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कार्बन डाई ऑक्साइड को खाने वाले बैक्टीरिया का हुआ आविष्कार, प्रदूषण नियंत्रण करने में होगा इस्तेमाल

बढ़ता प्रदूषण भारत ही नहीं बल्कि दुनिया सभी देशों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के नए नए उपायों की तलाश की जा रही है। ऐसे में इजरायल के वैज्ञानिकों ने E.coli बैक्टीरिया को खोज निकाला है जो पर्यावरण को शुद्ध बनाने में बेहद कारगर साबित होगा। क्योंकि ये बैक्टीरिया अपने शरीर को बनाने के लिए जरुरी शर्करा के उत्पादन के लिए कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं यानि CO2 का सेवन करता है। आइए जानते हैं क्या है ये शोध...

हाइजीन से दूर रहेंगे बैक्टीरिया-वायरस
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कार्बन डाई ऑक्साइड को खाने वाले बैक्टीरिया हुआ ईजाद, पाल्युशन को कंट्रोल करने में होगी मदद

पिछले कुछ समय से भारत समेत दुनिया के बहुत सारे देश गहरे वायु प्रदूषण की समस्या का सामना कर रहे हैं। जिसकी वजह से सांस की बीमारियों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। लेकिन इजरायल ने एक रिसर्च के जरिए ऐसे बैक्टीरिया को विकसित किया है, जो वातावरण से कार्बन को अवशोषित करके अपने शरीर को बनाता है। इससे फ्यूचर में ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकेगी।

शोधकर्ता बैक्टीरिया विकसित करते हैं जो कार्बन डाइऑक्साइड (Eat) को खाता है। ये बैक्टीरिया भविष्य में ग्रीनहाउस गैस संचय को कम करने के लिए जरुरी तकनीकों को विकसित करने में मदद कर सकता है। दरअसल इजरायल के शोधकर्ताओं ने सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड खाने वाले बैक्टीरिया को विकसित किया है, जो हवा में मौजूद कार्बन को अवशोषित करके अपने बायोमास शरीर का निर्माण करता है।


इजरायल के शोधकर्ताओं के द्वारा बुधवार को जारी की गई रिसर्च रिपोर्च के मुताबिक, मध्य इजरायल की वेइज़मैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (WIS) में केवल कार्बन डाइऑक्साइड खाने वाले बैक्टीरिया को विकसित किया गया है। हवा में मौजूद कार्बन डाईआक्साइड को ग्रहण करने वाले बैक्टीरिया का उपयोग करने से वातावरण से ग्रीन हाउस गैसों और ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभाव को कम करने वाली तकनीकों और भविष्य की प्रौद्योगिकियों को विकसित करने में मदद मिल सकेगी।

जर्नल सेल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, इस बैक्टीरिया को विकसित करने में लगभग 1 दशक से भी लंबी अवधि का समय लगा है और शर्करा यानि चीनी खाने वाले बैक्टीरिया को चीनी से दूर किया गया। इजरायल के वैज्ञानिकों ने E.coli बैक्टीरिया को "रिप्रोग्राम" करके सिर्फ पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करने और उससे शर्करा का उत्पादन करके अपने शरीर का निर्माण करने के लिए बनाया।


शोधकर्ताओं ने उन जीनों को मैप किया और उनमें से कुछ बैक्टीरिया के जीनोम को अपनी लैब में सेव कर लिया। जिसके बाद, उन्होंने बैक्टीरिया में एक ऐसे जीन को डाला जो फार्मेट नामक पदार्थ से ऊर्जा उत्पन्न करने का काम करता है। ये बैक्टीरिया को आहार बदलने के लिए प्रोत्साहित करता है और चीनी के सेवन को धीरे-धीरे बंद करने के लिए जरुरी विकास की प्रक्रियाओं को प्रयोगशाला में करने की जरुरत होती है। जिससे बैक्टीरिया को कम मात्रा में चीनी मिली और फार्मेट करने के बाद कार्बन डाइऑक्साइड के सेवन में बढ़ोतरी हुई। जिससे बैक्टीरिया को चीनी सेवन से हटाने में लगभग 6 महीने से अधिक का समय लगा।

शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि इन जीवाणुओं का उत्पादन पृथ्वी के लिए बेहतर साबित होगा। उदाहरण के लिए, जिन बायोटेक कंपनियों में जिस रसायन का उत्पादन करने के लिए खमीर या बैक्टीरियल का उपयोग किया जाता है, वो आज इस्तेमाल की जाने वाली कॉर्न सिरप में बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करने वाली कोशिकाओं में इनका उत्पादन कर सकते हैं।

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