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Summer Diet Tips and Vegetarian Diet Chart : गर्मियों की बीमारियों को देनी है मात, तो जानें शाकाहार के फायदे

Summer Diet Tips and Vegetarian Diet Chart : हालांकि मांसाहार, प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है लेकिन इसके पाचन में समय लगता है। ऐसे में गर्मी के दिनों में अपेक्षाकृत जल्दी पचने वाले शाकाहार का सेवन फायदेमंद होता है। गर्मी में सेहत के अनुकूल खाद्य के बारे में जानिए।

Summer Diet Tips : गर्मियों की बीमारियों को देनी है मात, तो जानें शाकाहार के फायदेSummer Diet Tips and Vegetarian Diet Chart In Hindi

Summer Diet Tips and Vegetarian Diet Chart : : इन दिनों गर्मी की तपिश चारों ओर है। ऐसे में जरा सी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने डेली रूटीन और डाइट को इस तरह रखें कि हमारी फिटनेस बरकरार रहे। हमारे शरीर का तापमान 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते हैं। गर्मी में बाहरी तापमान बढ़ने पर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेंप्रेचर मेंटेन रखता है, इसलिए पानी की भरपूर मात्रा का शरीर में होना अत्यावश्यक है।




नॉन वेज से करें परहेज

इस मौसम में हमारी डाइट ऐसी होनी चाहिए, जिसे पचाने में डाइजेस्टिव सिस्टम को एक्सट्रा मेहनत न करनी पड़े। हमारा डाइजेशन रेट, हमारे द्वारा लिए गए आहार के प्रकार पर निर्भर करता है। मीट, फिश जैसी चीजें पूरी तरह से पचने में दो दिन का समय लेती हैं, जबकि फल-सब्जियों को इसके लिए चौबीस घंटे से भी कम का समय लगता है। इसके अलावा फल-सब्जियों में मौजूद फाइबर की उच्च मात्रा, पाचनतंत्र को सही रखती है।

नॉनवेज को पचाने में शरीर को पानी की खपत भी ज्यादा करनी पड़ती है। शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है (या बंद कर देता है )। जब बाहर का टेंप्रेचर 45 डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37 डिग्री से ऊपर पहुंचने लगता है। शरीर का तापमान जब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है। इस स्थिति में स्नायु की कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है।

इसे थोड़ा और विस्तार से समझें तो यह सच है कि नॉन वेज में प्रोटीन होता है लेकिन गर्मी के मौसम में हमारा शरीर प्रोटीन को कठिनाई से पचा पाता है। बात की जाए सी-फूड्स की तो ये गर्मियों में फूड प्वॉयजनिंग का कारण बन सकते हैं। रेड मीट खाने के बाद शरीर के तापमान में वृद्धि होती है। मांस में काफी वसा पहले से होता है, जो बदहजमी का कारण बन सकता है। ऊपर से उसे पकाने का तरीका भी हेल्दी नहीं होता। अधिक से अधिक तेल-मसालों का प्रयोग उनको और भी भारी बना देता है।




रखें ध्यान

-मौसमी फल, सब्जियों और सलाद को भोजन में ज्यादा से ज्यादा स्थान दें।

-दोनों वक्त का भोजन समय पर और हल्का की लें।

-रोजाना कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पिएं। किडनी की बीमारी वाले प्रतिदिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें।




-जहां तक संभव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें।

- इस दौरान किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है। इसलिए सावधानी बरतें। अपने होंठों और आंखों को नम रखने का प्रयत्न करें।

-बेडरूम और अन्य रूम में 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रखकर रूम की नमी बरकरार रखी जा सकती है।

लेखक- कुमार गौरव अजीतेंदु

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