिन उसकी गति बेहद धीमी हो जाती है, जिससे वो पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाता है। ऐसा गुरुत्वाकार्षण के प्रभाव यानि यौनि पर पानी के दबाव की वजह से होता है, लेकिन जब आप छींकती, खांसती हैं, तो ये प्रेशर से बाहर आ सकता है।

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