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स्टेम सेल थेरेपी से दिल की बीमारियों को ठीक करना हुआ आसान

आज के दौर में बढ़ते तनाव, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, मोटापे और गलत खान पान की आदतों की वजह से दिल से जुड़ी बीमारियों को खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में हाल ही में शोधकर्ताओं ने दिल के रोगों को ठीक करने में स्टेम सेल थेरेपी का सफल परीक्षण किया है। ये थेरेपी हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक को रोकने में कारगर साबित होगी। आइए जानते हैं क्या कहता है शोध...

स्टेम सेल थेरेपी से दिल की बीमारियों को ठीक करना हुआ आसानस्टेम सेल थेरेपी

शोधकर्ताओं ने पिछले दिनों स्टेम सेल थेरेपी के जरिए दिल की बीमारियों को जल्दी ठीक करने वाली एक नई थेरेपी को खोज निकाला है। स्टेम सेल थेरेपी में दिल की जीवित (मंद हो चुकी) और मर चुकी स्टेम कोशिकाओं को फिर कार्य करने योग्य बनाने में मदद मिलती है। इस प्रक्रिया में दिल की गंभीर रुप से बीमार कोशिकाओं की जगह अस्थि मज्जा मोनोन्यूक्लियर कोशिकाएं ( Bone Marrow Mononuclear Cells) और कार्डियक प्रोजेनेटर सेल्स (Cardiac Progenitor Cells) का उपयोग किया जाता है। जिससे इम्यून सिस्टम की मैक्रोफेज सेल्स में बदलाव आता है और वो दिल की बीमारी यानि घावों को भरने में अहम भूमिका निभाती है।

हॉवर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट के मुख्य जांचकर्ता जेफरी मोल्केंटिन,आणविक कार्डियोवास्कुलर माइक्रोबायोलॉजी के निदेशक और सिनसिनाटी चिल्ड्रन हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर में एक प्रोफेसर के मुताबिक, दिल की बीमारी में स्टेम सेल थेरेपी के जरिए हीलिंग प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है, जिससे दिल के दौरे के बाद दिल सुचारु रुप से कार्य कर सके।

साल 2014 में हुए एक शोध के मुताबिक, जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली (Innate Immune System), बीमार दिल के चारों ओर एक सेलुलर रक्षा कवच बनाती है जिससे बीमारी से प्रभावित भाग बेहतर तरीके से ठीक हो पाता है।


पहले किए गए शोध के मुताबिक, कार्डियोमायोसाइट्स को दुबारा शरीर में उत्पन्न करने पर क्षतिग्रस्त दिल में सी-किट पॉजिटिव हार्ट स्टेम सेल्स को इंजेक्ट करना काम फायदेमंद नहीं होता है।

जिसके बाद प्रोफेसर मॉल्केंटिन और उनके सहयोगियों ने नियमित रुप से स्टेम सेल थेरेपी का परीक्षण शुरु किया और पाया कि दो प्रकार के हर्ट स्टेम सेल्स के साथ काम किया जो वर्तमान में नियमित रुप से परीक्षण के लिए उपयोग किए जाते हैं। जिनमें अस्थि मज्जा मोनोन्यूक्लियर कोशिकाएं और कार्डियक पूर्वज कोशिकाएं प्रमुख हैं।


अस्थि मज्जा मोनोन्यूक्लियर कोशिकाएं और कार्डियक पूर्वज कोशिकाओं के अलावा मृत कोशिकाओं को इंजेक्ट करने के साथ ज़ायमोसन नामक एक अक्रिय रसायन भी दिल से जुड़ेरोगों को ठीक करने में मदद करता है। ज़ायमोसन (Zymosan) एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्पन्न करने वाला एक पदार्थ है।

ज़ायमोसन थेरेपी का उपयोग करने से इम्यून सेल्स चोट वाले क्षेत्र के बाहरी मैट्रिक्स संयोजी ऊतकों में कमी आती है और दिल के कार्य करने की गति में सुधार होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, स्टेम सेल और ज़ायमोसान जैसे पदार्थ दिल के प्रभावित क्षेत्र के आसपास इंजेक्ट करना सबसे फायदेमंद होता है।

आमतौर पर गलत तरीकों से टेस्ट के समय स्टेम सेल और ज़ायमोसन को कोशिकाओं में इंजेक्ट किया जाता है। जिससे वो इंफेक्शन का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में इंजेक्ट की जाने वीले पदार्थों को सीधे दिल के ऊतकों यानि प्रभावित क्षेत्र में डाला जाना चाहिए। इससे दिल की बीमारी में जल्द सुधार आने की संभावना रहती है।

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