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बरसाती बीमारियों से ऐसे रहें सुरक्षित, बरतें ये सावधानी

बारिश के मौसम में कई तरह की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। इनसे बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतने के साथ ही घरेलू उपचार भी कारगर हो सकते हैं।

बरसाती बीमारियों से ऐसे रहें सुरक्षित, बरतें ये सावधानी
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बरसाती मौसम की बीमारियाँ (प्रतीकात्मक फोटो)

बरसात का मौसम जितना सुहाना होता है, उतना ही इसमें बीमारियों की संभावनाएं भी काफी बढ़ जाती हैं। इस मौसम में असंख्य छोटे-बड़े, उड़ने वाले, रेंगने वाले आदि कई तरह के कीड़े-मकौड़े पैदा हो जाते हैं। इन सब से बचने का एक ही उपाय है कि घर के आस-पास जितनी घास या खर-पतवार हो उसे तुरंत हटा दिया जाए। सोते समय शरीर पर सरसों का तेल अवश्य लगाएं। यह उपाय न अपनाना चाहें तो मच्छरदानी अवश्य लगाकर सोएं। पानी हमेशा उबाल कर ठंडा किया हुआ ही पिएं।

इनसे करें परहेज

खाने में कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिनका इस मौसम में सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसी सभी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए। जैसे खटाई, आचार, मैदे से बने व्यंजन, चने की दाल, बेसन से बने व्यंजन और चटपटे मसालेदार खाद्य पदार्थ नहीं खाना चाहिए।

इनका करें सेवन

इस मौसम में खाने योग्य पदार्थों में शामिल हैं- लौकी, पुदीना, नीबू, नीबू वाला पानी, गेहूं, कालीमिर्च, दालचीनी, इलायची, जामुन, आंवला, सूप का सेवन हितकर है।

इन पर भी करें अमल

-कटे खुले रखे फल या सलाद न खाएं।

-मांसाहारी भोजन न करें।

-एयर कंडीशनर भवनों और वाहनों में रहने/चलने वालों को शरीर का तापमान सामान्य होने तक इंतजार करना लाभकारी है। - बरसात में भीगना ही नहीं चाहिए। यदि भीग भी जाएं तो तुरंत सूखे तौलिए से सिर को अच्छी तरह रगड़ कर पानी सुखाएं। उक्त सभी उपायों को अपनाकर बरसात में होने वाली सामान्य बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

घरेलू उपचार

इस मौसम में कई बीमारियां फैलती हैं जैसे पेट खराब होना, खांसी-जुकाम, पेट में दर्द आदि के होते ही घरेलू उपचार का सहारा लिया जाए तो परेशानी से बचा जा सकता है। -पेट में गैस हो तो हिंग्वाष्टक चूर्ण आधा चम्मच को पानी से लेना लाभकारी है।

-कब्ज हो तो स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण सोते समय गर्म पानी से एक चम्मच लेना चाहिए।

-जी मिचलाने या उल्टी आए तो पांच लौंग, दो गिलास पानी में उबालकर ठंडा कर दो-दो चम्मच आवश्यकतानुसार पिलाते रहें। -पतले दस्त हों तो बेल का गूदा पानी में मथ कर चीनी या बूरा मिलाकर पिलाएं। बेल का मुरब्बा बेल का चूर्ण भी लाभकारी है। इसके अलावा नमक-चीनी का घोल बार-बार पिलाने से दस्तों में आराम होगा और शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।

-कमर दर्द और जोड़ों के दर्द के लिए सवेरे खाली पेट दो-तीन लहसुन की कलियां कुचलकर पानी से निगल लें। सौ ग्राम सरसों के तेल में दस बारह कली लहसुन की आधा चम्मच अजवायन डालकर काला होने तक पकाएं। ठंडा होने पर दर्द वाली जगह मालिश करें। इसके अलावा सवेरे-शाम एक-एक चम्मच मेथी गर्म पानी के साथ लेना लाभकारी है।

- फ्रिज के बजाय घड़े का पानी पीना उत्तम रहेगा।

किसी भी शारीरिक समस्या के होने पर कोई भी उपचार प्रयोग करने से पहले योग्य-अनुभवी चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है।

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