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अगर आपको भी आते हैं खर्राटे, तो सोने से पहले कर लें ये छोटा सा काम

आमतौर पर सोते वक़्त स्नोरिंग करना यानी खर्राटे लेना स्वाभाविक प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन ऐसा कुछ गंभीर रोगों की वजह बन सकता है या किसी रोग का लक्षण भी हो सकता है। ऐसे में इसे इग्नोर किए बगैर ट्रीटमेंट करवाना चाहिए।

अगर आपको भी आते हैं खर्राटे, तो सोने से पहले कर लें ये छोटा सा काम

सोते वक्त सांस के साथ तेज आवाज और वाइब्रेशन आना खर्राटे यानी स्नोरिंग कहलाता है। कई बार स्नोरिंग हेल्थ संबंधी परेशानियों की ओर इशारा करते हैं, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार स्नोरिंग हल्की आवाज में आते हैं, लेकिन कुछ लोगों में ये आवाजें इतनी तेज और कठोर होती हैं कि साथ सोने वाले शख्स की नींद उड़ा देती हैं। स्नोरिंग का इलाज समय पर न किया जाए तो यह स्लीप एप्निया की वजह बन सकता है।

ओएसए की समस्या रात को नींद के दौरान होती है। ओएसए यानी आम भाषा में खर्राटे की समस्या. नींद के दौरान सांस में अवरोध की बीमारी। वैसे तो ओएसए एक आम बीमारी है, लेकिन इसके परिणाम बेहद गंभीर कई असाध्य रोगों को जन्म देने वाला और जानलेवा है। खास तौर से भारत में, जहां हम आम तौर पर स्नोरिंग को कोई बीमारी नहीं मानते हैं।

शरीर के लिए हार्मफुल

सच तो यह है कि इसकी वजह से सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है। पुन: जब सांस आती है, तो आवाज काफी तेज आवाज के साथ आती है। सांस रुकने की यह अवधि एक सेकंड से एक मिनट तक हो सकती है। श्वसन क्रिया में आने वाले इस अंतर यानी सांस के इस तरह रुकने और फिर वापस आने को एप्निया कहा जाता है।

समय पर इसका इलाज नहीं करवाने की दशा में यह बीमारी और गंभीर होती जाती है यानी, सांस रुकने की अवधि बढ़ती जाती है। इस बीमारी से रात को सोते वक्त शरीर में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। यानी शरीर में जहरीली हवा की मात्रा बढ़ जाती है। स्नोरिंग की वजह से जीवन की गुणवत्ता तो कम होती है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इसका निदान न हो।

बहुत सी आयुर्वेदिक और यूनानी औषधि बाजार में उपलब्ध हैं, जिनसे राहत मिलती है। स्नोरिंग के कारण नींद पूरी नहीं होने से दिनभर आलस्य और थकान शरीर में बना रहता है, जिससे मनुष्य निराशावादी और चिड़चिड़ा हो जाता है। घबराहट, सुस्ती, उदासी और पारिवारिक समस्याओं के अलावा गंभीर बीमारियों में मधुमेह, हृदयरोग और मस्तिष्क आघात तक हो सकता है।

स्नोरिंग की वजह

-ज्यादातर लोगों को लगता है कि स्नोरिंग होने की वजह ज्यादा थकान है इसलिए वे इसे अनदेखा कर देते हैं। इससे समस्या गंभीर हो जाती है। दरअसल, सोते समय सांस में रुकावट स्नोरिंग की मुख्य वजह है। गले के पिछले हिस्से के संकरे हो जाने पर ऑक्सिीजन संकरी जगह से होती हुई जाती है, जिससे आस-पास के टिश्यू वाइब्रेट होते हैं। इसी से स्नोरिंग होती है।

-कई बार लोग पीठ के बल सोते हैं, जिससे जीभ पीछे की तरफ तालू के पीछे यूव्यल (अलिजिह्वा - तालू के पीछे थोड़ा-सा लटका हुआ मांस) पर जाकर लग जाती है, जिससे सांस लेने और छोड़ने में रुकावट आने लग जाती है। इससे सांस के साथ आवाज और वाइब्रेशन होने लगता है।

- नीचे वाले जबड़े का छोटा होना भी खर्राटे आने का एक कारण है। जब व्यक्ति का जबड़ा सामान्य से छोटा होता है तो लेटने पर उसकी जीभ पीछे की तरफ हो जाती है और सांस की नली को ब्लॉक कर देती है। ऐसे में सांस लेने और छोड़ने के लिए प्रेशर लगाना पड़ता है, जिस कारण वाइब्रेशन होता है।

-नाक की हड्डी टेढ़ी होना और उसमें मांस बढ़ा होना। इसमें भी सांस लेने के लिए प्रेशर लगाना पड़ता है। इस वजह से सांस के साथ आवाज आती है।

-वजन बढ़ना भी खर्राटों को जन्म देता है। जब किसी का वजन बढ़ता है, तो उसकी गर्दन पर ज्यादा मांस लटकने लगता है। लेटते समय एक्स्ट्रा मांस के कारण सांस की नली दब जाती है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

-कई बार सांस लेने वाली नली संकरी और कमजोर होती है, जिस कारण सांस लेते समय आस-पास के टिश्यू वाइब्रेट होते हैं और सांस के साथ आवाज आने लगती है।

ऐसे करे कंट्रोल

-अगर स्नोरिंग का कारण ज्यादा वजन है तो समय रहते वजन कंट्रोल करें। डाइटीशियन से कॉन्टेक्ट कर खाने की आदत बदलें। जिम ज्वाइन करें। नियमित योग और एक्सरसाइज करने से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है।

-पीठ के बल सोने की बजाय करवट लेकर सोएं। इससे सांस की नली में रुकावट नहीं होती।

- सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा करके सोएं। इससे आपकी जीभ और सांस की नली में रुकावट नहीं आएगी।

- नाक की हड्डी में समस्या हो या फिर मांस बढ़ा हो तो डॉक्टर से मिलें।

- डॉ. ए. के. शास्त्री

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